Hindi Moral Story For Class 2 | Best 10 Moral Story In Hindi For Class 2

Hindi Moral Story For Class 2 - हिंदी मोरल स्टोरी केलिए दोस्तों अगर आप ऑनलाइन अपर आया हे तो यह पर आपको मिलेगा हिंदी मोरल स्टोरी फॉर क्लास 2 . यह पार द्वितिओ श्रेणी के बच्चो केलिया सबसे अच्छा नैतिक कहानिया मैंने लिखी हैं। 

    हिंदी में नैतिक कहानिया बच्चो केलिए बहोत फायदे मंद होता हैं, इसी लिए हम हर टाइम बच्चो को हिंदी मोरल स्टोरी सुनना छाते है, यह पर आज हमने 10 हिंदी नैतिक कहानिया लिखी हैं, तो चलिए पड़ते हैं Hindi Moral Story For Class 2  

    मेहनत का फल मीठा होता है | Hindi Moral Story For Class 2

    एक गांव में दो मित्र नकुल और सोहन रहते थे। नकुल बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर एक बीघा जमीन खरीदी। जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे। 


     सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन नकुल कुछ काम नहीं करता बल्कि मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता था। इसी तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी। 

    Hindi Moral Story For Class 2
    Hindi Moral Story For Class 2


    जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने नकुल को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलेगा क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है।


      यह बात सुनकर नकुल बोला नहीं धन का तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से इसकी प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। भगवान के बिना कुछ संभव नहीं है। जब वह दोनों इस बात को आपस में नहीं सुलझा सके तो धन के बॅटवारे के लिए दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे। 


    मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तक तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाने है तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना चाहिए।


    दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर  जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। लेकिन नकुल चावल की बोरी को लेकर मंदिर में गया और भगवान से चावल में से कंकड़ अलग करने की प्रार्थना की।


      अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुआ। नकुल वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के पास गया।


    मुखिया ने नकुल को कहा की दिखाओ तुमने कितने चावल साफ़ किये है। नकुल ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है की सारे चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे।


      जमींदार ने नकुल को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो। जमींदार ने धन का ज्यादा हिस्सा सोहन को दिया। इसके बाद नकुल भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुई। 


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    Hindi Moral Story For Class 2 | ओलोस ना होना

    उत्कर्ष बडा ही आलसी लड़का था। वह पढ़ाई में बहुत कमजोर था और अक्सर परीक्षा में फेल हो जाया करता था। अपनी मां से झूठ बोल कर वह पैसे ले लिया करता और मित्रों के साथ घूमता।


    एक दिन स्कूल छूटने के बाद उत्कर्ष शाम के समय घूमने निकला। उसने सोचा कि पहले में चलकर नाश्ता कर लिया जाए। वह एक होटल में घुसा। होटल से निकल कर उसकी इच्छा सिनेमा देखने की हुई।


      तभी उसने देखा कि उसके जूते गंदा हो गए है और उसने सोचा क्यों न उन पर थोड़ी पोलिश लगवा दी जाए। यह सोचकर वह सामने की ओर बढ़ गया। वहीं एक पेड़ फे नीचे एक बूढा आदमी मोची का काम कर रहा था। उस समय उसके पास कोई ग्राहक भी नहीं था।


      उत्कर्ष ने अपना दाहिना पांव उसके सामने कर दिया, और उस बूढ़े आदमी ने अपनी पोलिश की डिबिया खोली और मन लगा कर पालिश करने में जुट गया। तभी उस बूढ़े आदमी का बेटा मामूली वेशभूषा में वहां आया। उसके हाथ में कुछ पुस्तकें थी।


       वह स्कूल से सीधा ही चला आ रहा था। आते ही उसने पुस्तकें एक किनारे रख दीं और बड़े प्रसन्‍न मन से अपने पिता से बोला, “बापू, अब तुम उठो। दिन भर काम करते-करते तुम थक गए होंगे। जरा आराम कर लो। सर के जूते मैं चमका देता हूँ।”


    अपने बेटे की बात सुनकर बूढ़ा आदमी धीरे से उठा और घर की ओर चल दियां। यह सब देख कर तो उत्कर्ष अचरज में पड गया। उसने पूछा, “क्यों भाई, क्या तुम कहीं नौकरी करते हो?“ “जी नहीं, मै पढ़ता हूँ।” बूढ़े आदमी के बेटे ने कहा।


     “लेकिन उसके बाद भी तुम यह नींच काम करते हो, क्या तुम्हें शर्म नहीं आती?” उत्कर्ष ने पूछा। “काम करने में शर्म कैसी। मेरे बापू यही काम करके मुझे पढ़ा लिखा रहे हैं। शाम को मैं उनकी मदद किया करता हूँ। बूढे हो गए हैं न, थक जते हैं। उनकी हर तरह से मदद करना मैं अपना कर्तव्य समझता हूँ।


     दुनिया में कोई काम छोटा नहीं होता, दरअसल जो काम करता है उसे ही बड़ा आदमी कहलाता है” उस लड़के ने जवाब दिया।


    Moral Of The Story: 

       इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।


    शनि, मंगल और शुक्र | Hindi Moral Story For Class 2

    शनि, मंगल और शुक्र, तीनों देवों ने निश्चय किया कि वे एक-एक चीज ऐसी बनाएं, जो एकदम संपूर्ण हो। शनि ने मनुष्य को बनाया| मंगल ने बैल बनाया और शुक्र ने एक मकान बनाया।


    अब उन लोगों ने नारद मुनि को बुलाया और उनसे निर्णय करने को कहा कि इन तीनों में से कौन संपूर्ण है। नारद ने बैल से शुरुआत की और उसमें कमी ये पाई कि उसके सींग आँखों से ऊपर है। “इस कारण बैल अपने सींग तो देख ही नहीं पाएगा,” नारद ने कहा। अब बारी मनुष्य की थी।


    नारद मुनि ने पाया कि मनुष्य भी संपूर्ण नहीं है क्योंकि उसकी छाती में खिड़कियाँ नहीं हैं जिस कारण उसके अंदर के विचार बाहर नहीं आ सकते। अब बारी मकान की आई।


     मकान में नारद ने कमी पाई कि उसमें पहिए नहीं हैं, जिस कारण वह चल-फिर नहीं सकता। यह सुनकर शनि ने कहा, “आपके जैसा गलतियाँ गिनाने वाला कभी संतुष्ट नहीं हो सकता। 


    Moral Of The Story:

     दूसरों की गलतियाँ तब गिनाइए, जब आप स्वयं कोई ऐसी चीज बना लें जिसमें कोई कमी न हो।”


    Moral Story In Hindi For Class 2 | बच्चे परी और चुड़ैल

      बहुत समय पहले, एक भाई-बहन पार्क में खेल रहे थे। एक चुडैल ने उन्हें देखा और उनका अपहरण कर लिया। वह उन बच्चों को एक अंधेरे कमरे में बंद करके खाना खाने चली गई। भाग्य से, एक खिड़की खुली हुई थी।


      वे बच्चे उसमें से निकल भागे। जल्दी ही चुडैल वापस आ गई। उसने देखा, बच्चे कमरे में नहीं थे।  वह उनको घर के बाहर ढूंढने के लिए निकली। उधर, बच्चे अपने घर का रास्ता ढूंढ रहे थे।


    तभी,उन्हें एक दयालु परी मिली। उस परी ने उनकी मदद करने का वादा किया। लेकिन, बहुत जल्द चुडैल वहाँ पहुँच गई।   परी ने बच्चों के चारों ओर आग का घेरा बना दिया। चुडैल ने फूंक मार कर आग बुझा दी।'


        तब परी ने बच्चो के चारों ओर काँच की दीवार बना दी। उस दीवार को तोड़ने के लिए, चुड़ैल अपने घर हथौड़ा लेने भागी।   लेकिन उसके आने से पहले ही परी ने बच्चों को उनके घर पहुंचा दिया।  


    अर्जुन का सिखा | Moral Story In Hindi For Class 2

    "एक बार की बात है, द्रोणाचार्य को कौरव दुर्योधन मैं हमेशा अर्जुन का पक्ष लेने का प्रश्न उठाया। तब द्रोणाचार्य ने दुर्योधन के प्रश्न का जवाब देने के लिए सबसे एक परीक्षा लिया। द्रोणाचार्य ने एक लकड़ी की चिड़िया को एक पेड़ की डाली पर रख दिया। 


     सबसे पहले द्रोणाचार्य ने जेष्ठ भाई युधिष्ठिर से प्रश्न किया – युधिष्ठिर तुम्हें पेड़ पर क्या दिखाई दे रहा है? तभी द्रोणाचार्य जी ने युधिष्ठिर को निशाना लगाने के लिए मना कर दिया। इसी प्रकार द्रोणाचार्य जी ने एक-एक करके सबसे एक ही प्रश्न पूछा कि उन्हें पेड़ पर क्या दिखाई दे रहा है?


      परंतु किसी को फिर नजर आता तो किसी को डाली नजर आती या फिर किसी को पास में दूसरा पेड़।जब द्रोणाचार्य मैं अर्जुन से प्रश्न किया – अर्जुन तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है? तभी अर्जुन ने उत्तर दिया गुरु जी मुझे तो बस चिड़िया की आंख दिखाई दे रही है, सिर्फ आंख।


       गुरुजी खुश हुए और उन्होंने अर्जुन को तीर चलाने के लिए कहा। अर्जुन ने धनुष से निशाना साधा और तीर छोड़ दिया। तीर सीधा जा कर उस लकड़ी की चिड़िया की आंख में जाकर लगी।


    Moral Story In Hindi For Class 2 | चूहे और बिल्ली

     एक घर में बहुत चूहे हो गए थे। वे घर का कीमती सामान कुतर देते थे। घर का मालिक इन चूहों से परेशान होकर एक बिल्ली ले आया। बिल्ली उस घर में आकर बहुत खुश थी, क्योंकि मालकिन उसे सुबह-शाम कटोरा भर दूध देती। 


       बिल्ली दिनभर चूहों को मारती और उन्हें खा जाती। इस तरह मालिक तो खुश था ही, उसके दिन भी खूब मौज-मस्ती में बीत रहे थे। लेकिन घर में बिल्ली के आने से चूहे काफी परेशान थे। 


    पहले तो वे निडर होकर जहाँ-तहाँ घूमते थे, पर अब उन्हें सावधान रहना पड़ता था। बिल्ली के डर से वे सारा दिन अपने बिल में घुसे रहते थे। इससे बिल्ली काफी परेशान थी।


       एक दिन जब बिल्ली के हाथ एक भी चूहा नहीं लगा तो वह लकड़ी के एक तख्ते पर बेसुध होकर लेट गई। उसने सोचा कि चूहे उसे मरा हुआ समझकर उसके पास आएंगे और वह उन्हें पकड़ लेगी।


    पर चूहे बिल्ली की चाल समझ गए और बिल में ही छिपे रहे। शाम को एक चूहा बाहर निकलकर बोला, “बिल्ली मौसी! हम जानते हैं कि तुम नाटक कर रही हो इसलिए हम तुम्हारे पास नहीं आएंगे।” मायूस होकर बिल्ली स्वयं ही वहाँ से उठ गई।  


    Moral Of The Story:

     खतरे को दूर से भाँप लेना ही अक्लमंदी है।


    साधु और चूहे की कहानी | Moral Story In Hindi For Class 2

    बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक साधु मंदिर में रहा करता था। उनकी दिनचर्या रोजाना प्रभु की भक्ति कराना और आने-जाने वाले लोगों को धर्म का उपदेश देना थी।


      गांव वाले भी जब भी मंदिर आते, तो साधु को कुछ न कुछ दान में दे जाते थे। इसलिए, साधु को भोजन और वस्त्र की कोई कमी नहीं होती थी। रोज भोजन करने के बाद साधु बचा हुआ खाना छींके में रखकर छत से टांग देता था।


    समय ऐसे ही आराम से निकल रहा था, लेकिन अब साधु के साथ एक अजीब-सी घटना होने लगी थी। वह जो खाना छींके में रखता था, गायब हो जाता था। साधु ने परेशान होकर इस बारे में पता लगाने का निर्णय किया।


       उसने रात को दरवाजे के पीछे से छिपकर देखा कि एक छोटा-सा चूहा उसका भोजन निकालकर ले जाता है। दूसरे दिन उन्होंने छींके को और ऊपर कर दिया, ताकि चूहा उस तक न पहुंच सके, लेकिन यह उपाय भी काम नहीं आया।


       उन्होंने देखा की चूहा और ऊंची छलांग लगाकर छींके पर चढ़ जाता और भोजन निकाल लेता था। अब साधु चूहे से परेशान रहने लगा था।


    एक दिन उस मंदिर में एक भिक्षुक आया। उसने साधु को परेशान देखा और उसकी परेशानी का कारण पूछा, तो साधु ने भिक्षुक को पूरा किस्सा सुना दिया।


      भिक्षुक ने साधु से कहा कि सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि चूहे में इतना ऊंचा उछलने की शक्ति कहां से आती है। उसी रात भिक्षुक और साधु दोनों ने मिलकर पता लगाना चाहा कि आखिर चूहा भोजन कहां ले जाता है।


    दोनों ने चुपके से चूहे का पीछा किया और देखा कि मंदिर के पीछे चूहे ने अपना बिल बनाया हुआ है। चूहे के जाने के बाद उन्होंने बिल को खोदा, तो देखा कि चूहे के बिल में खाने-पीने के सामान का बहुत बड़ा भण्डार है।


       तब भिक्षुक ने कहा कि इसी वजह से ही चूहे में इतना ऊपर उछलने की शक्ति आती है। उन्होंने उस सामग्री काे निकाल लिया और गरीबों में बांटा दिया। जब चूहा वापस आया, तो उसने वहां पर सब कुछ खाली पाया, तो उसका पूरा आत्मविश्वास समाप्त हो गया।


       उसने साेचा कि वह फिर से खाने-पीने का सामान इकट्ठा कर लेगा। यह सोचकर उसने रात को छींके के पास जाकर छलांग लगाई, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण वह नहीं पहुंच पाया और साधु ने उसे वहां से भगा दिया।


    कहानी से सीख संसाधनों के अभाव में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इसलिए, जो भी संसाधन आपके पास हों, उसका ध्यान रखना चाहिए।


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    Hindi Moral Story For Class 2 | गोरिया और घमंडी हाथी की कहानी

    एक पेड़ पर एक चिड़िया अपने पति के साथ रहा करती थी। चिड़िया सारा दिन अपने घोंसले में बैठकर अपने अंडे सेती रहती थी और उसका पति दोनों के लिए खाने का इंतजाम करताथा।


       वो दोनों बहुत खुश थे और अंडे से बच्चों के निकलने का इंतजार कर रहे थे।एक दिन चिड़िया का पति दाने की तलाश में अपने घोंसलें से दूर गया हुआ था और चिड़िया अपने अंडों की देखभाल कर रही थी।


    तभी वहां एक हाथी मदमस्त चाल चलते हुए आया और पेड़ की शाखाओं को तोड़ने लगा। हाथी ने चिड़िया का घोंसला गिरा दिया, जिससे उसके सारे अंडे फूट गए। चिड़िया को बहुत दुख हुआ। उसे हाथी पर बहुत गुस्सा आ रहा था।


       जब चिड़िया का पति वापस आया, तो उसने देखा कि चिड़िया हाथी द्वारा तोड़ी गई शाखा पर बैठी रो रही है। चिड़िया ने पूरी घटना अपने पति को बताई, जिसे सुनकर उसके पति को भी बहुत दुख हुआ। उन दोनों ने घमंडी हाथी को सबक सिखाने का निर्णय लिया।


       वो दोनों अपने एक दोस्त कठफोड़वा के पास गए और उसे सारी बात बताई। कठफोड़वा बोला कि हाथी को सबक मिलना ही चाहिए। कठफोड़वा के दो दोस्त और थे, जिनमें से एक मधुमक्खी थी और एक मेंढक था।


       उन तीनों ने मिलकर हाथी को सबक सिखाने की योजना बनाई, जो चिड़िया को बहुत पसंद आई। अपनी योजना के तहत सबसे पहले मधुमक्खी ने हाथी के कान में गुनगुनाना शुरू किया। हाथी जब मधुमक्खी की मधुर आवाज में खो गया, तो कठफोड़वे ने आकर हाथी की दोनों आखें फोड़ दी।


    हाथी दर्द के मारे चिल्लाने लगा और तभी मेंढक अपने परिवार के साथ आया और एक दलदल के पास टर्रटराने लगा। हाथी को लगा कि यहां पास में कोई तालाब होगा। वह पानी पीना चाहता था, इसलिए दलदल में जाकर फंसा। इस तरह चिड़िया ने मधुमक्खी, कठफोड़वा और मेंढक की मदद से हाथी से बदला ले लिया।


    Moral Of The Story:

    – बच्चों, इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि एकता और विवेक का उपयोग करके बड़ी से बड़ी मुसीबत को हराया जा सकता है।


    दो हंसो की कहानी | Hindi Moral Story For Class 2

    बहुत पुरानी बात है हिमालय में प्रसिद्ध मानस नाम की झील थी। वहां पर कई पशु-पक्षियों के साथ ही हंसों का एक झुंड भी रहता था। उनमें से दो हंस बहुत आकर्षक थे और दोनों ही देखने में एक जैसे थे, लेकिन उनमें से एक राजा था और दूसरा सेनापती।


       राजा का नाम था धृतराष्ट्र और सेनापती का नाम सुमुखा था। झील का नजारा बादलों के बीच में स्वर्ग-जैसा प्रतीत होता था। उन समय झील और उसमें रहने वाले हंसों की प्रसिद्धी वहां आने जाने वाले पर्यटकों के साथ देश-विदेश में फैल गई थी।


    वहां का गुणगान कई कवियों ने अपनी कविताओं में किया, जिससे प्रभावित होकर वाराणसी के राजा को वह नजारा देखने की इच्छा हुई। राजा ने अपने राज्य में बिल्कुल वैसी ही झील का निर्माण करवाया और वहां पर कई प्रकार के सुंदर और आकर्षक फूलाें के पौधों के साथ ही स्वादिष्ट फलों के पेड़ लगवाए।


       साथ ही विभिन्न प्रजाती के पशु-पक्षियों की देखभाल और उनकी सुरक्षा की व्यवस्था का आदेश भी दिया। वाराणसी का यह सरोवर भी स्वर्ग-जैसा सुंदर था, लेकिन राजा के मन में अभी उन दो हंसों को देखने की इच्छा थी, जो मानस सरोवर में रहते थे।


       एक दिन मानस सरोवर के अन्य हंसों ने राजा के सामने वाराणसी के सरोवर जाने की इच्छा प्रकट की, लेकिन हंसा का राजा समझदार था।


    वह जानता था कि अगर वो वहां गए, तो राज उन्हें पकड़ लेगा। उसने सभी हंसों को वाराणसी जाने से मना किया, लेकिन वो नहीं माने। तब राजा और सेनापती के साथ सभी हंस वाराणसी की ओर उड़ चले।


       जैसे ही हंसों का झुंड उस झील में पहुंचा, तो अन्य हंसों को छोड़कर प्रसिद्ध दो हंसों की शोभा देखते ही बनती थी। सोने की तरह चमकती उनकी चोंच, सोने की तरह ही नजर आते उनके पैर और बादलों से भी ज्यादा सफेद उनके पंख हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे।


       हंसों के पहुंचने की खबर राजा को दी गई। उसने हंसों को पकड़ने की युक्ति सोची और एक रात जब सब सो गए, तो उन हंसों को पकड़ने कि लिए जाल बिछाया गया।


       अगले दिन जब हंसों का राजा जागा और भ्रमण पर निकला, तो वह जाल में फंस गया। उसने तुरंत ही तेज आवाज में अन्य सभी हंसों को वहां से उड़ने और अपनी जान बचाने का आदेश दिया। 


    अन्य सभी हंस उड़ गए, लेकिन उनका सेनापती सुमुखा अपने स्वामी को फंसा देख कर उसे बचाने के लिए वहीं रुक गया। इस बीच हंस को पकड़ने के लिए सैनिक वहां आ गया। उसने देखा कि हंसों का राजा जाल में फंसा हुआ है और दूसरा राजा को बचाने के लिए वहां खड़ा हुआ है।


       हंस की स्वामी भक्ति देखकर सैनिक बहुत प्रभावित हुआ और उसने हंसों के राजा को छोड़ दिया। हंसों का राजा समझदार होने के साथ-साथ दूरदर्शी भी था। उसने सोचा कि अगर राजा को पता चलेगा कि सैनिक ने उसे छोड़ दिया है, तो राजा इसे जरूर प्राणदंड देगा।


       तब उसने सैनिक से कहा कि आप हमें अपने राजा के पास ले चलें। यह सुनकर सैनिक उन्हें अपने साथ राजदरबार में ले गया। दोनों हंस सैनिक के कंधे पर बैठे थे। हंसों को सैनिक के कंधे पर बैठा देखकर हर कोई सोच में पड़ गया।


       जब राजा ने इस बात का रहस्य पूछा, तो सैनिक ने सारी बात सच-सच बता दी। सैनिक की बात सुनकर राजा के साथ ही सारा दरबार उनके साहस और सेनापती की स्वामी भक्ति पर हैरान रह गया और सभी के मन में उनके लिए प्रेम जाग उठा।


       राजा ने सैनिक को माफ कर दिया और दोनों हंसों को आदर के साथ कुछ और दिन ठहरने का निवेदन किया। हंस ने राजा का निवेदन स्वीकार किया और कुछ दिन वहां रुक कर वापस मानस झील चले गए। 

    Moral Of The Story:

    कहानी से सीख किसी भी परिस्थिति में हमें अपनों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।


    Hindi Moral Story For Class 2 | भूखे कुत्ते

    तीन कुत्ते थे, जो आपस में गहरे मित्र थे। एक दिन, तीनों कुत्ते भूखे थे और उन्हें खाने-पीने को कुछ नहीं मिल रहा था। अचानक उन्हें पानी की धारा में नीचे एक हड्डी पड़ी दिखी। उन्होंने वह हड्डी उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन उस तक नहीं पहुंच पाए।


       तीनों ने निश्चय किया कि अगर सारा पानी पी लिया जाए तो उन्हें हड्डी मिल जाएगी। तीनों ने पानी पीना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में उनके पेट भर गए और फूलने लगे। वे तब भी नहीं रुके और लगातार पानी पीते गए। उनके पेट और अधिक फूलते गए और फट गए।


       उनके पेटों से सारा पानी भी बाहर निकल पड़ा। तीनो कुत्ते उसी पानी की धारा में नीचे मरे पड़े थे। अगर तुम मूर्खतापूर्ण तरीकों से किसी असंभव कार्य करने की कोशिश करोगे तो तुम्हें हानि होना निश्चित है।

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        Hindi Moral Story For Class 2 में जितने सरे स्टोरी हमने यह पर लिखा है इसको पढ़कर अगर आपकी अच्छा लगा तो जरूर कॉमेंट कर देना। दोस्तों कोई भी नैतिक कहानिया हमें अच्छा लगता हैं। इसी लिए यह सरे 10 Moral Story In Hindi For Class 2 को दोस्तों के साथ शेयर कीजिये।