40+ True Motivational Stories in Hindi असली प्रेरणा देने वाला कहानी हिंदी में

     Hi, here i wrote total 40+ True Motivational Stories in Hindi in this article. now days many people want to read Hindi moral story and also Motivational story. If you are also want to read like this moral story then enjoy with until this Article. hey also you can get here many types of Hindi story with moral for your Kids, student etc.


    अगर आपकी हिंदी भाषा में असली नैतिक कहानियां और प्रेरणा मुल्क कहानियां चाहिए तो यह पर मैंने सबसे अच्छा बेस्ट बल्ला ट्रू मोटिवेशनल स्टोरीज इन हिंदी लिखी है यहां पर जितने सारे स्टोरीज है हिंदी में वह सारे आपके लिए है जो आप को प्रेरणा देने वाला है इसलिए सब स्टोरी यानी काहिनी पढ़िए और जरूर आपकी फ्रेंड के साथ शेयर कीजिए तो चलिए शुरू करते हैं...

    True Motivational Stories in Hindi सोच - समझ कर बोले

    एक व्यक्ति ने एक पादरी के सामने अपने पड़ोसी की खूब निंदा कि. बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह पुनः पादरी के पास पहुंचा और उस गलती के लिए क्षमा याचना करने लगा. पादरी ने उससे कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोबीच बिखेर दे. उस व्यक्ति ने पादरी कि बात सुनकर ऐसा ही किया और फिर पादरी के पास पहुँच गया.

    उस व्यक्ति की बात सुनकर पादरी ने उससे कहा कि जाओ और उन सभी पंखो को फिर से थैले में भरकर वापस ले आओ. वह व्यक्ति थोड़ा हिचका पर पादरी का आदेश मानते हुए उसने ऐसा करने की कोशिश की. काफी प्रयत्न करने के बाद भी वह सभी पंखो जमा नहीं कर सका. जब आधा भरा थैला लेकर वह पादरी के सामने पहुंचा तो पादरी ने उससे कहा की यही बात हमारे जीवन में भी लागू होती है.

    True Motivational Stories in Hindi
    True Motivational Stories in Hindi

    जिस तरह तुम पंख वापस नहीं ला सकते, उसी तरह तुम्हारे कटु वचन को भी वापस नहीं किया जा सकता. उस व्यक्ति का जो नुकसान हुआ है, अब उसकी भरपाई संभव नहीं है. आलोचना का मतलब नकारात्मक बातें करना और शिकायत करना ही नहीं होता बल्कि आलोचना सकारात्मक भी हो सकती है. आपकी कोशिश यह होनी चहिये की आपकी आलोचना से, आपके द्वारा सुझाये विचारो से उसकी सहायता हो जाएँ.

    Moral:- दोस्तों कई बार देखा गया है कि माँ – बाप के द्वारा बच्चो से की गई बातचीत का ढंग उनके भविष्य कि रूपरेखा भी तय कर देता है. इसलिए घर से लेकर बाहर दोस्तों के साथ कुछ भी कहने में सावधानी बरतें. इसलिए अगर आप समझ कर बोलेंगे तो हमेशा फायदे में रहेंगे.


    True Motivational Stories in Hindi ऋषि और एक चूहा

    एक वन में एक ऋषि रहते थे. उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था. यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था. जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता. यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था. लेकिन कुत्ते – बिल्ली और चील – कौवे आदि से वह सदा डरा – डरा और सहमा हुआ सा रहता.

    एक बार ऋषि के मन में उस चूहे के प्रति बहुत दया आ गयी. वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा – सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए. ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके. ऋषि बहुत बड़ी दैवीय शक्ति के स्वामी थे. उन्होंने अपनी शक्ति के बल पर उस चूहे को शेर बना दिया और सोचने लगे की अब यह चूहा किसी भी जानवर से न डरेगा और निर्भय होकर पूरे जंगल में घूम सकेगा.

    30 True Motivational Stories in Hindi
    Moral Story In Hindi

    लेकिन चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई. वह सारे वन में बेधड़क घूमता. उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे. उसकी जय – जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है. वास्तव में शेर नहीं है.

    अतः ऋषि उससे चूहा समझकर ही व्यवहार करते. यह बात चूहे को पसंद नहीं आई की कोई भी उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे. वह सोचने लगा की ऐसे में तो दूसरे जानवरों पर भी बुरा असर पड़ेगा. लोग उसका जितना मान करते है, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे.

    अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को ही मार डालूं. फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी. यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा. ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये. उनको शेर पर बड़ा क्रोध आ गया.

    अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए  ऋषि ने अपनी दैवीय शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया.

    Moral:- दोस्तों! हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए. हमें उन लोगो को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है. इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए. चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता. बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है.


    True Motivational Stories in Hindi गलती को स्वीकार करो


    महात्मा गाँधी और खान अब्दुल गफ्फार खान एक ही जेल में कैद थे. यद्यपि देशी-विदेशी जेलर गाँधी जी का बहुत सम्मान करते थे, किन्तु गाँधी जी भी जेल के नियमो और अनुशासन का सख्ती से पालन करते थे. जेलर के आने पर गाँधी जी उनके सम्मान में उठकर खड़े हो जाते थे.

    खान अब्दुल गफ्फार खान, जिन्हें सीमान्त गाँधी कहा जाता था, को गाँधी जी का यह तौर-तरीका नापसंद था. उनका कहना था की जो सरकार इस देश पर गलत ढंग से हुकूमत कर रही है, हम भला उसे और उसके संस्थाओ को मान्यता क्यों दे.

    True Motivational Stories in Hindi गलती को स्वीकार करो
    Moral Story In Hindi

    गाँधी जी का कहना था की हम जहाँ भी हो हमें वहां के अनुशासन का पालन करना चाहिए. एक दिन सीमान्त गाँधी ने महात्मा गाँधी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा की ‘आप जेलर’ का सम्मान इसलिए करते है क्योंकि वह आपको नियम से अधिक सुविधाएँ देता है. उदाहरण के लिए हम लोगो को तो हिन्दी या अंग्रेजी का अख़बार मिलता है, लेकिन आपको गुजराती पत्र-पत्रिकाएँ भी मिलती है. आप इसलिए जेलर के अहसानमंद हो गये है. दुसरे दिन से गाँधी जी ने केवल एक ही अख़बार लिया और शेष साहित्य लेने से इंकार कर दिया.

    एक महीना बीत गया. गाँधी जी जेलर के प्रति वही सम्मान प्रदर्शित करते रहे जो वे पहले किया करते थे. यह तौर-तरीका भला सीमांत गाँधी की नजर से कैसे चूक सकता था. उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, वे गाँधी जी के पास जाकर माफ़ी मांगने लगे. गाँधी जी ने हंसकर उन्हें गले लगा लिया. दुसरे दिन से सीमांत गाँधी के तेवर भी बदल गये और वे भी जेलर के आगमन पर उसके सम्मान में उठकर खड़े होने लगे.

    Story:- दोस्तों यह कहानी हमें यह बताती है कि व्यक्ति को अपनी गलती स्वीकार करने में कभी भी नहीं हिचकिचाना चाहिए और हर किसी का सम्मान करना चाहिए. हमें महात्मा गाँधी जी के जीवन से यह जरुर सीख लेनी चाहिए की हमें हर व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए भले वह इंसान हमारा सम्बन्धी हो या नहीं.

    More Hindi Story :

    True Motivational Stories in Hindi आलस्य का त्याग करे


    एक बड़े शहर में एक घर में तीन भाई रहते थे. यूँ तो तीनो साथ रहते थे, लेकिन तीनो को एक – दूसरे के सुख-दुःख से कोई लेना-देना नहीं था. तीनो अपनी ही दुनिया में खोये रहते थे, उन्हें किसी और की परवाह नहीं थी. अचानक एक दिन आधी रात को छोटे भाई का बच्चा जग गया और जोर-जोर से रोने लगा. उसने सिर में बहुत तेज दर्द होने की शिकायत की.

    रात काफी हो जाने के कारण दवा की सारी दुकाने बंद हो चुकी थी. घर में भी कोई दवा नहीं थी. उस बच्चे के माता-पिता दोनों ने अपने तरीके से उसे खूब बहलाने और चुप कराने का प्रयास किया पर उनका यह सारा प्रयास बेकार गया. वह अभी भी रोने में लगा था. सभी भाई बच्चे की आवाज सुनकर उठ गये लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया.

    True Motivational Stories in Hindi आलस्य का त्याग करे
    Moral Story In Hindi

    तीनो भाइयो के घर के सामने एक झोपड़ी थी. उसमे एक अधेड़ उम्र की महिला थकी – मंदी सो रही थी. अचानक उसे बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी. परन्तु उसे भी आँखे खोलनी की इच्छा नहीं हो रही थी, लेकिन उसने सोचा अगर बच्चे को दर्द से राहत मिल जाती है तो सभी लोग चैन से सो सकेंगे. उसने तुरंत आलस्य त्याग कर बच्चे की माँ को आवाज लगाई – ठण्ड लगने के कारण बच्चा रो रहा है. यह ले जाओ काढ़ा. इसे पीते ही उसे सिर दर्द से आराम मिल जायेगा.

    बुढ़िया की आवाज सुनकर बच्चे की माँ उस बुढ़िया के पास गई और झिझकते हुए वहां से काढ़ा ले गई और अपने बच्चे को पिला दिया. काढ़ा पीने के कुछ ही पलों बाद बच्चे को दर्द से राहत मिल गई और बच्चे के साथ – साथ सभी लोग चैन से सो गये.

    Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि आलस्य त्यागकर ही किसी दूसरे की मदद की जा सकती है. यह ज़िन्दगी बहुत छोटी है हमें इसे आलस्य में नहीं गुजारना चाहिए बल्कि इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए साथ ही हमें परोपकार के गुण को भूलना नहीं चाहिए जब कभी भी परोपकार करने का मौका मिले तो हमें खुद से जो भी सहायता हो सके वह करनी चाहिए.


    True Motivational Stories in Hindi ख़ुशी का राज


    एक शहर में विजय नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था. उस व्यक्ति के पास बहुत अधिक धन था. एक दिन उसने अपनी पत्नी अंजू को करोडो रूपये का एक नेकलेस गिफ्ट किया जिस कारण उसकी पत्नी अंजू को उस नेकलेस से काफी लगाव था.

    एक बार वे दोनों एक धर्मयात्रा पर निकले. धर्मयात्रा में चलते – चलते वे एक धर्मस्थल में पहुंचे जहाँ अचानक एक नटखट बन्दर अंजू के नेकलेस को झपटकर ले गया और उस बन्दर ने उसे एक ऊँचे पेड़ की टहनी में टांग दिया.

    अंजू ने उस नेकलेस को निकालने की कोशिश की पर वह नाकाम हुई और उसे देखकर वहां और लोग भी उस नेकलेस को निकालने में जुट गये. लेकिन वे लोग भी उस नेकलेस को निकालने में असमर्थ रहे.

    True Motivational Stories in Hindi ख़ुशी का राज
    Moral Story In Hindi

    अचानक लोगो को लगा की बन्दर ने उस नेकलेस को नीचे बहते गंदे नाले में गिरा दिया. कुछ लोगो ने उस नेकलेस को निकालने के लिए नाले में छलांग लगा दी. तभी उधर से गुजर रहे एक गुरूजी को यह सब देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ.

    उन्होंने गौर से देखा तो पाया की जिस नेकलेस को पाने के लिए लोग नाले में कूदे है, वह नेकलेस तो अभी भी पेड़ में लटक रहा है.

    उन्होंने उन लोगो से कहा की आप जिस चीज को एक नाले में पाने की कोशिश कर रहे हो, वह तो सिर्फ उसकी परछाई है. असली चीज तो अभी भी पेड़ से लटक रही है. यह सब देखकर वे लोग हताश हो गये.

    शिक्षा/Moral:- इस कहानी की शिक्षा यह है कि हम बाहर की चीजो में खुशियाँ ढूंढते रहते है और उन चीजो से खुद को खुश रखना चाहते है किन्तु इन बाहरी चीजो से हमें क्षणिक भर ख़ुशी तो मिल सकती है लेकिन असली ख़ुशी हमें तब ही मिलती है जब हमारा अंतरमन खुश हो. इसलिए खुशियाँ पाने के लिए बाहरी चीजो के बजाय खुद के अन्दर झांककर देखे.


    True Motivational Stories in Hindi काले कौवे की दुःखी कहानी


    एक जंगल में एक कौवा रहता था और वह अपनी जिंदगी से बहुत दुखी था.वह जब भी जंगल में घूमता तो दुसरे पक्षियों को भी देखता था और उन्हें देखकर उसे लगता की उसका रंग बहुत काला है और यही उसके दुःख का असली कारण था. अब रोज का यही सिलसिला था तो वह कौवा उदास रहने लग गया था।

    एक दिन जब वह जंगल में उड़ रहा था तो उसने एक तालाब में बतख को तैरते देखा तो वह एक पेड़ में बैठ गया और सोचने लगा की यह बतख कितना सफ़ेद है.काश मेरा भी रंग सफ़ेद होता. फिर कुछ देर बाद वह कौवा बतख के पास गया|

    बतख के पास जाते ही कौवा उससे बोला- तुम बहुत खुशकिस्मत हो जो तुम्हारा रंग सफ़ेद है. बतख ने कौवे की बात सुनी|

    बतख ने कौवे से बोला- हाँ मैं सफ़ेद तो हूँ लेकिन जब मैं हरे रंग के तोते को देखता हूँ तो मुझे अपने इस सफ़ेद रंग से गुस्सा आता है।

    True Motivational Stories in Hindi काले कौवे की दुःखी कहानी
    Moral Story In Hindi

    बतख की बात सुनकर वह कौवा वहा से चला गया और कुछ समय बाद वह तोते के पास पहुंचा.

    कौवा तोते से बोला- तुम्हारा रंग तो बहुत सुन्दर है तुमको यह देखकर बहुत अच्छा लगता होगा।

    कौवे की बात सुनकर तोता बोला- हाँ,मुझे लगता तो अच्छा है की मैं इतना सुंदर हूँ लेकिन मैं सिर्फ हरा हूँ और जब कभी भी मैं मोर को देख लेता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है क्योंकि मोर बहुत खुबसूरत है और उसके पास बहुत सारे रंग है.

    कौवे को लगा यह बात भी सही है क्यों न अब मोर के पास ही चला जाय.

    वह कौवा जंगल में मोर को ढूढने लगा किन्तु उसे मोर नहीं मिला फिर वह कुछ दिन बाद एक चिड़ियाघर में जा पहुंचा.

    जहा उसे मोर दिख गया लेकिन मोर को देखने के लिए बहुत सारे लोगो की भीड़ जमा हुई थी तो कौवा उन लोगो के जाने का इन्तेजार करने लगा. जब वे सब लोग चले गये तो...

    कौवा मोर के पास पहुंचा और मोर से बोला- वाह मोर,तुम तो सच में बहुत खुबसूरत हो तभी सब तुम्हारी इतनी तारीफ करते है. तुमको तो खुद पर बहुत गर्व महसूस होता होगा.

    कौवे की बात सुनकर मोर बड़े दुःख के साथ बोला- तुम्हारी बात बिल्कुल ठीक है पर मेरे अलावा इस दुनिया में कोई और दूसरा खुबसूरत पक्षी नहीं है इसलिए मैं यहाँ चिड़ियाघर में कैद हूँ।

    यहाँ पर सब मेरी रखवाली करते है जिस कारण में कही भी नहीं जा सकता और अपने मन के मुताबिक कुछ भी नहीं कर सकता है.

    मैं भी काश तुम्हारी तरह कौवा होता तो मुझे भी कोई कैद करके नहीं रखता और मैं भी हमेशा तुम्हारी तरह खुले आसमान में जहा चाहो वहा घूमता रहता पर एक मोर के लिए यह सब मुमकिन नहीं.

    कौवे ने मोर की सारी बातें सुनी और फिर वहा से चले गया और सारी बात समझ गया. उसे इस बात का अहसास हो गया था कि सिर्फ वो ही नहीं बल्कि हर कोई उसकी तरह दुखी और परेशान है।

    Moral- कोई आदमी कितना सुखी है वह सिर्फ वो ही आदमी जानता है क्योंकि हर किसी के अपने जीवन में कई परेशानीयाँ होती है अपने दुःख होते है। इसलिए हमें दुसरे के सुख से जलन न करते हुए उससे सीखना चाहिए तथा खुद में जो अच्छी चीजे है उनको देखना चाहिए न की कमजोरी को. अगर कोई कमजोरी होती भी है तो उसे दूर करना चाहिये.


    True Motivational Stories in Hindi चूहा और भगवान


    एक बार की बात है.एक चूहा था.एक दिन उसने सोचा की चूहा होना बहुत गलत बात है,क्योंकि हमेशा बिल्लियों से खतरा रहता है और बोलने लगा की काश मैं बिल्ली होता. यह सुनकर भगवान को चूहे पर दया आ गयी और भगवान ने उसे बिल्ली बना दिया. बिल्ली बनने के बाद उसे कुत्तो से डर लगने लगा.

    चूहा फिर सोचने लगा- काश मैं कुत्ता होता तो मैं कही भी निर्भीक होकर घूम सकता. भगवान ने उसे कुत्ता बना दिया. कुत्ता बनने के बाद वह दूर-दूर तक खूब घूमा.

    एक दिन वह कुत्ता जंगल में चला गया, तो शेर उसके पीछे पड़ गया. वह किसी तरह अपनी जान-बचाकर वहा से निकला और.....

    तब वह कुत्ता फिर बोला- काश मैं शेर होता तो मैं बिना किसी डर के जंगल में घूमता रहता.

    True Motivational Stories in Hindi चूहा और भगवान
    Moral Story In Hindi

    भगवान ने उसकी कही हुई बात सुनी- उसे शेर भी बना दिया. वह अब जंगल में जाकर रहने लगा. वह पूरा जंगल घूमता रहता और वह बहुत ही खुश था, जब वह यह देखता की जंगल के सारे जानवर उससे डरते है.

    एक दिन उस जंगल में एक शिकारी आ गया. वह शिकारी उस शेर को मारने के लिए तीर चलाने लगा. उसे उन तीरों से बचने के लिए गुफा की ओर भागना पड़ा और वहा छुपना पड़ा.

    फिर उस शेर ने सोचा- यह भी कोई जिंदगी हुई. काश में मनुष्य होता.

    इस बार भगवान को उस पर दया नहीं आई और उन्होंने उसे फिर से चूहा बना दिया और

    भगवान उस चूहे से बोले- मैं तुम्हे कुछ भी बना दूँ ,पर तुम रहोगे तो चूहे ही.

    Moral:- दोस्तों, यह कहानी हमें सीख देती है कि जो व्यक्ति अपनी परिस्थितियो से घबरा कर पलायन करता है, उसे चाहे कितनी भी सुख-सुविधाएँ दे दी जाय पर वह हमेशा असंतुष्ट ही रहेगा.

    हमें कभी भी अपनी परिस्थितियो से घबरा कर पलायन नहीं करना चाहिए. चाहे दुःख कितना ही बड़ा हो या आपके हालात उस समय आपके पक्ष में न हो. आपको घबराना नहीं चाहिए और उन परिस्थितियो में खुद को मजबूत बना कर उनका सामना करना चाहिए.


    True Motivational Stories in Hindi मुश्किलों से सीखें


    एक व्यक्ति अपने गधा को लेकर शहर से लौट रहा था। गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण सीधे एक गहरे गढ़े में गिर गया।

    उसे निकलने के लिए उस व्यक्ति ने पूरा कोशिश किया परन्तु वह उस गधे को निकाल नहीं पाया ।

    जब उस व्यक्ति को लगा की उसके गधे को उस गढ़े से निकालना अब असंभव हैं तो उसने उसे जिन्दा ही मिटटी से ढक देने का सोचा और वह ऊपर से मिटटी डालने लगा।

    True Motivational Stories in Hindi मुश्किलों से सीखें
    Moral Story In Hindi

    बहुत देर तक मिटटी डालने के बाद वह इंसान पास ही अपने घर चले गया ।

    पर ढेर सारी मिटटी डालने के कारण वह गधा अपने ऊपर गिरे हुए मिटटी की मदद से धीरे-धीरे उस पर अपना पैर रख-रख कर उस गढ़े के ऊपर जिन्दा चढ़ आया।

    अगले दिन जब वह व्यक्ति सुबह उठा तो उसने देखा उसका गधा उसके घर के बहार ही खड़ा था । यह करिश्मा देखकर वह व्यक्ति स्तम्भ रहे गया।

    Moral:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी हार नहीं मानना चाहिए और बार-बार कोशिश करते रहना चाहिए।

    More Hindi Story :

    True Motivational Stories in Hindi आइसक्रीम की एक डिश


    एक बार एक छोटा सा लड़का एक होटल में गया| कुछ ही देर में वहां वेटर आया और पुछा आपको क्या चाहिए सर ? छोटे बच्चे ने उल्टा पुछा!

    वैनिला आइसक्रीम कितने रूपए का है? उस वेटर वाले ने जवाब दिया 50 रुपये का।

    यह सुन कर उस छोटे लड़के ने अपने जेब में हाँथ डाल कर कुछ निकला और हिसाब किया।

    उसने दुबारा पुछा कि संतरा फ्लेवर आइसक्रीम कितने का है। वेटर ने दुबारा जवाब दिया और कहा 35 रुपये का सर।

    True Motivational Stories in Hindi आइसक्रीम की एक डिश
    Hindi Moral Story

    यह सुने के बाद उस लड़के ने कहा! मेरे लिए एक संतरा फ्लेवर आइसक्रीम ले आईये।

    कुछ ही देर में वेटर आइसक्रीम की प्लेट और साथ में बिल लेकर आया और उस बच्चे के टेबल पर रखकर चले गया। उस लड़के ने उस आइसक्रीम को खाने के बाद पैसे दिए और वह चले गया ।

    जब वह वेटर वापस आया तो वह दंग रहे गया यह देखकर कि उस लड़के नें खाए हुए आइसक्रीम प्लेट के बगल में उसके लिए 15 रुपय का टिप छोड़ गया था।

    शिक्षा :- उस लड़के के पास 50 रुपये होने पर भी उसने उस वेटर के टिप के बारे में पहले सोचा न की अपने आइसक्रीम के बारे में। उसी प्रकार हमें अपने फायदे के बारे में सोचने से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।


     True Motivational Stories in Hindi आइसक्रीम की एक डिश


    एक बार एक छोटा सा लड़का एक होटल में गया| कुछ ही देर में वहां वेटर आया और पुछा आपको क्या चाहिए सर ? छोटे बच्चे ने उल्टा पुछा!

    वैनिला आइसक्रीम कितने रूपए का है? उस वेटर वाले ने जवाब दिया 50 रुपये का।

    यह सुन कर उस छोटे लड़के ने अपने जेब में हाँथ डाल कर कुछ निकला और हिसाब किया।

    True Motivational Stories in Hindi आइसक्रीम की एक डिश
    True Motivational Stories in Hindi

    उसने दुबारा पुछा कि संतरा फ्लेवर आइसक्रीम कितने का है। वेटर ने दुबारा जवाब दिया और कहा 35 रुपये का सर।

    यह सुने के बाद उस लड़के ने कहा! मेरे लिए एक संतरा फ्लेवर आइसक्रीम ले आईये।

    कुछ ही देर में वेटर आइसक्रीम की प्लेट और साथ में बिल लेकर आया और उस बच्चे के टेबल पर रखकर चले गया। उस लड़के ने उस आइसक्रीम को खाने के बाद पैसे दिए और वह चले गया ।

    जब वह वेटर वापस आया तो वह दंग रहे गया यह देखकर कि उस लड़के नें खाए हुए आइसक्रीम प्लेट के बगल में उसके लिए 15 रुपय का टिप छोड़ गया था।

    Moral:- उस लड़के के पास 50 रुपये होने पर भी उसने उस वेटर के टिप के बारे में पहले सोचा न की अपने आइसक्रीम के बारे में। उसी प्रकार हमें अपने फायदे के बारे में सोचने से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।


    True Motivational Stories in Hindi किसान और उसके चार बेटे


    एक बार एक गरीब किसान था। उसके चार बेटे थे, लेकिन चारों निकम्मे और कामचोर थे। किसान उनकी इस आदत से बहुत चिंतित रहता था।

    किसान के पास बस एक बंजर जमीन का टुकड़ा था। बड़ी मशक्कत से वो दूसरे किसानो के खेत में मेहनत करके रोजी का इंतजाम करता था।

    एक बार किसान बहुत बीमार हो गया उसने मरने से पहले अपने बेटों से कहा कि मैंने अपनी जमीन में कुछ सोने की अशर्फियाँ गाड़ रखी हैं, मेरे मरने के बाद तुम उसे निकाल कर आपस में बाँट लेना।

    पिता के मरने के बाद गड़ा धन निकालने के लिए चारों भाईयो ने बंजर जमीन को खोदना शुरू कर दिया। काफी खोदने के बाद भी जब कुछ ना निकला तो चारों पिता को कोसते घर की ओर बढ़ने लगे।

    True Motivational Stories in Hindi
    True Motivational Stories in Hindi

    गाँव का मुखिया यह सब देख रहा था। चारों को वापिस जाता देख,

    मुखिया ने कहा- जब खोद ही दिया है तो बीज भी डाल दो, तुम्हारी इतनी मेहनत का कुछ तो परिणाम मिले! उन चारों ने बेमन से खोदी हुई जमीन में गेहूँ के बीज डाल दिये।

    कुछ ही दिनों में वहां गेहूँ की फसल लह लहाने लगी। फसल को बेचकर चारों को अच्छा खासा धन प्राप्त हो गया। फसल से धन पाकर चारों के चेहरे खिल उठे।

    भाईयों को खुश देखकर मुखिया उनके पास आया और बोला- “बेटा तुम चारों ने कठिन परिश्रम किया, और उसी का परिणाम है कि आज इस बंजर जमीन को तुम चारों ने उपजाऊ बना दिया।

    मुखिया ने फिर कहा- तुम्हारे पिताजी तुम चारों को यही बात समझाना चाहते थे कि मेहनत करने से कठिन से कठिन कार्य में सफलता हासिल की जा सकती है।

    इसीलिए उन्होने जमीन में धन गड़ा होने की बात तुम लोगों से कही। वास्तव में असली धन यह तुम्हारा परिश्रम है जिससे तुम जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हो”।

    Moral:- इस शिक्षाप्रद कहानी से यही पता चलता है कि सफलता पाने का एकमात्र मार्ग है मेहनत । हो सकता है कि तुम पहले प्रयास में कामयाब ना भी हो लेकिन कभी प्रयास करना कभी मत छोड़े. कुछ लोगों को थोड़े प्रयास से सफलता मिल जातो है और कुछ ;लोगों को थोड़ी ज्यादा मेहनत करने से लेकिन अगर प्रयास पूरे दिल से किया जाए तो देर सबेर सफलता मिलता तो निश्चित है|


    किसान और दो घडे True Motivational Stories in Hindi


    एक गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज सुबह-सुबह उठकर दूर झरनें से साफ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाया करता था। जिन्हें वह एक डण्डे में बाँधकर अपने कन्धे पर दोनों तरफ लटका कर लाया करता था।

    उनमें से एक घड़ा कहीं से थोड़ा-सा फूटा था और दूसरा एकदम सही। इसी वजह से रोज़ घर पहुँचते-पहुँचते किसान के पास डेढ़ घड़ा ही पानी बच पाता था। ऐसा होना नई बात नहीं थी इसको दो साल बीत चुके थे। सही घड़े को इस बात का बहुत घमण्ड था, उसे लगता था कि वह पूरा का पूरा पानी घर पहुँचता है और उसके अन्दर कोई भी कमी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ फूटा हुआ घड़ा इस बात से बहुत शर्मिंदा रहता था कि वह आधा पानी ही घर पहुँचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है।


    एक दिन की बात है वह बहुत दुःखी और उदास था जब परेशानी हद से बढ़ गई तो उसने फैसला किया कि वह किसान से माफी माँगेगा। किसान से बोला “मैं बहुत शर्मिंदा हूँ, मैं आपसे माफी माँगना चाहता हूँ” तो किसान ने पूछा “भाई तुम किस बात से शर्मिंदा हो” छोटे घड़े ने दुःखी होते हुए कहा “शायद आप नहीं जानते हैं, मैं एक जगह से फुटा हुआ हूँ।

    पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी पहुँचाना चाहिए था मैं सिर्फ उसका आधा ही पहुँचा पाया हूँ। मेरे अन्दर यह बहुत बड़ी कमी है। इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही हैं। किसान को घड़े की बात सुनकर बहुत दुख हुआ और बोला इतना परेशान होना भी ठीक नहीं है।

    चलो तुम्हारी उदासी दूर करते हैं, एक काम करना कल जब तुम रास्ते से लौटो तो अपने टपकते पानी पर दुख करने के बजाय उस रास्ते में खिले हुए फूलों को देखना कितने खुशबूदार, कितने खूबसूरत, कितने प्यारे और साथ ही पास में छोटे-छोटे पौधे देखना।

    घड़े ने किसान की बातें मनाने का फैसला किया। रास्ते भर सुन्दर फूलों का देखता हुआ आया। ऐसा करने से उसकी उदासी थोड़ा कम हुई, पर घर पहुँचते-पहुँचते उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था। वह फिर से मायूस हो गया और किसान से क्षमा माँगने लगा।

    किसान बोला “शायद तुमने रास्ते पर ध्यान नहीं दिया। रास्ते में जितने भी फूल थे, बस तुम्हारी तरफ ही थे।

    सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं थे। जानते हो ऐसा क्यों, क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था, मैंने उसका लाभ उठाया। मैंने तुम्हारी तरफ वाले रास्ते पर रंग बिरंगे फूलों के बीज बो दिये थे। तुम थोड़ा-थोड़ा करके सींचते रहें और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया।

    आज तुम्हारी ही वजह से मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ,  अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ। तुम ही सोचो अगर तुम जैसे हो ऐसे ना होते तो भला क्या मैं यह सब कुछ कर पाता है।

    Moral:- दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है पर यही वो कमियाँ हैं जो हमें अनोखा बनाती हैं, हमें इंसान बनाती है। उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को जैसा है वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए और जब हम ऐसा करेंगे तो फूटा घड़ा भी अच्छे घड़े से मूल्यवान हो जाएगा।


    True Motivational Stories in Hindi आलसी बेटा व बूढ़ा किसान


    बहुत समय पहले किसी गांव में एक बूढा किसान रहा करता था| जो दिन भर बहुत मेहनत करके अपने खेतों में काम किया करता था फिर भी उसका गुजारा बड़ी मुश्किल से चल पाता था... किसान का एक जवान बेटा भी था जिसका नाम अंकित था|

    किसान चाहता था... कि अंकित भी घर की जिम्मेदारी लें और कुछ काम करें ताकि घर चलाने में कुछ मदद हो सके, लेकिन अंकित अपनी ही धुन में लगा रहता था.. और आलस के मारे कोई भी काम नहीं करना चाहता था.. पिता की मदद करना तो दूर की बात वह दिन भर बिस्तर में पड़ा रहता था.. या फिर अपने पिता के कमाए हुए पैसों को अपने दोस्तों और अय्याशी में उड़ाया करता था ....

    किसान को यह बात बहुत बुरी लगती थी कि अंकित मेहनत से कमाए हुए पैसों का मोल नहीं समझता है.. और फिजूल खर्च करता रहता है किसान ने अंकित को कई बार समझाने की कोशिश भी की थी|

    किसान ने अंकित को कहा-  "बेटा अंकित अब मैं बूढ़ा हो चुका हूं अब यह बूढ़ा शरीर पहले की तरह मेहनत नहीं कर पाता  और तू भी तो अब बच्चा नहीं रहा बेटा तू भी कहीं काम देख ले जिससे घर चल सके कब तक यह फिजूलखर्ची करके बाप के पैसे यूं ही दोस्तों पर उड़ाता रहेगा"|



    अंकित को पिता की यह बात अच्छी नहीं लगी और वह पिता से बोला- " क्या पिताजी जरा से पैसों के लिए आप मुझे खरी-खोटी सुनाते रहते हो इतने पैसे मैं जब चाहे आपको लौटा सकता हूं" |

    अब किसान समझ गया कि अंकित को डांटने या समझाने का कोई फायदा नहीं |

    किसान ने अब एक तरकीब सोची उसने अगली सुबह अंकित को अपने पास बुलाया और कहा अंकित मे खेतों में जा रहा हूं मेरे लौटने तक तूने काम करके कुछ पैसे नहीं कमाए तो इस घर के दरवाजे तेरे लिए बंद हो जाएंगे|

    इतना कहकर किसान खेतों की तरफ चल दिया. किसान के जाते ही अंकित सोचनेेे लग गया कि वह पैसे कहां से लाएगा क्योंकि उसे काम के नाम से ही नफरत थी अब उसने एक आसान रास्ता ढूंढा और किसी तरह अपनी मां को मनवा कर मां से कुछ पैसे ले लिए...

    जब किसान खेतों से काम करके घर लौटा तो अंकित ने वह पैसे किसान को दिखाएं किसान ने बहुत दुनिया देखी  थी. उसेे पता चल गया कि उसने वह पैसे अपनी मां सेे मांगे है उसनेे अंकित से पैसे लिए और उन्हें एक कुएं मैं फेंक दिया अगले दिन किसान ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया.

    और फिर अगले दिन फिर किसान ने अंकित को कहा कि वह शाम तक पैसे कमा कर नहीं लाया तो वह उसे घर से निकाल देगा ऐसा कहकर किसान खेतों में चला गया और फिर अंकित सोचने लगा कि वहां पैसे कहां से लाएगा अबकी बार उसने अपनी बहन से पैसे ले लिए जब उसका पिता घर लौटा.

    उसने अपने पिता को पैसे दिखाएं तो किसान समझ गया कि उसने यहां पैसे अपनी बहन से लिए हैं किसान ने वह पैसे लेकर उन्हें दोबारा कुएं में फेंक दिया और अगले दिन किसान ने अपनी बेटी को अपने एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया.

    और अगले दिन फिर किसान ने अंकित को कहा कि वह मेरे घर लौटने तक कुछ पैसे कमा कर नहीं लाया तो वह उसे घर से निकाल देगा.

    अंकित अपने जानने वालों और दोस्तों से पैसे मांगे तो उन्होंने साफ साफ मना कर दिया अब अंकित के पास कोई चारा नहीं था.

    उसने मन मार कर किसी तरह दिन भर काम किया और पैसे लेकर घर लोटा जहां पहले से ही उसका पिता इंतजार कर रहा था |

    जब अंकित ने उन पैसों को अपने पिता को दिए तो किसान दोबारा उन पैसों को कुएं में डालने के लिए आगे बढ़ा तो....

    यह देखकर अंकित को गुस्सा आ गया और उसने अपने पिता से कहा कि यह पैसे मैने पूरे दिन अपना खून पसीना एक करके इतनी मेहनत मशक्कत करके कमाएें हैं और आप इन्हें कुएं में फेंक कर बर्बाद करना चाहते हो|

    यह सुनकर किसान मुस्कुराते हुए बोला बेटा-  यह दुख मुझे भी होता था जब तुम मेरी मेहनत की कमाई को अपने दोस्तों के साथ अय्याशी कर के पैसों को बर्बाद करता था| आज तूने मेहनत से पैसे कमाए तो तू समझा है कि मेहनत से कमाए हुए पैसों का मोल क्या होता है मैं तुझे बस यही समझाना चाहता था बेटा अब यह बात कभी मत भूलना|

    यह कहकर के किसान ने अपने बेटे को गले लगा लिया अंकित को अपनी गलती समझ आ गई थी और उसने अपने घर का बोझ अपने सर पर ले लिया और फिर किसान को कभी खेतों में जाने का मौका नहीं दिया|


    चतुर किसान True Motivational Stories in Hindi


    एक बार एक किसान एक बकरी, घास का एक गट्ठर और एक शेर को लिए नदी के किनारे खड़ा था।

    उसे नाव से नदी पार करनी थी लेकिन नाव बहुत छोटी थी वह सारे सामान समेत एक बार में पार नहीं कर सकता था।

    किसान ने कुछ तरकीब सोची। वह अगर शेर को पहले ले जाकर नदी पार छोड़ आता है तो इधर बकरी घास खा जाएगी और अगर घास को पहले नदी पार ले जाता है तो शेर बकरी खा जाएगा।


    अंत में उसे एक समाधान सूझ गया। उसने पहले बकरी को साथ में लिया और नाव में बैठकर नदी के पार छोड़ आया।

    इसके बाद दूसरे चक्कर में उसने शेर को नदी पार छोड़ दिया लेकिन लौटते समय बकरी को फिर से साथ ले आया।

    इस बार वह बकरी को इसी तरफ छोड़कर घास के गट्ठर को दूसरी और शेर के पास छोड़ आया।

    इसके बाद वह फिर से नाव लेकर आया और बकरी को भी ले गया।

    इस प्रकार उसने नदी पार कर ली और उसे कोई हानि भी नहीं हुई।


    True Motivational Stories in Hindi भाग्य अपना अपना


    एक किसान था। उसके पास एक बकरा और दो बैल थे। बैलों से वह खेत जोतने का काम लेता। दोनों बैल दिन भर कड़ी मेहनत करके खेतों की जुताई करते थे।

    इसके उल्टे बकरे के लिए कोई काम तो था नहीं। वह दिन भर इधर-उधर घूमकर हरी-हरी घास चरता रहता। खा पीकर वह काफी मोटा तगड़ा हो गया था।

    यह देखकर बैल सोचते कि इस बकरे के मजे हैं। कुछ करता-धरता तो है नहीं और सारा दिन इधर-उधर घूमकर खाता रहता है।


    इधर, बकरा बैलों की हालत देखता तो उसे भी बड़ा दुख होता कि बेचारे सारा दिन हल में जुते रहते हैं और मालिक है कि इनकी ओर पूरी तरह ध्यान नहीं देता। वह बैलों को कुछ सलाह देना चाहता था, जिससे इनका कुछ भला हो।

    एक दिन दोनों बैल खेत जोत रहे थे। बकरा भी वहीं खेतों के पास घास चर रहा था। दोनों बैलों को खेत जोतने में काफी मेहनत करनी पड़ रही थी। वे दोनों हांफ रहे थे।

    यह देखकर बकरा मूर्खतापूर्ण स्वर में बोला- ”भाइयो, तुम दोनों को दिन भर खेतों में कड़ी मेहनत करते देखकर मुझे बहुत दुख होता है। परंतु किया क्या जा सकता है, यह तो भाग्य का खेल है। मुझे देखो, मेरे पास दिन भर चरने के अलावा कोई काम नहीं है।

    दिन भर मैं इधर-उधर मैदानों में चरता रहता हूं। किसान की पत्नी खुद खेतों में जाती है और मेरे लिए हरी पत्तियां और घास लेकर आती है। तुम दोनों तो मुझसे ईर्ष्या करते होगे।“

    दोनों बैल चुपचाप बकरे की बातें सुनते रहे। जब वे शाम को खेतों से काम करके वापस आए तो उन्होंने देखा कि किसान की पत्नी किसी कसाई से धन लेकर उसे वह बकरा बेच रही थी।

    दोनों बैलों- की आंखों में आंसू भर आए। बेचारे कर भी क्या सकते थे।

    उनमें से एक धीमे स्वर में बोला- ‘आह! तुम्हारे भाग्य में यही लिखा था।’

    Moral:- जिसके भाग्य में जैसा लिखा होता है, वैसा ही होता है।


    True Motivational Stories in Hindi खेत की खुदाई


    एक गाँव में एक बूढ़ा आदमी अपने बेटे के साथ रहता था. एक दिन पुलिस उसके घर आई और उसके बेटे पर हथियार चुराने का आरोप लगाकर पकड़ कर ले गई. उसे जेल में बंद कर दिया गया.

    बूढ़ा आदमी हर साल अपने खेत में आलू उगाया करता था. आलू की अच्छी पैदावार उसे अच्छी आमदनी दिला जाती थी और साल भर का उसका खर्चा निकल जाता था.

    उस साल भी आलू लगाने का समय आया. लेकिन खेत की खुदाई का काम बूढ़े के अकेले के बस का नहीं था. वह अपने बेटे को याद करने लगा, जो अभी भी जेल में था. बूढ़ा बहुत कोशिशों के बाद भी उसे छुड़ा नहीं पाया था.

    एक दिन उसने अपने बेटे को पत्र लिखा-

    बेटा,

    मैं बहुत दु;खी हूँ कि इस साल मैं खेत में आलू नहीं लगा पाऊँगा. मैं अकेला खेत की खुदाई करने में सक्षम नहीं हूँ. काश, तुम यहाँ पर मेरे साथ होते. मैं जानता हूँ कि तुम पूरा खेत खोद देते और मेरी सारी परेशानी खत्म हो जाती.

    तुम्हारा पिता

    कुछ दिनों के बाद बूढ़े आदमी को एक टेलीग्राम मिला, जो उसके बेटे ने भेजा था.

    उस पत्र में लिखा था कि-

    पिताजी! खेत की खुदाई मत करना. मैंने सारे हथियार वहाँ छुपाकर रखे है.

    अगले ही दिन पुलिस की एक टुकड़ी बूढ़े के घर आ गई और हथियार की तलाश में पूरा खेत खोद डाला. लेकिन उन्हें कोई हथियार न मिल सका.



    बूढ़े आदमी को कुछ समझ नहीं आया कि हुआ क्या?

    उसने पुलिस के घर आने की घटना का वर्णन करते हुए फिर से....

    अपने बेटे को बूढ़े आदमी ने एक और पत्र लिखा-

    कुछ दिनों बाद बेटे का उत्तर आया- पिताजी, अब आप आलू लगा सकते हैं क्योंकि मेरे इस बहाने से खेत की खुदाई तो हो चुकी है. (बहाने ऐसे हो जिसमे किसी की मदद हो रही हो ना की नुकसान)

    Moral:- यदि आपने किसी कार्य को करने का दृढ़ निश्चय कर लिया है, तो कोई न कोई मार्ग अवश्य निकल आयेगा.


    राजा के सौ चेहरे True Motivational Stories in Hindi


    एक राजा, चला था लेने जायजा। अपनी प्रजा के बारे में हमेशा वह सोचता था, उन्हें कोई दुख न हो यह देखता था। रास्ते में वह मिला एक किसान से, जो चल रहा था धीरे-धीरे मारे थकान के। 

    राजा ने उससे पूछा- 'तुम कितना कमाते हो, रोज कितना बचा पाते हो?'

    किसान ने दिया उत्तर- 'हुजूर रोज चार आने भर!'

    'इन सिक्कों में चल जाता है खर्च?' राजा हैरान थे इतनी कम कमाई पर।

    'एक मेरे लिए, एक आभार के लिए, एक मैं लौटाता हूं और एक उधार पर लगाता हूं।'

    राजा चकराया-  पूरी बात ठीक तरह समझाने को सुझाया।

    'एक भाग मैं अपने ऊपर लगाता हूं, एक भाग आभार के लिए यानी पत्नी को देता हूं यानी घर का सारा काम उसी के दम पर ही तो चलता है। एक मैं लौटाता हूं, इसका मतलब अपने बुजुर्ग माता-पिता के पैरों में चढ़ाता हूं जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया, रोजी-रोटी कमाना सिखाया। एक उधार पर लगाता हूं यानी अपने बच्चों पर खर्च कर डालता हूं, जिनमें मुझे मेरा भविष्य नजर आता है।'

    'तुमने कितनी अच्छी पहेली बुझाई, मान गए भाई! पर इस उत्तर को रखना राज, जब तक कि मेरा चेहरा देख न लो सौ बार!'

    किसान बोला- 'हां, मैं बिल्कुल इसे राज रखूंगा, आपका कहा करूंगा।'

    उसी दिन शाम को राजा ने पहेली दरबारियों के सामने रखी, सुनकर उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हुई। राजा ने कहा यह एक किसान का जवाब है, तुम तो दरबारी हो तुम सबकी तो बुद्धि नायाब है। कोई जवाब नहीं दे सका,

    पर एक दरबारी ने हिम्मत जुटाकर कहा- 'महाराज अगर मुझे समय मिले 24 घंटे का, तो मैं जवाब ढूंढकर ला दूंगा आपकी पहेली का।'

    दरबारी किसान को ढूंढ़ने निकल पड़ा, आखिर किसान उसे मिल ही गया खेत में खड़ा। पहले तो किसान ने किया इंकार, फिर मान गया देखकर थैली भर सिक्कों की चमकार। दरबारी लौट आया और दे दिया राजा को सही जवाब, राजा समझ गए कि तोड़ा है किसान ने उसका विश्वास।

    राजा ने किसान को बुलवाया- और किसान से भरोसा तोड़ने का कारण उगलवाया।

    राजा ने कहा- 'याद करो मैंने क्या कहा था? मेरा चेहरा सौ बार देखे बिना नहीं देना जवाब, क्या तुम भूल गए जनाब?'

    किसान बोला- 'नहीं-नहीं महाराज मैंने अपना वादा पूरी तरह से निभाया है, सौ सिक्कों पर आपका अंकित चेहरा देखकर ही जवाब बताया है।'

    राजा को उसकी बात एक बार फिर से भाई, थैली भर मुहरें किसान ने फिर से पाई।


    True Motivational Stories in Hindi परमात्मा और किसान


    एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जा रही थी|

    एक  दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा- देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है, एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो, फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!

    किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी तब पानी! तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी हो गई और किसान की ख़ुशी भी क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी!  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे|

    फ़सल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा, एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी, 

    बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा- प्रभु ये क्या हुआ?

    तब परमात्मा बोले-

    ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया. ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया, उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया|

    इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है|

    सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने, गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है और उसे अनमोल बनाती है!

    उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता! ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे शक्त और प्रखर बनाती हैं|

    अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे. अगर जिंदगी में प्रखर बनना है ,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा!


    True Motivational Stories in Hindi मोतियों के खेत


    एक दिन बादशाह अकबर की रानी समय बिताने के लिए अपने कक्ष में चहलकदमी कर रही थीं। अचानक उनका हाथ एक फूलदान में लगा और वह गिरकर टूट गया। “ओह, यह तो बादशाह का प्रिय फूलदान था।

    मैं उन्हें यह नहीं बता सकती कि फूलदान टूट गया है वरना वह बहुत क्रोधित होंगे।” वह चिल्लाई। कुछ समय बाद बादशाह ने कक्ष में प्रवेश किया। उनको अपने कक्ष में कुछ कमी महसूस हुई, पर वह समझ नहीं पाए कि कक्ष में कमी किस चीज की है। याद करने पर पाया कि उनका प्रिय फूलदान कक्ष में नहीं है।

    उन्होंने रानी से पूछा- “बेगम, वह फूलदान कहाँ है, जो मुझे एक चीनी यात्री ने तोहफे में दिया था?” “ओह! महाराज, नौकर उसकी धूल साफ करने के लिए ले गया है।” रानी ने झूठ बोलकर अपने आपको बादशाह के क्रोध से बचा लिया। अगली सुबह जब बादशाह सोकर उठे, तो उन्हें तरोताजा देखकर रानी ने अपना दोष स्वीकार करते हुए कहा “महाराज मैंने आपसे फूलदान के विषय में झूठ बोला था।

    गलती से मेरा हाथ लग जाने के कारण वह गिरकर टूट गया।” ‘पर तुमने तो कहा था कि नौकर उसे साफ करने के लिए ले गया है। बादशाह अकबर की रानी होते हुए भी तुमने मेरे सामने झूठ बोलने की हिम्मत की। मैं तुम्हें फूलदान तोड़ने के लिए क्षमा करता हूँ, परंतु झूठ बोलने के लिए मैं तुम्हें क्षमा नहीं करूंगा।

    अकबर ने क्रोधित होकर कहा- इसके दंड स्वरूप मैं तुम्हें आदेश देता हूँकि तुम तुरंत राजमहल को छोड़कर चली जाओ।” अनेक प्रकार से माफी माँगने के बाद भी बादशाह को रानी पर दया नहीं आई। वह राजमहल को छोड़कर आगरा से बाहर चली गई। शीघ्र ही यह खबर चारों तरफ फैल गई कि रानी ने राजमहल छोड़ दिया है।

    अगली सुबह बादशाह ने दरबार में पूछा “क्या कभी किसी ने झूठ बोला है?” सभी दरबारियों ने अपने जीवन के भय के कारण यह जवाब दिया कि उन्होंने हमेशा सच बोला है। उसी समय दरबार में बीरबल ने प्रवेश किया। वह आगरा से बाहर गया हुआ था और सुबह ही वापस आया था। उसके सामने भी वही प्रश्न रखा गया।

    बीरबल ने उत्तर दिया- “मैंने हमेशा ईमानदारी से काम करने की कोशिश की है, परंतु कभी-कभी ऐसा समय भी आता है कि व्यक्ति को झूठ का सहारा भी लेना पड़ता है।”

    “अकबर ने कहा- “यानि तुम यह कहना चाहते हो कि तुम बेईमान हो। परंतु बाकी सभी उपस्थित दरबारियों ने तो अपने जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोला।

     बीरबल जानता था कि सभी झूठ बोल रहे हैं। अकबर बीरबल से क्रोधित हो गए .....

    अकबर बोले- “बीरबल, मैं नहीं चाहता कि मेरे दरबार में कोई झूठा मंत्री रहे। मैं तुम्हें आदेश देता हूँकि तुम तुरंत आगरा छोड़ दो।” रानी को राजमहल छोड़ देने का आदेश पहले ही मिल चुका था। इस समय वह आगरा की सीमा पर बने एक महल में रह रही थीं।

    जब रानी को पता चला कि बादशाह सलामत ने बीरबल को भी आगरा छोड़ने का आदेश दे दिया है, तो उसने अपनी विश्वासपात्र नौकरानी से बीरबल को बुलाने के लिए कहा, क्योंकि रानी को पूरा विश्वास था कि बादशाह के आदेश का समाधान सिर्फ बीरबल को पास ही हो सकता है। जब बीरबल और रानी मिले, तो रानी ने पूरी घटना उसे सुनाई। बीरबल ने रानी की मदद करने का आश्वासन दिया।

    रानी से विदा लेकर बीरबल शहर के सबसे अच्छे जौहरी के पास गया।

    उसने जौहरी को गेहूँ का एक दाना दिखाया और कहा-“मैं चाहता हूँ कि तुम इसी प्रकार के सोने के दाने बनाओ जो बिल्कुल असली लगते हों।” कुछ ही दिनों में गेहूँ के सोने के दाने तैयार हो गए। बीरबल उन्हें लेकर बादशाह अकबर के दरबार में पहुँचा। दरबार में उपस्थित होने की इजाजत लेने के बाद वह बादशाह अकबर के सामने खड़ा हो गया|

    बीरबल बोला- “महाराज! आपके आदेश के मुताबिक मुझे आगरा की सीमा में पैर नहीं रखने चाहिए थे, परंतु एक आश्चर्यजनक घटना ने मुझे आपके आदेश का उल्लंघन करने पर विवश कर दिया। मैं शहर के बाहर आवश्यक कार्य से कहीं जा रहा था, तो मार्ग में मुझे एक यात्री मिला, जिसने मुझे गेहूँ के यह अतिविशिष्ट दाने दिए। यदि इन्हें बो दिया जाए, तो हमारे पास सोने की अच्छी पैदावार हो सकती है?”

    अकबर गेहूँ के दानों को देखकर आश्चर्यचकित हो गया और बोला “क्या यह सचमुच संभव है?” “महाराज, यह मैं निश्चित रूप से तो नहीं कह सकता, पर हम कोशिश करके तो देख ही सकते हैं। जिसने मुझे यह बीज दिये हैं, उसने मुझे इन्हें उपजाने की सारी प्रक्रिया समझा दी है। मेरे पास थोड़ी-सी उपजाऊ भूमि है।

    यदि आप इच्छुक हों, तो अगले सप्ताह पूर्णमासी की रात को हम इन दानों को बो दें।” बीरबल ने कहा। बादशाह बड़ी प्रसन्नता के साथ सहमत हो गया। शीघ्र ही यह खबर चारों ओर फैल गई और सभी लोग निर्धारित दिन, निर्धारित स्थान पर एकत्रित हो गए।

    बादशाह ने कहा- “बीरबल अब सोने के दानों को बोना शुरू करो।”

     ‘अरे नहीं, महाराज! मैं इन्हें नहीं बो सकता, क्योंकि मैंने अपने जीवन में छोटे-बड़े बहुत झूठ बोले हैं। इन दानों को केवल वही व्यक्ति बो सकता है जिसने कभी पाप न किया हो, जो पूरी तरह पवित्र हो, और जिसने कभी, छोटी-बड़ा किसी प्रकार का झूठ न बोला हो। लेकिन महाराज, आप चिंतित न हों, केवल मैं ही तो इन्हें नहीं बो सकता, परंतु आप विश्वास कीजिए आपके अन्य सभी दरबारी इन्हें बो सकते हैं।

    बीरबल ने कहा- आप जिससे चाहें उससे इसकी बुआई करवा सकते हैं।”

     पर यह क्या। बीरबल की बात सुनते ही सभी दरबारी सिर झुकाकर पीछे हट गए। वे जानते थे कि वे झूठे हैं और उनके बोए हुए दानों से अंकुर नहीं निकलेगा उन्हें शर्मिदा महसूस होते देखकर.....

    बीरबल-अकबर से बोला- “महाराज, अकेले आप ही आप ही इन दानों को बो सकते हैं।” “बीरबल, इन दानों को मैं भी नहीं बो सकता, क्योंकि बचपन में मैंने भी कई बार झूठ बोला है।

    मुझे डर है कि शायद हमें कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिल पाएगा, जिसने अपने जीवन में झूठ न बोला हो।” तब बादशाह अकबर ने अपनी कही बात के महत्व को स्वयं महसूस किया। उन्होंने बीरबल और रानी को माफ कर दिया और दोनों को अपने साथ वापस आगरा चलने का आदेश दिया।


    True Motivational Stories in Hindi अंधविश्वास


    एक गाँव में एक आदमी रहता था| वह आदमी पूरे गाँव में अन्धविश्वासी के नाम से मशहूर था| उसकी पत्नी उससे परेशान हो चुकी थी| जब कभी भी उस आदमी की पत्नी से दूध फेल जाता तो वह घबरा जाता और तुरंत मंदिर में जाकर पाठ करने लगता|

    कभी उसकी पत्नी से कोई काँच की चीज टूट जाये तो वह आग बबूला हो जाता| उसके इस व्यवहार के चलते पति–पत्नी में दूरियाँ बनती गईं| पत्नी अपना काम करती और उसका काम उसी को करने देती|

    उस आदमी को सफाई बहुत पसंद थी मगर दोनों के बीच दूरियों के कारण घर की सफाई भी नहीं हो पा रही थी क्योंकि पत्नी कहती कि अगर मैंने सफाई की और गलती से कोई काँच की चीज मुझसे टूट गई तो आप तो डाँटोगे ही, इसलिए मैं घर की सफाई नहीं कर सकती|

    और आदमी बोलता- जिस घर में आदमी सफाई करे, उस घर में लक्ष्मी और खुशियाँ कभी नहीं आ सकतीं| अब सफाई को लेकर भी दोनों के बीच में खूब बहस होती| आखिर में उस आदमी को काम वाली बाई रखनी पड़ी| मगर काम वाली बाई भी उसके अन्धविश्वास के चलते वहाँ ज़्यादा दिन न रह सकी|

    एक दिन उसके घर में चोरी हो गई|

    पत्नी के पुलिस को फ़ोन करने को कहने पर वह बोला- “रूको। जब कभी भी घर में कोई बुरा काम हो जाये तो आधे या एक घंटे बाद ही कोई दूसरा काम करना चाहिए|”

    पत्नी अपना माथा पकड़कर वहीं बैठ गई| उसकी पत्नी रोज यही सोचती कि कब उसके आदमी का अन्धविश्वास छूटेगा| पर कहते हैं कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं| एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उस आदमी का सारा अन्धविश्वास दूर हो गया|

    हुआ कुछ यूँ कि कुछ दिनों से उस आदमी के घर के पीछे स्थित नारियल के झुरमुट से एक बच्चे की रोने की आवाज आती थी| इससे वह बहुत डर जाता| उसकी पत्नी कहती कि चलो देख के आते हैं कि आखिर क्या है वहाँ पर।

    पर वह उसे डाँट कर घर से बाहर निकलने ही नहीं देता| एक दिन वह एक तांत्रिक को अपने घर पे ले आया| तांत्रिक ने घर पे आते ही कहा कि इस घर पे और इसके आस-पास काली शक्तियों का बसेरा है| वह आदमी डर गया|

    उसने बोला- “बाबा! अब क्या करें?” बाबा ने कहा कि एक हवन करना पड़ेगा और इसमें 21 हजार रूपये खर्चा होगा| उसकी पत्नी ने उसे रोका पर वह नहीं माना| हवन होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ|

    एक दिन उसके घर के पास से राजू निकला जो उन नारियल के पेड़ों से नारियल तोड़ता और उन्हें बाज़ार में बेचता था| वह बहुत परेशान दिख रहा था तो उस आदमी ने उससे कारण पूछा|

    राजू बोला- “मेरा मोबाइल नारियल के पेड़ों के पास कहीं गिर गया था, मिल ही नहीं रहा|”

    वह आदमी बोला- “राजू! वहाँ मत जाया कर। वहाँ काली शक्तियों का राज है। वहाँ रोज़ एक बच्चे की रोने की आवाज आती है|”

    यह सुनकर राजू जोर–जोर से हँसने लगा और बोला- “साब, आप कितने पागल हो। वह आवाज तो मेरे मोबाइल में से आती है। मैंने अपने मोबाइल में बच्चे की रोने की आवाज सेट की है|”

    आस पास खड़े लोग भी उस आदमी पर हँसने लगे और उस आदमी की गर्दन शर्म से नीचे झुक गई|


    True Motivational Stories in Hindi एहसान


    एक बहेलिया था। एक बार जंगल में उसने चिड़िया फंसाने के लिए अपना जाल फैलाया। थोड़ी देर बाद ही एक उकाब उसके जाल में फंस गया।

    वह उसे घर लाया और उसके पंख काट दिए। अब उकाब उड़ नहीं सकता था, बस उछल उछलकर घर के आस-पास ही घूमता रहता।

    उस बहेलिए के घर के पास ही एक शिकारी रहता था। उकाब की यह हालत देखकर उससे सहन नहीं हुआ।

    वह बहेलिए के पास गया और कहा-"मित्र, जहां तक मुझे मालूम है, तुम्हारे पास एक उकाब है, जिसके तुमने पंख काट दिए हैं। उकाब तो शिकारी पक्षी है।

    छोटे-छोटे जानवर खा कर अपना भरण-पोषण करता है। इसके लिए उसका उड़ना जरूरी है। मगर उसके पंख काटकर तुमने उसे अपंग बना दिया है। फिर भी क्या तुम उसे मुझे बेच दोगे?"

    बहेलिए के लिए उकाब कोई काम का पक्षी तो था नहीं, अतः उसने उस शिकारी की बात मान ली और कुछ पैसों के बदले उकाब उसे दे दिया।

    शिकारी उकाब को अपने घर ले आया और उसकी दवा-दारू करने लगा। दो माह में उकाब के नए पंख निकल आए। वे पहले जैसे ही बड़े थे। अब वह उड़ सकता था।

    जब शिकारी को यह बात समझ में आ गई तो उसने उकाब को खुले आकाश में छोड़ दिया। उकाब ऊंचे आकाश में उड़ गया। शिकारी यह सब देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उकाब भी बहुत प्रसन्न था और शिकारी बहुत कृतज्ञ था।

    अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उकाब एक खरगोश मारकर शिकारी के पास लाया।

    एक लोमड़ी, जो यह सब देख रही थी,

    लोमड़ी उकाब से बोली-"मित्र! जो तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकता उसे प्रसन्न करने से क्या लाभ?"

    इसके उत्तर में उकाब ने कहा-"व्यक्ति को हर उस व्यक्ति का एहसान मानना चाहिए, जिसने उसकी सहायता की हो और ऐेसे व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिए जो हानि पहुंचा सकते हों।"

    Moral:- व्यक्ति को सदा सहायता करने वाले का कृतज्ञ रहना चाहिए।


    True Motivational Stories in Hindi बगल में छोरा नगर ढिंढोरा


    एक पंडित जी थे। उनके पास एक मोटी ताजी दुधारू गाय थी। यह गाय किसी ने उन्हें दान में दी थी। गाय के कारण घर में दूध, घी, दही की कमी नहीं होती थी। खा पीकर पंडित जी मोटे तगड़े होते जा रहे थे।

    एक शाम की बात है, पंडित जी जैसे ही दूध दुहने गोशाला पहुंचे तो गाय वहां से गायब मिली। खूंटा भी उखड़ा हुआ था। पंडित जी की जान सूख गई।

    उन्होंने सोचा-”हो न हो गाय कहीं निकल भागी है।“ गाय चूंकि उन्हें बहुत प्रिय थी सो वह फौरन ढूंढ़ने निकल पड़े।

    थोड़ी दूर पर पंडित जी को एक गाय चरती हुई दिखाई दी। वह खुश हो गए। लेकिन सांझ के झुरमुट में यह नहीं जान पाए कि जिसे वह अपनी गाय समझ बैठे हैं, वह पड़ोसी का मरखना सांड़ है।

    उन्होंने लपककर ज्यों ही रस्सी थामी कि सांड़ भड़क उठा। जब तक सारी बात समझ में आती, देर हो चुकी थी। सांड़ हुंकारता हुआ उनके पीछे दौड़ पड़ा। थुलथुल शरीर वाले पंडित जी हांफते हांफते गिरते पड़ते भाग खड़े हुए।

    भागते भागते उनका दम निकला जा रहा था और सांड़ था कि हार मानने को तैयार ही नहीं था। आखिरकार एक गड्डा देखकर पंडित जी उसमें धप से कूद गए। सांड़ फिर भी न माना। पीछे पीछे वह भी गड्डे में उतर पड़ा।

    पंडित जी फिर भागे। अबकी बार उन्हें भूसे का एक ढेर दिखा, पंडित जी उस पर कूद गए और दम साधकर पड़े रहे। सांड़ ने भूसे के दो एक चक्कर लगाए और थोड़ी देर ठहर कर इधर उधर उन्हें तलाशता रहा, फिर चला गया।

    भूसे के ढेर से पंडित जी वापस आए तो उनका रूप बदल चुका था। पूरे शरीर पर भूसा चिपक गया था। वह किसी दूसरे ग्रह के जीव नजर आ रहे थे। तभी उधर से गुजरते हुए एक आदमी की नजर उन पर पड़ी। वह डरकर चीख उठा।

    उसकी चीख सुनकर दस बीस आदमी मदद को आ जुटे। अब आगे आगे पंडित जी और पीछे पीछे सारे लोग।

    वह चीखते रहे-”भाइयों, मैं हूं पंडित जी….“ पर लोगों ने एक न सुनी।

    आखिरकार बचने का एकमात्र उपाय देखकर पंडित जी एक तालाब में कूद पड़े, तन से भूसा छूटा तो लोग हैरान रह गए। जब सारे लोगों को उनकी रामकहानी मालूम हुई तो सारे वापस अपने घरों को लौट गए।

    पंडित जी गाय की खोज में हांफते हांफते आगे बढ़े। गांव के बाहर आम के बाग थे। गाय चरती हुई अक्सर उधर चली जाती थी। पंडित जीम न में एक आशा की किरण लिए आगे बढ़े। उन दिनों आम पकने लगे थे। रखवाले बागों में झोंपड़ी बनाकर रखवाली करते थे। जब उन्होंने चुपके चुपके किसी को

    बाग में घुसते देखा तो लाठी लेकर शोर मचाते हुए उस और दौड़ पड़े जिस ओर से पंडित जी आ रहे थे। पंडित जी के होश उड़ गए। वह सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए।

    भागते भागते वह एक खेत में पहुंचे। खेत में खरबूजे और ककड़ियां बोई थीं। खेत के रखवाले ने गोल मटोल पंडित जी को देखा तो समझा कोई जानवर घुस आया है। वे लाठियां और जलती मशालें लेकर उनके पीछे लपक लिए। अब पंडित जी का धैर्य टूट गया। इस बार भागे तो सीधा घर जाकर रूके।

    उनकी हालत देखकर पंडिताइन ने पूछा-”क्यों जी कहां से आ रहे हो?“

    पंडित जी हांफते हुए बोले- ”मैं गाय की खोज में दुबला हो गया और तुम पूछती हो कि कहां से आ रहे हो?“

    "गाय की खोज? गाय तो घर के पीछे बंधी है। गौशाला का खूंटा उखड़ गया था। इसलिए मैंने गाय को घर के पीछे ले जाकर बांध दिया था।“

    पंडिताइन की बात सुनकर पंडित जी ने सिर पीट लिया।

    More Hindi Story :

    True Motivational Stories किसी कार्य को करने का अंजाम


    एक कंजूस महिला की यह आदत थी कि जैसे ही मुर्गे ने भोर में बांग लगाई- ‘कुंकडू-कूं और उसने अपनी नौकरानियों को उनके बिस्तरों से उठाना शुरू कर दिया।

    नौकरानियां जवान मगर काहिल थी। उन्हें इस तरह अपनी मालकिन द्वारा गहरी नींद से उठाया जाना बिल्कुल पंसद नहीं था। वे चाहती थीं कि किसी प्रकार इस समस्या का हल निकल आए।

    वह मुर्गा उनके लिए सबसे अधिक चिंता का विषय था। चाहे गरमी हो या बरसात, जाड़ा हो या बसन्त, बेरोकटोक सूर्य की निर्मल किरणें धरती पर पड़ते ही वह बांग देना शुरू कर देता था।

    उसकी बांग की आवाज सुनकर वह कंजूस महिला खुद तो उठ ही जाती, साथ ही गहरी नींद सोती हुई अपनी नौकरानियों को भी उठा देती।

    ”यह सब उस मुर्गे के कारण होता है। उसकी वजह से ही हमारी नींद में खलल पड़ती है। हमारी इस समस्या का हल यही है कि हम उस मुर्गे को ही जान से मार दें।“ उनमें से एक नौकरानी ने अपनी राय दी।

    उसकी बात सुनकर सभी नौकरानियां काफी खुश हुई। उन्होंने मुर्गे को मारने की एक योजना भी बनाई।

    एक दिन मौका पाकर उन्होंने मुर्गे को पकड़ा और एकांत में ले जाकर उसकी गरदन ऐंठ कर उसे जान से मार दिया।

    अब वे सभी यह सोचकर प्रसन्न थीं कि न तो मुर्गा भोर में बांग देगा और न ही मालकिन उठकर उन्हें जगाएगी। इस प्रकार उन्हें सुबह देर तक सोए रहने का अवसर प्राप्त हो जाएगा।

    मगर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। अब मालकिन के पास चूंकि सही समय जानने का कोई साधन नहीं था, इसलिए वह सूर्य निकलने के बहुत पहले या कभी कभी आधी रात को ही उठ बैठती और साथ ही अपनी नौकरानियों को भी उठा देती।

    नौकरानियों ने अपनी समस्या के हल के लिए मुर्गे को जान से मारा था, मगर हाय रे भाग्य! इससे उनकी समस्या बजाय घटने के और बढ़ गई।

    Moral:- किसी कार्य को करने से पहले उसका अंजाम पहले सोचो।


    True Motivational Stories in Hindi लोमड़ी और बकरी


    एक समय की बात है, एक लोमड़ी घूमते-घूमते एक कुएं के पास पहुंच गई। कुएं की जगत नहीं थी। उधर, लोमड़ी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया। परिणाम यह हुआ कि बेचारी लोमड़ी कुएं में गिर गई।

    कुआं अधिक गहरा तो नहीं था, परंतु फिर भी लोमड़ी के लिए उससे बाहर निकलना सम्भव नहीं था। लोमड़ी अपनी पूरी शक्ति लगाकर कुएं से बाहर आने के लिए उछल रही थी, परंतु उसे सफलता नहीं मिल रही थी। अंत में लोमड़ी थक गई और निराश होकर एकटक ऊपर देखने लगी कि शायद उसे कोई सहायता मिल जाए।

    लोमड़ी का भाग्य देखिए, तभी कुएं के पास से एक बकरी गुजरी। उसके कुएं के भीतर झांका तो लोमड़ी को वहां देखकर हैरान रह गई।

    बकरी बोली- "नमस्ते, लोमड़ी जी! आप यह कुएं में क्या कर रही हो?"

    लोमड़ी ने उत्तर दिया- "नमस्ते, बकरी जी! मुझे यहां कुएं में बहुत मजा आ रहा है।"

    बकरी बोली- अच्छा! बहुत प्रसन्नता हुई यह जानकर। "आखिर बात क्या है?"

    लोमड़ी बड़ी चतुरता से बोली- "यहां की घास अत्यन्त स्वादिष्ट है।"

    बकरी आश्चर्य से बोली- "मगर तुम कब से घास खाने लगी हो?

    ”तुम्हारा कहना ठीक है। मैं घास नहीं खाती, मगर यहां की घास इतनी स्वादिष्ट है कि एक बार खा लेने के बाद बार बार घास ही खाने को जी करता है। तुम भी क्यों नहीं आ जाती हो?“

    बकरी के मुंह में पानी भर आया- धन्यवाद!"बकरी कहने लगी मैं भी थोड़ी घास खाऊंगी।“

    अगले ही क्षण बकरी कुएं में कूद गई। मगर जैसे ही बकरी कुएं के भीतर पहुंची लोमड़ी बकरी की पीठ पर चढ़कर ऊपर उछली और कुएं से बाहर निकल गई।

    ”वाह! बकरी जी। अब आप जी भर कर घास खाइए, मैं तो चली।“

    इस प्रकार वह चतुर लोमड़ी बकरी का सहारा लेकर खुद तो कुएं से बाहर आ गई लेकिन बकरी को कुएं में छोड़ दिया।

    Moral:- हर किसी पर आंख मूंदकर विश्वास न करो।


    मेंढ़क तथा सांड़ True Motivational Stories in Hindi


    यह किसी तालाब के किनारे की घटना है। एम मेंढ़क का बच्चा पहली बार पानी से बाहर आया। तालाब के कुछ दूर पर भीमकाय सांड़ घास चर रहा था।

    मेंढ़क के बच्चे ने तो कभी भी इतना भयानक एवं भीमकाय जानवर नहीं देखा था। बेचारा समझ नहीं पर रहा था कि यह है क्या?

    वह उल्टे पैरों भय से कांपता हुआ घर आया। घर पहुंच कर अपनी मां से लिपट गया और हांफता-हांफता हुआ कहने लगा- ”मां, मैने अभी अभी तालाब से बाहर एक बहुत बड़ा जानवर देखा है।“

    मां ने बच्चे को गोद में झुलाते हुए पूछा- "कैसा था देखने में वह जानवर?

    मेंढ़क का बच्चा बोला- "उसका वजन बताना तो मेरे लिए कठिन है, मगर समझ लो कि उसके चार पैर लम्बे-लम्बे थे। एक पूंछ थी, दो बड़ी-बड़ी आंखें। सिर से दो नुकीली भाले जैसी दो चीजें निकली पड़ी थी।

    मेंढ़क की मां ने भी कभी तालाब से बाहर कदम नहीं रखा था, इसलिए वह भी ठीक से समझ नहीं पा रही थी कि आखिर वह कौन से जानवर हो सकता है? उसे यह सुनकर कुछ अपमान भी महसूस हुआ कि उसका बेटा उसके आकार को उससे भी बड़ा बता रहा है, जबकि वह अपने से बड़ा किसी को समझती ही नहीं थी। इसलिए उसने जोर से सांस खींचीऔर...

    अपना शरीर फुलाते हुए बोली- ”क्या इतना बड़ा था," जितनी मैं हूं?

    मेंढ़क का बच्चा कांपते हुए चिल्लाया- अरे नहीं मां, वह तो तुमसे बहुत अधिक बड़ा था। इस बार मेंढ़क की मां ने अपने फेफड़ों में ढेर सारी हवा भरी...

    और आशा भरे स्वर में बोली- ”अब देखो! क्या अब भी वह मुझसे बड़ा लगता था?“

    मेंढ़क का बच्चा बोला- "नहीं मां, तुम तो उसके आगे कुछ भी नहीं हो।

    मेंढ़क की मां ने ये सुनते ही- उसकी मां के लिए यह बात एक चुनौती बन गई। वह अपने फेफड़ों में जबरदस्ती हवा भर कर फूलने का प्रयत्न करने लगी, मगर आखिर वह कितना फूलती।

    एक समय आया जब उसका पेट किसी गुब्बारे की भांति फट गया।

    Moral:- घमंडी व्यक्ति का सिर सदैव नीचा होता है।

     

    True Motivational Stories in Hindi नांद में कुत्ता


    किसी गांव में एक कुत्ता रहता था। वह झगड़ालू स्वभाव का था। एक दिन की घटना है कि वह एक अस्तबल में घुस गया और चारे की एक नांद (चरनी) पर चढ़ कर बैठ गया।

    उसे वह स्थान इतना पंसद आया कि वह दिन भर वहीं लेटा रहा। उधर, जब घोड़ों को भूख लगी तो वे चारा खाने के लिए नांद की ओर आए।

    मगर वह कुत्ता किसी घोड़े को नांद के पास फटकने ही नहीं देता था।

    वह हरेक घोड़े पर भौंकता हुआ दौड़ता। बेचारे घोड़े अपना भोजन नहीं कर पर रहे थे। चूंकि चारा कुत्ते का भी भोजन नहीं था|

    इसलिए हुआ यह कि कुत्ता न तो खुद भोजन खा रहा था और न ही किसी घोड़े को खाने दे रहा था।

    नतीजा यह हुआ कि स्वयं वह तथा घोड़े भूखे ही रह गए।

    Moral:-इस कहानी से ये सीख मिलती है कि किसी के हक पर जबरदस्ती कब्जा न करो।

     

    True Motivational Stories in Hindi शिकारी खुद शिकार बना


    एक बार एक शिकारी किसी घने जंगल से होकर गुजर रहा था। उसके पास बंदूक भी थी।

    जब वह जंगल के भीतर गया तो उसने पेड़ की एक डाल पर एक कबूतर बैठा देखा।

    शिकारी ने- अपनी बंदूक से कबूतर का निशाना लिया और बंदूक का घोड़ा दबाने ही वाला था कि कहीं पीछे से एक सांप आया और उसे डस लिया।

    सांप की वजह से- शिकारी अपने शिकार पर गोली नहीं चला सका और नीचे गिर पड़ा। सांप के विष का प्रभाव इतना तेज था कि उसका शरीर नीला पड़ने लगा। वह जमीन पर लोटने लगा। उसके मुंह से झाग निकलने लगे।

    मरते समय शिकारी ने सोचा- ‘सांप ने मेरे साथ वही किया, जो मैं उस मासूम कबूतर के साथ करना चाहता था।’

    Moral:-दूसरों का बुरा करने वाला स्वयं भी विपत्ति में फंसता है।


    True Motivational Stories in Hindi एक गलत इच्छा


    एक बार एक मधुमक्खी ने एक बरतन में शहद इकटृा किया और ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया।

    ईश्वर उस भेंट से बहुत प्रसन्न हुए और मधुमक्खी से बोले कि वह जो चाहे इच्छा करे, उसे पूरा किया जाएगा।

    मधुमक्खी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुई और बोली- ”हे सर्वशक्तिमान ईश्वर, यदि आप सचमुच मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझे यह वरदान दें कि मैं जिसे भी डंक मारूं, वह दर्द से तड़प उठे।

    ईश्वर यह सुनकर बहुत क्रोधित हुए- ”क्या इसके अतिरिक्त तुम्हारी अन्य कोई इच्छा नहीं है। ठीक है, मैंने वादा किया है कि तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगा, परंतु एक शर्त है।

    मधुमक्खी से ईश्वर ने फिर कहा- वह यह कि तुम जिसे डंक मारोगी उसे तो बहुत दर्द होगा, परंतु तुम भी तुरंत मर जाओगी।"

    दूसरे ही क्षण ईश्वर वहां से चले गए।

    Moral:-जो दूसरों का बुरा चाहते हैं, उनका भी बुरा ही होता है।


    True Motivational Stories in Hindi हिरन का बच्चा और बारहसिंगा


    एक दिन एक हिरन का बच्चा तथा एक बारहसिंगा दोनों किसी जंगल में एक साथ चर रहे थे। अचानक शिकारी कुत्तों का एक झुंड उनसे कुछ दूरी पर गुजरा।

    बारहसिंगा तुरंत झाडि़यों के पीछे छिप गया और हिरन के बच्चे से भी ऐसा ही करने लिए कहा। जब शिकारी कुत्ते चले गए तो....

    हिरन के बच्चे ने बहुत भोलेपन से कहा- ”चाचा, आखिर तुम इनसे इतने भयभीत क्यों थे?

    अगर तुम उनसे लड़ने भी लगो तो तुम्हारे पराजित हो जाने की संभावनाएं बहुत कम हैं। ईश्वर की दया से तुम्हारे सींग नुकील हैं। तुम्हारे लम्बे-लम्बे पैर हैं।

    चाहो तो दौड़ में उन्हें पछाड़ सकते हो। तुम्हारा शरीर भी कई गुना बड़ा है। फिर भी तुम इतने भयभीत हो।“

    बारहसिंगे ने हिरन के बच्चे की बात ध्यान से सुनी और बोला- ”देखो लड़के, जो तुम कह रहे हो, वह बिल्कुल सच है। मैं भी ऐसा ही सोचता हूं,

    बारहसिंगा ने फिर कहा- मगर सत्य तो यह है कि हममें से जब भी कोई इन शिकारी कुत्तों के चुगंल में फंसा है, वह कभी जीवित नहीं बचा है।

    यही वह भय है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आया है। पीढि़यों पुराना यह भय हमारी नसों में भर गया है, हमारी प्रतिक्रियाओं में प्रतिबिम्ब्ति होता है।

    यही कारण है कि इन जंगली जानवरों के सामने आते ही हम होशियार हो जाते हैं और अपने बचाव का प्रयत्न करते हैं।"

    Moral:- कई बार हम शक्तिशाली होकर भी भयभीत रहते हैं, ऐसा आनुवंशिकता के कारण होता है।

     

    True Motivational Stories in Hindi साहसी बालक


    शहर के बाहर एक विशाल पार्क था। उसी के साथ एक गहरी नदी तीव्र वेग से बहती थी।

    शाम के समय बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पार्क में बिछी हरी हरी दूब, क्यारियों में खिले रंग बिरंगे फूल, तरह तरह के पेड़, लताएं और फव्वारों के बीच बैठकर फुरसत के क्षणों का आनन्द लूटते थे।

    एक दिन पार्क में दो बच्चे खेलते कूदते नदी के तट पर पहुंच गये। शरारत तो बच्चों का स्वभाव है। दोनों एक दूसरे के साथ धक्का मुक्की करते हुए नदी में जा गिरे।

    नदी में बहते-डूबते बच्चों पर मां की निगाह पड़ी और वह एकदम बदहवास सी पागलों की तरह चिल्लाने लगी- अरे, कोई मेरे बच्चों को बचाओ। देखो, मेरे दोनों बच्चे डूब रहे हैं। कोई तो सहायता करो।

    स्त्री के चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां भीड़ इकटठे हो गई। नदी गहरी थी। किसी की भी नदी में कूदने की हिम्मत नहीं हो रही थी। सब मूक दर्शक बने खड़े थे। मां हाथ पीट कर चिल्ला रही थी।

    वह स्वयं ही दौड़कर नदी में कूदने ही वाली थी कि तभी अचानक कहीं से एक लड़का दौड़ता हुआ आया। उसने बच्चों को डूबते हुए देखा तो प्राणों की परवाह किये बिना ही उसने तुरन्त नदी में छलांग लगा दी।

    वह तीर की तरह तैर कर, डूबते-उठते बच्चों के पास पहुंचा। उन्हें पकड़ कर पीठ पर लादा और तैरते हुए बच्चों को सुरक्षित किनारे पर ले आया। सभी दर्शक उसकी उदार साहसिकता को देखकर अचम्भित रह गये।

    सभी मुक्त कंठ से लड़के की प्रशंसा करते हुए कह रहे थे यह तो कोई मसीहा है जो अचानक प्रकट होकर बच्चों की रक्षा के लिये आ गया।

    बच्चों की मां ने रोते रोते लड़के को सैंकड़ों दुआएं दे डाली। उसने कई बार प्यार से उसका माथा चूमा। इस साहसी और वीर बालक का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था।

    इस बालक में आरंभ से ही उदारता, साहसिकता और परोपकारिता कूट कूट कर भरी हुई थी। वह साहसी तो था ही, साथ ही वह सादगी पसंद, सत्यवादी और न्यायप्रिय भी था।

    अपने इन्हीं गुणों के कारण वह हमेशा प्रगति के पथ पर आगे ही आगे बढ़ता रहा|

    जिस मनुष्य में सादगी हो, सच्चाई हो, साहस और धैर्य हो, मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से जूझने का दिल हो तभी वह व्यक्ति महापुरूष बनेगा।


    बहादुरी का इनाम True Motivational Stories in Hindi


    नीटू था तो छोटा-सा बालक पर बहुत ही निडर और साहसी। उसे जासूसी तथा बहादुरी की कहानियाँ पढ़ने में बहुत मजा आता।

    रात को सोते समय भी कहानियों में पढ़ी रोमांचकारी वारदातें पुलिस की भागदौड़ और जासूस झटपट लाल के सनसनीखेज कारनामें उसके दिमाग में धमाचौकड़ी मचाए रहते।

    व सोचता कि यदि वह भी कोई जासूस होता तो देश में जगह-जगह फैले तरह-तरह के अपराधियों की हालत खराब कर देता।

    वह कोई-न-कोई बहादुरी का काम करके बहादुरी का इनाम जीतना चाहता था। जब वह अपने मित्रों के बीच बैठकर ऐसी बातें करता तो सब उसकी हँसी उड़ाते और ‘क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा’ कहकर उसे छेड़ते।

    नीटू अपने मां-बाप के साथ एक छोटे से कस्बे में  रहता था। यहां चोरियाँ बहुत हुआ करती थीं। सभी लोगों के मन में चोर-लुटेरों का डर बुरी तरह समाया हुआ था।नीटू के पिता जी ने अपने जानमाल की हिफाजत के लिए लाइसेंस बनवा कर एक पिस्तौल भी खरीद ली थी।

    एक दिन नीटू ने अपने पिता जी से कहा। कि वह भी पिस्तौल चलाना सीखना चाहता है। तब उसके पिताजी ने उसको समझाया कि अभी वह बहुत छोटा है कुछ सालों बाद स्वयं ही उसे पिस्तौल चलाना सिखा देंगे। पर उसके हठ को देखकर उन्होंने उसे पिस्तौल चलाने के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी दे दी।

    साथ ही यह भी कहा कि असली पिस्तौल चलाने की अभी उसकी उम्र नहीं है इसलिए वह उसे खिलौने वाली पिस्तौल ला देंगे। जिससे वह निशाना साधने का अभ्यास कर सकता है।


    True Motivational Stories in Hindi चालाक लोमड़ी


    किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी जो बहुत ही धूर्त और चालाक थी. जंगल के छोटे मोटे जानवरों को वह अपनी मीठी बातों में फंसा कर उन पर शिकार करने का प्रयत्न करती. कभी-कभी तो उसकी चालाकी समझकर कुछ जानवर भाग निकलते और कभी कभी कुछ बेचारे उसका शिकार बनते.

    एक दिन गदहा कहीं से घूमता फिरता उस जंगल में पहुंचा. लोमड़ी ने सोचा कि कहीं ऐसा न हो यह गदहा जंगल के छोटे मोटे जानवरों को मेरी चालाकियां समझा दे, तो हम कहीं के भी नहीं रहेंगे.

    अतः उसने सोचा कि क्यों न गदहा से भी दोस्ती का हाथ बढ़ा कर फिर उस का शिकार कर दिया जाय. वह बहुत ही विनम्र भाव में बोली, कि भाई तुम्हारा नाम क्या है, और कहाँ से और किस प्रयोजन से यहाँ आना हुआ. गदहे ने अपना परिचय बता दिया.

    लोमड़ी ने कहा- बड़ा अच्छा हुआ तुम आ गए अब हम तुम एक मित्र की भांति रहेंगे. गधा बिचारा सीधा सादा था उसे छल प्रपंच की बातें आती नहीं थी वह क्या समझता कि लोमड़ी के मन में क्या पक रहा है .

    एक दिन लोमड़ी कुछ उदास हो कर बैठी.

    गदहे ने उसे चिन्तित देखा तो पूछा- लोमड़ी बहन! तुम इतनी उदास क्यों हो. लोमड़ी ने और भी उदास मुद्रा बनाकर कहा क्या बताऊं भाई! मैंने एक पाप किया है उसी की याद करके मुझे पश्चाताप हो रहा है.

    लोमड़ी ने आंखों में आंसू भरकर कहा- कुछ दिन पहले मैं और मेरा लोमड़ सुख से रहते थे, एक दिन हम दोनों में एक बात को लेकर बड़ी जोर से झगड़ा हो गया. लोमड़ क्रोध में घर से बाहर निकल गया कुछ देर तो मैं घर में रही. मैंने सोचा कि क्रोध शांत होने पर लोमड़ घर लौट आएगा किंतु वह तो नहीं लौटा लेकिन शेर की दहाड़ सुनाई पड़ने लगी.

    मैं भाग कर गई कि कहीं शेर मेरे लोमड़ को मार न डाले. किंतु मेरे जाते जाते शेर मेरे लोमड़ का शिकार कर चुका था. मुझे भी घर जाने की इच्छा नहीं हुई तब से मैं यहीं पड़ी रहती हूं.

    इतना कहकर लोमड़ी रोने लगी. मैं यही सोचती हूं कि मैंने लड़ाई क्यों की. गदहे ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया और बोला मत दुखी हो बहन ! गल्ती हो ही जाया करती है. तुमने जान बूझ कर तो कुछ किया नहीं |

    लोमड़ी ने कहा- भाई तुमने भी कोई पाप किया है कभी तो मुझे बताओ.

    गदहे ने कहा- हां बहन ! एक बार मुझसे भी गल्ती हो गई थी. मैं भी एक धोबी का नौकर था. धोबी रोज कपड़ों की लादी मुझ पर लादता था. और घर से घाट और घाट से घर ले जाया करता था.| उसके एवज में मुझे घांस पानी मिलता था. एक दिन धोबी के लड़के ने मुझ पर लादी लाद दी और खुद भी बैठकर चला घात की ओर.

    उस दिन मेरी इच्छा चलने की नहीं हो रही थी. मैं अड़ गया. लड़के ने पुचकारा किंतु मई अड़ा रहा वह गुस्से में उतर कर मुझे मारने चला. मैंने वह पैर फटकारा कि उसकी लादी भी गिर गई और उसे भी चोट आ गई और मैं वहां से चल दिया. मैं भी यही सोचता हूं कि मैंने वह गल्ती क्यों की.

    लोमड़ी ने गुस्से में भर के कहा- नमकहराम जिसका खाता रहा उसी का काम करने में आनाकानी की तेरी शक्ल भी देखना पाप है. कह कर वह झपटने को हुई. पहले तो गदहा यह न समझ पाया कि लोमड़ी क्यों एक दम बदल गई. वह रेंकता हुआ भागा लोमड़ी ने उसका पीछा किया.

    गदहे का रेंकना सुनकर जंगल के और जानवर आए. जब लोमड़ी और उसको भागते देखा तो यह कहते हुए भागे कि अरे! आज लोमड़ी ने अपने लोमड़ की मनगढ़ंत कहानी सुना कर गदहे को अपना शिकार बना लिया.

    गदहे का क्या हुआ यह तो याद नहीं है किंतु लोमड़ी पर से सभी जानवरों का विश्वास उठ गया. वह एक अकेली और निरीह सी घूमने लगी. कहानी समझने की है|

    झूठ बोलकर धोखा दिया जा सकता है किंतु यदि झूठ खुल गया तो उस पर से सब का विश्वास सदा के लिए उठ जाता है.


    साहस ही है एक शक्ति True Motivational Stories in Hindi


    एक गाँव की बात है शाम का समय था, खम्माम जिले के माल्लेपानी जगह की बात है| दिन-भर पढ़ने के बाद एक चौदह वर्ष का बालक घर वापस आ रहा था|

    उसने रास्ते में एक औरत के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनी| उसने सामने देखा कि सड़क के पास एक कुएँ पर एक औरत चीखने-चिल्लाने के बाद रो रही थी और वह कुएँ के अन्दर झाँक रही थी|

    औरत की चीख-पुकार से वहाँ कई राहगीर इकट्ठे हो गए, पर सब हताश और किंकर्तव्य विमूढ़ खड़े थे| मालूम हुआ कि उस महिला का चार वर्षीय लड़का कुएँ में गिर गया था|

    रोती हुई महिला का क्रन्दन बढ़ गया था, पर कोई उसकी मदद नहीं कर रहा था|

    वह कुआँ लगभग दस मीटर गहरा था| उसमें तीन मीटर गहरा पानी भी भरा था| उस गहरे और संकरे कुएँ में कूदने का अर्थ था- मौत| वह चौदह वर्षीय वीर बालक वीरस्वामी एक क्षण ठिठका|

    अपना बस्ता उसने कुएँ की जगत पर रख दिया| कपड़े पहने ही एक रस्सी के सहारे कुएँ में कूद गया| डूबते हुए बालक को उसने बचा लिया|

    बचाव में उसे थोड़ी चोट भी लग गई, पर उसे उसकी परवाह बिल्कुल न थी|

    उसे यही विश्वास था कि संकट की उस घड़ी में उसने एक माता की पुकार पर एक डूबते बालक की प्राणरक्षा की|

    व्यक्ति में अगर साहस हो तो वह असम्भव को सम्भव कर सकता है|

    More Hindi Story :

    True Motivational Stories अपनी क्लास का हीरो बना जेरी


    जेरी 7 साल का एक बच्चा है जो तीसरी कक्षा में पढता है. वह स्कूल में डरा सेहमा सा, ना ज़्यादा बोलता है और ना ही ज़्यादा बात करता है. इस बात का फायदा उसके साथ के कई बच्चे उठाते है.

    चूँकि वह शरीफ, डरा सेहमा रहता है, उसके साथ के बच्चे उसका मज़ाक या उसे परेशान करते रहते है. वह इतना डरा रहता है कि किसी को कुछ बोल ही नहीं पाता. उसकी इसी आदत से जेरी के माँ-बाप भी परेशान है और चिंतित भी.

    एक दिन रोज़ की तरह जेरी की क्लास वाले उसे परेशान कर रहे थे कि 10 वीं क्लास के एक सर ने ये सब देख लिया.

    कुछ देर बाद उसी सर ने जेरी को अपने पास बुलाया और उसे एक काला धागा दिया और कहा “जेरी जब तक तुम ये काला धागा अपने पास रखोगे तुम शेर की तरह बहादुर और शक्तिशाली हो जाओगे.

    तुम्हे किसी से डरने की ज़रूरत नहीं. अगर तुम्हे क्लास का कोई भी बच्चा परेशान करे तो याद रखना की तुम्हारे पास ये काला धागा है और तुम शेर की तरह किसी से भी मुकाबला कर सकते हो”

    उनकी बात सुनकर जेरी बहुत खुश हुआ और उसे विशवास हो गया कि अब वह किसी का भी मुकाबला कर सकता है.

    अगले दिन जब जेरी स्कूल में था, तो फिर से वही क्लास के लड़के जेरी को परेशान करने लगे. तभी जेरी को याद आया कि उसके पास तो वो काला धागा है. बस फिर क्या था,

    जेरी ने पूरे हौंसले के साथ अपने दोनों हाथो की मुट्ठी बना कर उन लड़के के सामने खड़ा हो गया और कहा “मुझे छूने की हिम्मत मत करना वरना वो हाल करूँगा कि पूरी ज़िन्दगी पछताओगे.”

    जेरी ने अपना पूरा गुस्सा निकाल दिया और बहुत ज़ोर से उन लड़को को पीछे हटने के लिए कहा. जेरी को देख कर वे लड़के भी थोड़ा सेहम गए और पीछे हट गए.

    अब जेरी को क्लास में कोई तंग नहीं करता और जेरी अब ख़ुशी ख़ुशी स्कूल जाता है.

    Moral:- दोस्तों, हम सब के अंदर एक शेर होता है, बस ज़रूरत है तो उस शेर को जगाने की. जिस दिन हम अपने अंदर के डर को ख़त्म कर के उस शेर को जगा देंगे उस दिन हमें कोई परेशान नहीं कर सकता. हर माँ पिता को अपने बच्चे के दिल में छिपे डर को ख़त्म करने की कोशिश ज़रूर करनी चाहिए क्यूंकि अगर उसके अंदर डर ख़त्म होगा तभी वह स्वतंत्रता और साहस से इस ज़िन्दगी की सभी परेशानियों का सामना कर पायेगा.


    बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो True Motivational Stories in Hindi


    एक बार, अत्यंत गरीब परिवार का एक बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था| घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी |

    आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा| उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था, वह रोटी का एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं!! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे|

    वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता| सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था| आखिरकार एक व्यक्ति से रहा नहीं गया...

    और उसने उससे पूछा- की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो |

    तब उस युवक ने जवाब दिया- “भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू|”

    फिर व्यक्ति ने पूछा- “खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?”

    युवक ने जवाब दिया- “हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”,

    उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना......

    और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला- “जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर सोचते, शाही गोभी सोचते. तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता|

    तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता| सोचना ही था तो भला छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था |”

    Moral:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जैसा सोचोगे वैसा पाओगे| छोटी सोच होगी तो छोटा मिलेगा, बड़ी सोच होगी तो बड़ा मिलेगा| इसलिए जीवन में हमेशा बड़ा सोचो| बड़े सपने देखो, तो हमेशा बड़ा ही पाओगे| छोटी सोच में भी उतनी ही उर्जा और समय खपत होगी जितनी बड़ी सोच में, इसलिए जब सोचना ही है तो हमेशा बड़ा ही सोचो|


    True Motivational Stories in Hindi तितली का एक बड़ा संघर्ष


    एक बार एक आदमी को अपने बाग में टहलते हुए किसी एक टहनी में लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा और एक दिन उसने ध्यान किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है.

    उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है, पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.

    इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून को खोलकर इतना बड़ा कर दिया कि वो तितली आसानी से बाहर निकल सके और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई पर उसका शरीर सूजा हुआ था और पंख सूखे हुए थे.

    वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ वो बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.

    वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.

    Moral:- वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है| यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है.


    महात्मा जी की बिल्ली True Motivational Stories in Hindi


    एक बार एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया।

    महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच्चे को दूध-रोटी खिलाई। वह बच्चा वहीं आश्रम में रहकर पलने लगा।

    लेकिन उसके आने के बाद महात्माजी को एक समस्या उत्पन्न हो गयी कि जब वे सायं ध्यान में बैठते तो वह बच्चा कभी उनकी गोद में चढ़ जाता, कभी कन्धे या सिर पर बैठ जाता।

    तो महात्माजी ने अपने एक शिष्य को बुलाकर कहा देखो मैं जब सायं ध्यान पर बैठू, उससे पूर्व तुम इस बच्चे को दूर एक पेड़ से बॉध आया करो।

    अब तो यह नियम हो गया, महात्माजी के ध्यान पर बैठने से पूर्व वह बिल्ली का बच्चा पेड़ से बॉधा जाने लगा।

    एक दिन महात्माजी की मृत्यु हो गयी तो उनका एक प्रिय काबिल शिष्य उनकी गद्दी पर बैठा। वह भी जब ध्यान पर बैठता तो उससे पूर्व बिल्ली का बच्चा पेड़ पर बॉधा जाता।

    फिर एक दिन तो अनर्थ हो गया, बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हुयी कि बिल्ली ही खत्म हो गयी।

    सारे शिष्यों की मीटिंग हुयी, सबने विचार विमर्श किया कि बड़े महात्माजी जब तक बिल्ली पेड़ से न बॉधी जाये, तब तक ध्यान पर नहीं बैठते थे।

    अत: पास के गॉवों से कहीं से भी एक बिल्ली लायी जाये। आखिरकार काफी ढॅूढने के बाद एक बिल्ली मिली, जिसे पेड़ पर बॉधने के बाद महात्माजी ध्यान पर बैठे।

    विश्वास मानें, उसके बाद जाने कितनी बिल्लियॉ मर चुकी और न जाने कितने महात्माजी मर चुके। लेकिन आज भी जब तक पेड़ पर बिल्ली न बॉधी जाये, तब तक महात्माजी ध्यान पर नहीं बैठते हैं।

    कभी उनसे पूछो तो कहते हैं यह तो परम्परा है। हमारे पुराने सारे गुरुजी करते रहे, वे सब गलत तो नहीं हो सकते। कुछ भी हो जाये हम अपनी परम्परा नहीं छोड़ सकते।

    यह तो हुयी उन महात्माजी और उनके शिष्यों की बात। पर कहीं न कहीं हम सबने भी एक नहीं; अनेकों ऐसी बिल्लियॉ पाल रखी हैं। कभी गौर किया है इन बिल्लियों पर?

    सैकड़ों वर्षो से हम सब ऐसे ही और कुछ अनजाने तथा कुछ चन्द स्वार्थी तत्वों द्वारा निर्मित परम्पराओं के जाल में जकड़े हुए हैं।

    Moral:- ज़रुरत इस बात की है कि हम ऐसी परम्पराओं और अंधविश्वासों को अब और ना पनपने दें और अगली बार ऐसी किसी चीज पर यकीन करने से पहले सोच लें की कहीं हम जाने – अनजाने कोई अन्धविश्वास रुपी बिल्ली तो नहीं पाल रहे|


    आलस्य का त्याग करे True Motivational Stories in Hindi


    एक बड़े शहर में एक घर में तीन भाई रहते थे. यूँ तो तीनो साथ रहते थे, लेकिन तीनो को एक – दूसरे के सुख-दुःख से कोई लेना-देना नहीं था. तीनो अपनी ही दुनिया में खोये रहते थे, उन्हें किसी और की परवाह नहीं थी. अचानक एक दिन आधी रात को छोटे भाई का बच्चा जग गया और जोर-जोर से रोने लगा. उसने सिर में बहुत तेज दर्द होने की शिकायत की.

    रात काफी हो जाने के कारण दवा की सारी दुकाने बंद हो चुकी थी. घर में भी कोई दवा नहीं थी. उस बच्चे के माता-पिता दोनों ने अपने तरीके से उसे खूब बहलाने और चुप कराने का प्रयास किया पर उनका यह सारा प्रयास बेकार गया. वह अभी भी रोने में लगा था. सभी भाई बच्चे की आवाज सुनकर उठ गये लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया.



    तीनो भाइयो के घर के सामने एक झोपड़ी थी. उसमे एक अधेड़ उम्र की महिला थकी – मंदी सो रही थी. अचानक उसे बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी. परन्तु उसे भी आँखे खोलनी की इच्छा नहीं हो रही थी, लेकिन उसने सोचा अगर बच्चे को दर्द से राहत मिल जाती है तो सभी लोग चैन से सो सकेंगे. उसने तुरंत आलस्य त्याग कर बच्चे की माँ को आवाज लगाई – ठण्ड लगने के कारण बच्चा रो रहा है. यह ले जाओ काढ़ा. इसे पीते ही उसे सिर दर्द से आराम मिल जायेगा.

    बुढ़िया की आवाज सुनकर बच्चे की माँ उस बुढ़िया के पास गई और झिझकते हुए वहां से काढ़ा ले गई और अपने बच्चे को पिला दिया. काढ़ा पीने के कुछ ही पलों बाद बच्चे को दर्द से राहत मिल गई और बच्चे के साथ – साथ सभी लोग चैन से सो गये.

    Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि आलस्य त्यागकर ही किसी दूसरे की मदद की जा सकती है. यह ज़िन्दगी बहुत छोटी है हमें इसे आलस्य में नहीं गुजारना चाहिए बल्कि इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए साथ ही हमें परोपकार के गुण को भूलना नहीं चाहिए जब कभी भी परोपकार करने का मौका मिले तो हमें खुद से जो भी सहायता हो सके वह करनी चाहिए.


    True Motivational Stories in Hindi चूहा और साधु


    किसी गाँव में एक साधु रहता था| वह साधु एक मंदिर में रहता था और लोगों की सेवा करता था| भिक्षा मांगकर जो कुछ भी उसे मिलता वह उसे उन लोगों को दान कर देता जो मंदिर साफ़ करने में उसका सहयोग करते थे|

    उस मंदिर में एक चूहा भी रहता था| वह चूहा अक्सर उस साधु का रखा हुआ अन्न खा जाता था| साधु ने चूहे को कई बार भगाने की कोशिश की लेकिन वह चकमा देकर छिप जाता|

    साधु ने उस चूहे को पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन वह हरबार असफल रहता| साधु एकदिन परेशान होकर अपने एक मित्र के पास गया|



    उसके मित्र ने उसे एक योजना बताई कि चूहे ने मंदिर में अपना कहीं बिल बना रखा होगा और वह वहां अपना सारा खाना जमा करता होगा| अगर उसके बिल तक पहुंचकर सारा खाना निकाल लिया जाये तो चूहा खुद ही कमजोर होकर मर जायेगा|

    अब साधु और उसके मित्र ने जहाँ तहाँ बिल खोजना शुरू कर दिया| अंततः उनको बिल मिल ही गया जिसमें चूहे ने खूब सारा अन्न चुराकर इकठ्ठा कर रखा था| बिल खोदकर सारा अन्न बाहर निकाल दिया गया|

    अब चूहे को खाना नहीं मिला तो वह कमजोर हो गया और साधु ने अपनी छड़ी से कमजोर चूहे पर हमला किया| अब चूहा डर कर भाग खड़ा हुआ और फिर कभी मंदिर में नहीं आया|

    Moral:- अपने शत्रु को हराना है तो पहले उसकी शक्तियों पर हमला कर दो| शक्तियां खत्म तो शत्रु स्वयं कमजोर पड़ जायेगा|

     

    More Hindi Story :

       i assume that you are happy with this True Motivational Stories in Hindi, if i am right then comment bellow this article. also share with your friend and family. any kind of moral / motivational Hindi story can be best for you.  all student needs their moral development by read any kind of moral story in Hindi.