Top 100+ Moral Story in Hindi With Moral And Picture (नैतिक कहानियाँ हिंदी में)

 आज इस आर्टिकल पर मैंने आपको मोरल स्टोरीज इन हिंदी (Moral stories in Hindi) यानी की कहानियां हिंदी में बताने वाला हु जो कहानियां अपने बचपन में अपने दादाजी yeh दी से कभी ना कभी सुना होगा, यहां पर टोटल एक सौ से ज्यादा नैतिक कहानियां रहेगी जो आपको जरूर मजा देगी, यह सारे मोरल स्टोरीज इन हिंदी (Moral stories in Hindi) यानी नैतिक कहानियां हिंदी में पढ़ कर आप आपके जीवन में प्रयोग करना सीखो गे और सफलता पा सकते हो. इनमे कुछ New Moral stories in Hindi 2020 दी गयी है। जिससे आपको नयापन का अनुभव हो। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़ कर बोर हो गए है तो। यहाँ पर हम आपको सबसे अच्छी 100+ Moral stories in Hindi for youngsters दे रहे है..


    Moral stories in Hindi यानी नैतिक कहानियां हिंदी में यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं। 


    जादुई पत्थर Moral Story in Hindi 


    किसी समय की बात है, एक प्यारी सी बालिका थी पर वह बहुत ही गरीब थी। उसे भरपेट खाना भी नहीं मिलता था। एक दिन भूख से बेहाल बालिका जंगल में फल ढूँढने गई। वहाँ उसकी मुलाकात एक वृद्धा से हुई। 


    बालिका ने वृद्धा से कहा, "नमस्ते, दादी माँ!" वृद्धा ने आशीर्वाद देते हुए कहा, "नन्ही बालिका, बड़ी प्यारी हो। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?" 


    बालिका ने बताया कि वह बहुत भूखी है। वृद्धा ने एक पात्र निकाला और कहा, "नन्हे पात्र, पकाओ!" पात्र ने दलिया पकाया। कटोरा भर जाने पर वृद्धा बोली, "नन्हे पात्रा, रुक जाओ!" पात्रा ने आदेश का पालन किया और पकाना बंद कर दिया । 

    Moral Story in HindI
    Moral Story in Hindi With Moral


    बालिका ने जी भरकर दलिया खाया। जाते समय वृद्धा ने वह पात्र उसे देते हुए कहा कि इन जादुई शब्दों को सदा याद रखना। 


    बालिका ने घर आकर अपनी माँ को वह पात्र दिया और सोने चली गई। माँ ने पात्र से कहा, "नन्हे पात्रा, पकाओ!" पात्र ने दलिया पकाया। घर के सारे बर्तन दलिये से भर गए। 


    धीरे-धीरे पूरा कमरा भर गया। माँ उसे रोकने वाले जादुई शब्द नहीं जानती थी। सोकर उठने पर बालिका ने कहा, "नन्हे पात्र, रुक जाओ!" पात्र ने पकाना बंद कर दिया और फिर पूरे गाँव ने जी भरकर दलिया खाया। 


    शिक्षा : कुछ मिलने से बेहतर है कुछ बाँटना।


    Moral Story in Hindi चालाक महिला 


    एक दिन एक औरत गोल्फ खेल रही थी| जब उसने बॉल को हिट किया तो वह जंगल में चली गई| 


    जब वह बॉल को खोजने गई तो उसे एक मेंढक मिला जो जाल में फंसा हुआ था| मेंढक ने उससे कहा - "अगर तुम मुझे इससे आजाद कर दोगी तो मैं तुम्हें तीन वरदान दूँगा| 


    "महिला ने उसे आजाद कर दिया... 


    मेंढक ने कहा - "धन्यवाद, लेकिन तीन वरदानों में मेरी एक शर्त है जो भी तुम माँगोगी तुम्हारे पति को उससे दस गुना मिलेगा| 


    महिला ने कहा - "ठीक है" उसने पहला वरदान मांगा कि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बनना चाहती हूँ| 


    मेंढक ने उसे चेताया - "क्या तुम्हें पता है कि ये वरदान तुम्हारे पति को संसार का सबसे सुंदर व्यक्ति बना देगा| 


    महिला बोली - "दैट्स ओके, क्योंकि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बन जाऊँगी और वो मुझे ही देखेगा..!" 


    मेंढक ने कहा - "तथास्तु" 


    अपने दूसरे वरदान में उसने कहा कि मैं संसार की सबसे धनी महिला बनना चाहती हूँ| 


    मेंढक ने कहा - "यह तुम्हारे पति को विश्व का सबसे धनी पुरुष बना देगा और वो तुमसे दस गुना पैसे वाला होगा |" 


    महिला ने कहा - "कोई बात नहीं| मेरा सब कुछ उसका है और उसका सब कुछ मेरा !" 


    मेंढक ने कहा - "तथास्तु" 


    जब मेंढक ने अंतिम वरदान के लिये कहा तो उसने अपने लिए एक "हल्का सा हर्ट अटैक मांगा|" 


    मोरल ऑफ स्टोरीः महिलाएं बुद्धिमान होती हैं, उनसे बच के रहें ! 


    महिला पाठकों से निवेदन है आगे ना पढें, आपके लिये जोक यहीं खत्म हो गया है | यहीं रुक जाएँ और अच्छा महसूस करें ...!! 


    पुरुष पाठकः कृपया आगे पढें| 


    उसके पति को उससे "10 गुना हल्का हार्ट अटैक" आया| 


    मोरल ऑफ द स्टोरी : महिलाएं सोचती हैं वे वास्तव में बुद्धिमान हैं| 


    उन्हें ऐसा सोचने दो, क्या फर्क पडता है|



    सिंदबाद | Moral Stories in Hindi 


    सिंदबाद नामक एक बहुत ही गरीब लड़का था। धन कमाने के लिए वह नाविकों के साथ समुद्री जहाज पर चला गया। 


    एक दिन दुर्भाग्यवश समुद्र में जोरों का तूफान आया और जहाज डूब गया। सिंदबाद एक लट्ठ के सहारे बहता हुआ एक द्वीप पर जा पहुँचा। 


    उसे जोरों की भूख लगी थी। खाना ढूँढने के लिए वह एक ऊँचे खजूर के पेड़ पर चढ़ा और चारों ओर देखने लगा। दूर उसे एक बड़ा सा अंडा जैसा कुछ दिखा। 


    ज्योंही वह अंडे के पास पहुँचा एक बड़े से पक्षी ने आकर उसे अपने पंजे में पकड़ लिया और उड़ने लगा। गिरने के भय से सिंदबाद ने जोर से पक्षी का पैर पकड़ लिया और उड़ने लगा। 


    पक्षी उसे हीरों की घाटी में ले गया जिसकी कथा उसने नाविकों से सुन रखी थी। वहाँ ढेरों साँप उन हीरों की रक्षा करते थे। 


    चमकती घाटी को देखकर सिंदबाद के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। शीघ्रता से उसने अपनी जेबों में हीरे भर लिए। बड़े-बड़े साँपों को चकमा देते हुए उसने एक उड़कर जाते पक्षी का पैर जोरों से पकड़ लिया। 


    उड़ता-उड़ता वह एक द्वीप पर पहुँचा। सौभाग्यवश वहाँ उसे अपने नाविक मित्र मिल गए। उनके साथ सिंदबाद बगदाद आ गया और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा। 


    शिक्षा : मुश्किलों में ही अवसर छिपे होते हैं।


    हैमलिन का बांसुरी वाला Moral Stories in Hindi 


    जर्मनी में हैमलिन नामक एक छोटा-सा शहर था। वहाँ बहुत सारे चूहे रहते थे। वहाँ के लोग चूहों से परेशान होकर मेयर के पास गए। मेयर को चूहों से बचने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। 


    तभी बाँसुरी धरी एक व्यक्ति ने मेयर से कहा, "श्रीमान! मैं बाँसुरी बजाता हूँ। मुझे पता चला है कि चूहों ने आपके नाक में दम कर रखा है। मैं उन्हें यहाँ से ले जा सकता हूँ पर मुझे बदले में क्या मिलेगा?" 


    मेयर ने कहा, "मैं तुम्हें एक हजार सोने की अशर्पिफयाँ दूँगा । बाँसुरी वाला राजी हो गया। सड़क पर चलते-चलते उसने अपनी बाँसुरी की धुन छेड़ दी। हर दिशा से चूहे निकल-निकल कर उसके पीछे-पीछे चलने लगे। 


    बांसुरी वाला चलते-चलते उन्हें नदी के किनारे ले गया। सभी चूहे पानी में गिरकर डूब गए। 


    अब अपना पुरस्कार लेने के लिए बांसुरी वाला मेयर के पास गया। मेयर ने उसे एक हजार चाँदी के सिक्कों की थैली दी। क्रुद्ध बांसुरी वाला चुपचाप बाहर चला गया और दूसरी धुन अपनी बाँसुरी पर बजाने लगा। 


    इस बार चूहों की जगह शहर के सभी बच्चे सम्मोहित होकर उसके पीछे-पीछे चलने लगे। बांसुरी वाला उन्हें एक पहाड़ी पर ले गया और कभी दोबारा दिखाई नहीं दिया। 


    शिक्षा : बुरे काम का बुरा नतीजा होता है।


    तीन बकरे Moral Stories in Hindi 


    किसी समय की बात है… तीन बकरे थे, नन्हा बकरा, बीच वाला बकरा और बड़ा बकरा। उन्हें हरी-हरी, नरम-नरम, मीठी घास बेहद पसंद थी। एक दिन तीनों बकरों ने पास की पहाड़ी पर उगी हरी घास खाने का मन बनाया। 


    उस पहाड़ी पर जाने के लिए उन्हें पास ही बहती नदी पर बने एक लकड़ी के पुल को पार करना था। उस पुल के नीचे एक बौना राक्षस रहता था। वह पुल से गुजरने वालों को पकड़कर अपना भोजन बनाया करता था। 


    सबसे पहले नन्हा बकरा पुल पार करने लगा। उसे देखते ही बौना राक्षस चिल्लाया, "पुल के ऊपर कौन है?" मिमियाते हुए नन्हे बकरे ने कहा, 


    "मैं हूँ नन्हा बकरा… घास खाने जा रहा हूँ। मेरे दो भाई पीछे से आ रहे हैं। मोटा हो जाऊँ तब मुझे खा लेना।" 


    राक्षस ने उसे जाने दिया और दोनों बकरों की प्रतीक्षा करने लगा। उसने बीच वाले बकरे को भी जाने दिया। जब बड़ा बकरा जाने लगा तब बौना राक्षस उसे पकड़ने दौड़ा। 


    बड़ा बकरा सावधन था। उसके सींग बहुत बड़े, मजबूत और नुकीले थे। अपना सिर झुकाकर अपने सींग वह बौने राक्षस के पेट के पास ले गया और उसे जोर से ध्क्का मारा। बौना राक्षस नीचे बहती हुई नदी में गिरकर बह गया। 


    शिक्षा : लालची लोग अपना ही नुकसान करते हैं।


    नटखट खरगोश Moral Stories in Hindi 


    बहुत पुरानी बात है… एक बड़े से पेड़ के नीचे एक मादा खरगोश अपने चार बच्चों के साथ रहती थी। एक दिन मादा खरगोश खाना पकाने के लिए सामान लाने बाजार जा रही थी। 


    उसने अपने बच्चों को बुलाकर कहा, "तुम लोग बाहर खेलने जा सकते हो पर श्रीमान् गुस्सैल के बगीचे की ओर भूल से भी मत जाना।" चीकू, टीटू, और मीटू, माँ की बात मानकर उछलते कूदते पास की बेरी के पास जाकर बेर चुनने लगे। 


    नटखट पीटू ने दौड़ लगाई और सीधा श्रीमान् गुस्सैल के फाटक के नीचे से उनके बगीचे में घुस गया। वहाँ उसने जी भरकर सलाद के पत्ते, बींस और नरम-नरम मूली का मजा लिया। 


    श्रीमान् गुस्सैल पत्तागोभी बो रहे थे। अचानक उनकी दृष्टि पीटू पर पड़ी। वह दिल्ली, "चोर-चोर, रुक! भागता कहाँ है?" 


    पीटू घबराकर इधर-उधर भागने लगा। उसका जूता आलू की क्यारी में छूट गया पर वह बचता-बचाता खिड़की से कूदकर, फाटक के नीचे से निकलकर अपने घर वापस आ गया। 


    माँ बाजार से लौट आई थी। उसने चीकू, टीटू और मीटू को रोटी-दूध और बेर खाने को दिया पर पीटू को बिना कुछ खिलाए सोने भेज दिया। माँ ने बिना कुछ कहे उसे उसकी शरारत की सजा दे दी थी। 


    शिक्षा : लालच से बड़ा कोई रोग नहीं है।


    सोने के अण्डे वाला हंस Moral Story in Hindi 


    एक दिन एक किसान ने देखा कि उसके नए हंस ने एक सुनहरे रंग का अंडा दिया है। 


    वह अंडा बहुत चमक रहा था। किसान ने अंडा उठा लिया। वह बहुत भारी भी था। 


    उसे लगा कि किसी ने उसके साथ भद्दा मजाक किया है। फिर वह अंडे को लेकर अपनी पत्नी के पास गया। 


    पत्नी अंडे को देखकर आश्चर्यचकित होती हुई बोली, "अरे, यह तो सोने का अंडा है, तुम्हें कहाँ से मिला?" 


    प्रतिदिन सुबह अब किसान को एक सुनहरा अंडा मिलने लगा। अंडे बेचकर शीघ्र ही किसान दम्पत्ति धनवान हो गए। 


    धन के साथ-साथ लालच ने भी आ घेरा। 


    एक दिन उसकी पत्नी ने कहा, "क्यों न हम हंस को मार दें हमें सारे अण्डे एक दिन में मिल जाएंगे। 


    हम बहुत अमीर हो जाएंगे" किसान को पत्नी की बात सही लगी। उन्होंने हंस को मार डाला पर उन्हे अण्डे मिले ही नहीं। बेचारे हंस को भी मार डाला और कुछ हाथ भी न लगा। अब उनके पास पछताने के अलावा कोई चारा न था। 


    शिक्षा : लालच बुरी बला है।


    मानव और सर्प Moral Story in Hindi 


    एक बार दुर्भाग्यवश एक किसान के बेटे का पाँव एक सर्प की पूँछ पर पड़ गया। पूँछ दबने से सर्प क्रोधित हो उठा और उसने बालक को काट लिया। सर्प विषैला था बालक की तत्काल मृत्यु हो गई। 


    क्रोधित किसान ने अपनी कुल्हाड़ी उठाई और साँप से बदला लेने के लिए उसकी पूँछ काट दी। साँप दर्द से कराह उठा। अब उसने भी बदला लेने की ठानी और जाकर किसान के मवेशियों को काट लिया। 


    भारी नुकसान हुआ। किसान ने विचारा, "बहुत नुकसान हो चुका… वैर से क्या लाभ? सर्प से मित्रता कर लेनी चाहिए। " 


    " एक प्याली में शहद डालकर किसान ने सर्प के बिल के पास जाकर कहा, "हम लोगों को एक दूसरे को क्षमा करके सारी बातें भूल जानी चाहिए… हम लोग क्या मित्र नहीं बन सकते?" 


    सर्प ने कहा, "नहीं, यह संभव नहीं है… तुम्हारा उपहार तुम्हें मुबारक हो। तुमने अपने पुत्र को खोया है जिसे तुम कभी नहीं भुला सकते हो और न ही मैं अपनी पूँछ का दुःख भुला सकता हूँ। 


    शिक्षा : अपकार क्षमा किया जा सकता है पर भूला नहीं जा सकता।


    महाकंजूस Moral Story in Hindi 


    एक समय की बात है… एक महाकंजूस था। अपना एक पैसा भी खर्च नहीं करता था। उसके पास काफी सोना था। 


    उसे वह अपने बगीचे में, एक पेड़ के नीचे खोदकर, छिपा दिया करता था। प्रत्येक सप्ताह वह वहाँ जाता, 


    पेड़ के नीचे खोदकर अपना थैला निकालता, सिक्के गिनता और पुनः उसे वापस गाड़ दिया करता था। 


    एक डाकू ने उसे ऐसा करते देख लिया। अवसर देखकर उसने जमीन को खोदा और सारा धन निकालकर गायब हो गया। 


    अगली बार कंजूस जब अपना धन देखने आया तो उसे वहाँ कुछ नहीं मिला। थैले की जगह मात्र गड्ढा था। परेशान होकर वह अपने बाल नोचने लगा और चीखने-चिल्लाने लगा। 


    शोर सुनकर पड़ोसी इकट्ठे हो गए। सबके पूछने पर उसने बताया कि उसने कभी भी कुछ खर्च नहीं किया। बस सोने को देखकर ही प्रसन्न हुआ करता था। 


    पड़ोसियों ने कहा, "तुम्हारे लिए सोने का क्या काम-वह तो मिट्टी में दबा था। आगे से आकर बस इसी गड्ढे को देख लिया करना।" 


    शिक्षा : जिस धन का सदुपयोग न हो वह व्यर्थ है।


    सेविका और भेड़िया Moral Story in Hindi 


    एक सेविका एक छोटे बच्चे को अपनी गोद में सुला रही थी। काफी देर हो गई, बच्चा सोने की जगह रोने लगा। 


    सेविका ने परेशान होते हुए कहा, चुप हो जाओ! अधिक शोर किया तो तुम्हें भेड़िए के सामने डाल दूँगी।" 


    एक भेड़िया उसी समय उधर से जा रहा था। उसने सेविका की सारी 


    बातें सुन ली। वह एक किनारे दुबककर बैठ गया और चुपचाप प्रतीक्षा करने लगा। 


    भेड़िए ने सोचा, "कितना भाग्यशाली हूँ मै… बच्चा रोएगा… तो सेविका उसे मेरे पास डाल देगी और मैं उसे खा लूँगा।" 


    भेड़िया बच्चे के रोने की आशा में वहीं बैठा रहा। काफी देर हो गई। जब 


    कोई आवाज नहीं आई तो उसने उठकर खिड़की के भीतर झाँका। 


    सेविका ने भेड़िए को देख लिया और आकर झट से खिड़की बंद कर दी। 


    वह ज़ोर से चिल्लाने लगी और लोगों को सहायता के लिए बुलाने लगी। यह सब देखकर भेड़िया घबराकर वहाँ से भाग गया। 


    शिक्षा : शत्रु द्वारा दी गयी आशा पर विश्वास नहीं करना चाहिए। 


    कंजूस और धन Moral Story in Hindi 


    एक समय की बात है… एक महाकंजूस था। अपना एक पैसा भी खर्च नहीं करता था। उसके पास काफी सोना था। 


    उसे वह अपने बगीचे में, एक पेड़ के नीचे खोदकर, छिपा दिया करता था। प्रत्येक सप्ताह वह वहाँ जाता, 


    पेड़ के नीचे खोदकर अपना थैला निकालता, सिक्के गिनता और पुनः उसे वापस गाड़ दिया करता था। 


    एक डाकू ने उसे ऐसा करते देख लिया। अवसर देखकर उसने जमीन को खोदा और सारा धन निकालकर गायब हो गया। 


    अगली बार कंजूस जब अपना धन देखने आया तो उसे वहाँ कुछ नहीं मिला। थैले की जगह मात्र गड्ढा था। परेशान होकर वह अपने बाल नोचने लगा और चीखने-चिल्लाने लगा। 


    शोर सुनकर पड़ोसी इकट्ठे हो गए। सबके पूछने पर उसने बताया कि उसने कभी भी कुछ खर्च नहीं किया। बस सोने को देखकर ही प्रसन्न हुआ करता था। 


    पड़ोसियों ने कहा, "तुम्हारे लिए सोने का क्या काम-वह तो मिट्टी में दबा था। आगे से आकर बस इसी गड्ढे को देख लिया करना।" 


    शिक्षा : जिस धन का सदुपयोग न हो वह व्यर्थ है।


    ग्वालिन और उसका मटका Moral Story in Hindi 


    एक समय की बात है… एक ग्वालिन सिर पर दूध का मटका रखे, दूध बेचने बाजार जा रही थी। रास्ते में चलते-चलते उसके मन में कुछ ख्याल आया। दूध बेचने से मिलने वाले पैसे का वह मन ही मन हिसाब लगाने लगी। 


    उसने सोचा, "मैं दूध बेचने से मिले पैसों से कुछ मुर्गियाँ खरीदूँगी। 


    समय के अंतराल में मुर्गियाँ अंडे देंगी और मैं उन्हें फिर बेच दूँगी। अंडे बेचने से जो पैसे मिलेंगे उनसे मैं अपने लिए एक सुंदर सा लहंगा और चोली खरीदूंगी। उसे पहनकर मैं बाजार जाऊँगी"। 


    "वह और सपने बुनने लगी, एक युवक मुझे देखकर मेरे पास आएगा और मुझसे बात करने की कोशिश करेगा । तब मैं भी अपनी शान दिखाऊँगी और जोर से अपना चेहरा दूसरी ओर फेर लूँगी… 


    ऐसा सोचते हुए उसने अपना चेहरा एक झटके से पीछे घुमा लिया। सिर पर रखा दूध का मटका झटका खाकर नीचे गिर कर फूट गया और सारा दूध बिखर गया। ग्वालिन के पास दुखी होने के अलावा कुछ नही था। 


    Moral : कोई भी कार्य ध्यान से करना चाहिए। 


    नीच का न्याय Moral Stories in Hindi 


    एक जंगल के जिस वृक्ष पर मैं रहता था, उसके नीचे के तने में एक खोखल में किंजल नाम का एक चटक (तीतर) भी रहता था। एक दिन कपिजल अपने साथियों के साथ बहुत दूर के खेत में धान की नई-नई कोपलें खाने चला गया। 


    बहुत रात बीतने पर भी जब वह वापस न लौटा तो मुझे चिंता होने लगी। इसी बीच शीघ्रगति नाम का एक खरगोश वहां आया और कपिंजल के खाली स्थान को देखकर उसमें घुस गया। दूसरे दिन कपिंजल अचानक वापस लौट आया। 


    अपने खोखल में आने पर उसने देखा कि वहां एक खरगोश बैठा हुआ है उसने खरगोश से अपनी जगह खाली करने को कहा। खरगोश भी तीखे स्वभाव का या, दोला'यह घर अद तेरा नहीं हैं। 


    वापी, कृप, तालाब और वृक्षों पर बने घरों का यही नियम है कि जो भी उनमें बसेरा कर ले, वह घर उसका हो जाता है। घर का स्वामित्व केवल मनुष्यों के लिए होता है। पक्षियों के लिए गृह-स्वामित्व का कोई विधान नहीं है।' 


    उनकी बातचीत को एक जंगली बिल्ली सुन रही थी उसने सोचा-मैं ही। पंच बन जाऊं तो कितना अच्छा है, दोनों को मारकर खाने का अवसर मिल जाएगा" यही सोच, हाय में माला लेकर, 


    सूर्य की ओर मुख करके वह नदी किनारे कुशासन बिछाकर, आंख मूंदकर बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी। उसके उपदेशों को सुनकर खरगोश ने कहा-'यह देखो। कोई तपस्वी बैठा है। 


    क्यों न इसी तीतर बिल्ली को देखकर डर गया, दूर से ही बोला—'मुनिवर ! आप हमारे झगड़े का निबटारा कर दें। जिसका पक्ष धर्मविरुद्ध हो, उसे तुम खा लेना। यह सुनकर बिल्ली ने आंखें खोली और कहा-'राम-राम। ऐसा न कहो। 


    मैंने हिंसा का मार्ग छोड़ दिया है। अतः मैं हिंसा नहीं करूंगी। हां, तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है। किंतु, मैं वृद्ध हूं, दूर से तुम्हारी बातें नहीं सुन सकती, पास आकर अपनी बात कहो।' 


    बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके निकट जा पहुंचे। उचित अवसर पाकर बिल्ली ने दोनों को ही दबोच लिया और मारकर खा गई। 


    इसी को पंच बनाकर पूछ लें ?' कौए की बात सुनकर सभी पक्षी उल्लू को राजमुकुट पहनाए बिना वहां से चले गए। केवल अभिषेक की प्रतीक्षा करता हुआ उल्लू, उसकी मित्र कृकालिका और कौआ वहीं रह गए।


    चूहा और बिल्ली Moral Stories in Hindi 


    बिल्ली दिनभर चूहों को मारती और उन्हें खा जाती। इस तरह मालिक तो खुश था ही, उसके दिन भी खूब मौज-मस्ती में बीत रहे थे। लेकिन घर में बिल्ली के आने से चूहे काफी परेशान थे। 


    पर चूहे बिल्ली की चाल समझ गए और बिल में ही छिपे रहे। शाम को एक चूहा बाहर निकलकर बोला, "बिल्ली मौसी! हम जानते हैं कि तुम नाटक कर रही हो इसलिए हम तुम्हारे पास नहीं आएंगे।" मायूस होकर बिल्ली स्वयं ही वहाँ से उठ गई।


    मूर्ख ज्योतिषी Moral Stories in Hindi 


    एक शहर में एक ज्योतिषी रहता था। वह हर समय आकाश में स्थित ग्रह-नक्षत्रों की चाल देखता रहता था और फिर उनकी गणना में उलझा रहता। 


    एक अंधेरी रात में वह आकाश की ओर देखता हुआ चल रहा था कि अचानक उसका पैर फिसला और वह एक कुएँ में जा गिरा। कुआँ सूखा हुआ था और ज्यादा गहरा भी नहीं था। 


    उसके अंदर से वह लोगों से मदद के लिए गुहार लगाने लगा, "बचाओ, बचाओ ! मैं कुएँ में गिर गया हूँ। कोई तो मुझे बाहर निकालो।" एक राहगीर उसकी आवाज सुनकर रुका। 


    वह कुएँ के पास गया और उसमें झाँककर देखा तो वहाँ ज्योतिषी गिरा हुआ था। उसने ज्योतिषी से कहा,"अरे! ज्योतिषी महाराज, 


    आप तो सब लोगों की ग्रह-दशा बताते हैं। फिर क्या कारण है कि आप अपना भविष्य नहीं देख पाए और चलते-चलते कुएँ में गिर पड़े?" यह कहकर वह हँसता हुआ आगे चला गया। 


    ठग और ब्राह्मण Top 100 Moral Stories In Hindi With Picture 


    किसी स्थान पर मित्र शर्मा नाम का एक कर्मकांडी ब्राह्मण रहता था। एक दिन दूर के एक गांव में जाकर वह अपने यजमान से बोला-'यजमान जी ! मैं अगली अमावस्या के दिन यज्ञ कर रहा हूँ । 


    उसके लिए कोई हट-पुष्ट पशु दे दो। यजमान ने उसे एक मोटा-ताजा बकरी का बच्चा दे दिया। रास्ते में बकरी का बच्चा ब्राह्मण को कुछ परेशान करने लगा तो उसने उसे कंधे पर लाद लिया। 


    आगे चलकर रास्ते में उसे तीन घूर्त मिले। तीनों भूख से व्याकुल थे। वे सोचने लगे कि क्यों न इस ब्राह्मण से यह बकरी का बच्चा हथियाकर आज इसी से अपनी भूख मिटाई जाए। 


    यह विचार आते ही उनमें से एक धूर्त वेश बदलकर किसी अन्य मार्ग से आग जाकर ब्राह्मण के रास्ते में बैठ गया। जब ब्राह्मण वहां से गुजरने लगा तो उस घूर्त ने उससे कहा-'पंडित जी, यह क्या अनर्थ कर रहे हो ? 


    ब्राह्मण होकर एक कुत्ते को कंधे पर बिठाए ले जा रहे हो।' ब्राह्मण बोला-'अंधे हो क्या, जो बकरे को कुत्ता बता रहे हो?' 'मुझ पर क्रोध क्यों करते हो, विप्रवर। यह कुत्ता नहीं बकरा है तो ले जाइए अपने कंधे पर। 


    मुझे क्या ? मैंने तो ब्राह्मण जानकर आपका धर्म भ्रष्ट न हो जाए, इसलिए बता दिया। अब आप जाने और आपका काम ।' कुछ दूर जाने पर ब्राह्मण को दूसरा धूर्त मिल गया। 


    वह ब्राह्मण से बोला-'ब्राह्मण देवता, ऐसा अनर्थ किसलिए? इस मरे हुए बछड़े को कंधे पर लादकर ले जाने की क्या आवश्यकता पड़ गई ? मृत पशु को छूना तो शास्त्रों में भी निषेध माना गया है। 


    उसको छूने के बाद तो किसी पवित्र सरोवर अथवा नदी में जाकर स्नान करना पड़ता है।' ब्राह्मण कुछ और आगे पहुंचा तो तीसरा धूर्त सामने आ गया। 


    बोला-'अरे महाराज! यह तो बहुत अनुचित कार्य आप कर रहे हैं कि एक गधे को कंधे पर रखकर ढो रहे हैं। इससे पहले कि कोई और आपको देख ले, उतार दीजिए इसे कंधों से।' 


    तीन स्थानों पर, तीन व्यक्तियों के द्वारा बकरे के लिए अलग नामों के सम्बोधन सुन ब्राह्मण को भी संशय हो गया कि यह बकरा नहीं है। 


    उसने बकरे को भूमि पर पटक दिया और अपना पल्ला झाड़कर अपने रास्ते पर चला गया। उसके जाने के बाद तीनों धूर्त वहां इकट्ठे हुए और बकरी के बच्चे को उठाकर चले गए।


    टूटा सींग Top 100+ Moral Stories in Hindi with Video 


    एक दिन शाम को चारागाह से घर लौटने के लिए चरवाहे ने अपनी बकरियों को आवाज लगाकर इकट्ठा किया। सभी बकरियाँ लौट आईं, बस एक बकरी चरवाहे की आवाज को अनसुना करके मस्ती से घास चरती रही। 


    यह देखकर उसे बहुत गुस्सा आया और उसने गुस्से में एक पत्थर उठाकर बकरी पर दे मारा। पत्थर बकरी के सींग पर लगा और सींग टूट गया। यह देखकर चरवाहा बुरी तरह डर गया और बकरी के आगे गिड़गिड़ाने लगा, 


    "मेरी अच्छी बकरी! तुम मालिक को मत बताना कि मैंने पत्थर मारकर तुम्हारा सींग तोड़ा है। वरना वह मुझे नौकरी से निकाल देगा।" बकरी बोली, "ठीक है, मैं मालिक से कुछ नहीं कहूंगी।" पर वह मन ही मन सोच रही थी, 


    'मैं मालिक से इसकी शिकायत नहीं करूंगी, पर भला टूटा सींग कैसे छिपा सकती हूँ। वह तो दिखेगा ही।' चरवाहा जब बकरियाँ लेकर घर पहुचा तो बकरी का टूटा सींग मालिक की नजर में पड़ गया और गुस्से में आकर उसने चरवाहे को तुरंत नौकरी से निकाल दिया। 


    स्वार्थी बकरी Moral Stories in Hindi with Goat 


    एक दिन एक बैल के पीछे एक शेर पड़ गया। काफी देर तक बैल भागता रहा और अंतत: उसे एक गुफा दिखाई दी। वह झट से गुफा में घुस गया। गुफा में एक बकरी रहती थी। 


    उसने बैल को गुफा से बाहर निकलने का आदेश दिया और सींगों से उसे बाहर की ओर धकेलने लगी। बैल बोला, "एक शेर मेरा पीछा कर रहा है और मैंने उससे बचने के लिए यहाँ शरण ली है। 


    जैसे ही वह निकल जाएगा, मैं भी यहाँ से चला जाऊंगा।" बकरी ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे सींग मारते हुए बोली, "मैं कुछ नहीं जानती, बस तुम यहाँ से निकल जाओ।" 


    बैल जब बकरी को समझाते-समझाते थक गया तो बोला, "मैं तुम्हारी बदतमीजी सहन कर रहा हूँ तो यह मत समझना कि मैं तुमसे डरता हूँ। इस शेर को यहाँ से निकल जाने दो, उसके बाद तुम्हें बताऊंगा कि मैं कितना बड़ा और ताकतवर हूँ।" 


    हरा सोना Top Moral Stories In Hindi With Picture 


    निशा एक गरीब लड़की थी। वह भीख माँगकर अपना गुजारा करती थी। एक दिन एक औरत ने उसे भीख के बदले फूलों के कुछ पौधे एवं बीज देते हुए कहा, 


    "तुम इन पौधों और बीजों को घर के आँगन में बोना तो तुम्हें कभी भीख नहीं माँगनी पड़ेगी।" निशा की समझ में कुछ नहीं आया, लेकिन उसने औरत के कथनानुसार उन पौधों एवं बीजों को अपने घर के आँगन में बो दिया। 


    साथ ही उसने उन पौधों की अच्छी तरह देखभाल शुरू कर दी। वह प्रतिदिन उन्हें पानी देती। कुछ हफ्ते बाद उसके घर के चारों ओर सुंदर-सुंदर फूल खिल गए। 


    एक दिन एक महिला ने उन फूलों को देखा और वह उन्हें खरीदने के लिए निशा के पास आई। निशा ने कुछ फूल तोड़े और उस महिला को बेच दिए। अब निशा घर-घर जाकर भी फूल बेचने लगी। 


    इस तरह उसका जीवन सुधरने लगा और उसने भीख माँगना छोड़ दिया। जल्दी ही कुछ लोग उसके नियमित ग्राहक बन गए। उसने कुछ पैसे बचाकर बाजार में फूलों की एक छोटी-सी दुकान खोली। 


    वहाँ पर काफी सारे लोग फूल खरीदने के लिए आते थे। निशा अपनी तरक्की के लिए उस दयालु औरत का मन-ही-मन धन्यवाद कर रही थी जिसने उसे हरा सोना दिया था।


    बारहसिंगा की भूल Best Moral Stories in Hindi 


    एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। उसे अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत घमंड था। जब भी वह पानी पीते हुए नदी में अपनी परछाई देखता तो सोचता, 'मेरे सींग कितने सुंदर हैं, पर मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं।'। 


    एक दिन उस जंगल में कुछ शिकारी आए। उन्होंने जब सुंदर सींगों वाले बारहसिंघा को देखा तो वे उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़े। बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ता हुआ शिकारियों से काफी दूर निकल गया। 


    तभी अचानक उसके सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरसक कोशिश कर रहा था, पर सींग थे कि निकल ही नहीं रहे थे। उधर शिकारी लगातार पास आते जा रहे थे। 


    बड़ी मुश्किल से उसने सींग छुड़ाए और वहाँ से जान बचाकर भागा। सुरक्षित स्थान पर पहुँचकर वह सोचने लगा, 'मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूँ। जिन सींगों की सुंदरता पर मैं इतना घमंड करता था, 


    आज उनकी वजह से मैं भारी संकट में फँस गया था और जिन टांगों को मैं बदसूरत कहकर कोसा करता था उन्हीं टांगों ने आज मेरी जान बचाई है। 


    आदमी और शेर Top Moral Stories in Hindi with Lion 


    एक आदमी और एक शेर में गहरी दोस्ती थी। वे प्राय: हर रोज मिलते और साथ ही घूमते-फिरते। एक दिन वे दोनों गपशप करते हुए एक नगर में जा पहुंचे। 


    वहाँ उन्होंने एक मूर्ति देखी, जिसमें आदमी ने शेर को दबोचा हुआ था। उसे देखकर दोनों इस बात पर चर्चा करने लगे कि आदमी और शेर में कौन ज्यादा ताकतवर है? 


    शेर कह रहा था कि वह ज्यादा ताकतवर है और आदमी अपने को ज्यादा ताकतवर बता रहा था। आदमी ने मूर्ति की ओर इशारा करके कहा, "देखो! 


    उस मूर्ति से भी यही सिद्ध होता है कि आदमी ज्यादा ताकतवर है।" यह सुनकर शेर मुस्कुराकर बोला, "यदि शेर मूर्ति बनाना जानते तो आदमी शेर के पंजों के नीचे होता।"


    कोयल और चिड़िया Moral Stories in Hindi with Birds 


    एक खेत के किनारे एक विशाल वृक्ष था। उसकी एक शाखा पर एक कोयल ने अपना घोंसला बनाया हुआ था। वहाँ पर उसे और उसके बच्चों को आँधी बरसात और सर्दी-गर्मी झेलनी पड़ती थी। 


    एक छोटी चिड़िया उसे मौसम की मार सहते देखती तो उसे उस पर बड़ी दया आती। एक दिन छोटी चिड़िया उससे बोली,"बहन! मैं हमेशा तुम्हें मौसम की मार झेलते हुए देखती हूँ और मुझे तुम पर बड़ी दया आती है। 


    मैं तो आराम से लोगों के घरों के अंदर अपना घोंसला बनाकर रहती हूँ। वहाँ पर मुझे सर्दी-गर्मी और बरसात आदि की मार नहीं झेलनी पड़ती। 


    तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए।" इस पर कोयल बोली, "यदि मैंने लोगों के घरों में अपना घोंसला बनाया तो लोग मुझे और मेरे बच्चों को मारकर खा जायेंगे। मैं कभी भी वहाँ पर रहने के बारे में नहीं सोच सकती।" 


    समझदार जुलाहा Top 10 Moral Stories in Hindi 


    एक जुलाहा था। एक कोयले का व्यापारी उसके पड़ोस में ही रहता था। जुलाहा अपनी छोटी-सी झोपड़ी में रहकर कपड़ा बुनता था। जबकि कोयले का व्यापारी नजदीक ही एक काफी बड़े कमरे में रहकर कोयले का व्यापार करता था। 


    एक दिन कोयले के व्यापारी ने जुलाहे से कहा, "तुम इतने छोटे-से कमरे में रहते हो। चाहो तो मेरे कमरे में आकर रह सकते हो। तुम्हें मुझे किराया भी नहीं देना पड़ेगा और रहने को अच्छी व खुली जगह भी मिल जाएगी।" 


    जुलाहे ने बड़ी नम्रता से कहा,"श्रीमान्! आपने मेरी मदद करनी चाही, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! पर मैं आपके साथ नहीं रह सकता, 


    क्योंकि हम दोनों का काम बिल्कुल अलग है। आपके कमरे में मेरी रूई और कपड़े कोयले के कालेपन से मैले हो जाएंगे, इसलिए मैं अपनी झोंपड़ी में ही खुश हूँ।"


    बंदर राजा Moral Stories in Hindi with Picture 


    एक बार जंगल में राजा चुने जाने के लिए चुनाव हुए। चुनाव के लिए सभी जानवरों ने अपनी-अपनी प्रतिभा दिखाई और अंत में बंदर का नाच सब जानवरों को पसंद आया। 


    अब सबने एकमत से फैसला करके बंदर को ही अपना राजा घोषित कर दिया। लेकिन लोमड़ी को बंदर का राजा बनना अच्छा नहीं लगा, इसलिए वह उसे नीचा दिखाने के लिए मौका तलाशने लगी। 


    एक दिन उसे यह मौका मिल ही गया। उसने जंगल में किसी शिकारी द्वारा छोड़ा गया फंदा देखा। गोल किए हुए फंदे में थोड़ी-सी खाने की वस्तुएँ रखी थीं। 


    लोमड़ी बंदर से बोली, "राजन्! मैंने आपको भेंट करने के लिए कुछ खाने की चीजें रखी हैं।आप इन्हें खाएंगे तो मुझे खुशी होगी।" बंदर ने जैसे ही खाने की चीजें देखीं, वह तुरंत उनकी ओर झपटा और फंदे में फँस गया। 


    लोमड़ी ने सभी जानवरों को बुलाकर फंदे में फँसा बंदर दिखाते हुए कहा, "यह बंदर जब अपनी रक्षा नहीं कर सकता तो हमारी रक्षा कैसे करेगा? यह राजा बनने के योग्य नहीं है।" 


    कंटीली झड़बेरी Top 100 Moral Stories in Hindi with Fox 


    एक लोमड़ी ने एक खेत में पके हुए सीताफल देखे। उसने खेत के चारों ओर चक्कर लगाकर घुसने का रास्ता खोजा, परंतु इसके चारों ओर बाड़ लगी हुई थी। इसलिए अंदर जाने के लिए उसे बाड़ को लांघना था। 


    वह जैसे ही उसे लांघने लगी, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह झड़बेरी के काँटेदार पौधों में जा गिरी। उसके हाथ-पैरों से खून निकलने लगा। वह गुस्से से झड़बेरी के पौधों पर चिल्लाने लगी, "देखो! यह तुमने क्या किया है। 


    तुम्हारे काँटे चुभने के कारण मेरे हाथ-पैरों से खून निकलने लगा है और मैं दर्द से छटपटा रही हूँ।" झड़बेरी के पौधे बोले,"तुम अकेली हो जो हमारी वजह से घायल हुई हो। 


    सभी लोग जानते हैं कि झड़बेरी काँटेदार पौधा होता है। इसलिए अपनी लापरवाही का आरोप हम पर मत लगाओ।हमारी इसमें कोई गलती नहीं है।" 


    शिक्षा: लापरवाही से ही दुर्घटना होती है।


    कौआ और लोमड़ी Moral Story in Hindi 


    एक समय की बातहै… एक लोमड़ी ने एक कौए को अपनी चोंच में रोटी का एक टुकड़ा लेकर जाते देखा। 


    रोटी देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया। वह रोटी की चाह में कौए के पीछे गई और कौए से रोटी झपटने का 


    उपाय सोचने लगी। कौआ रोटी लेकर पेड़ की एक टहनी पर बैठ गया। 


    लोमड़ी पेड़ के नीचे पहुंची। चापलूसी के अंदाज में उसने कौए से कहा, "राम – राम कौए भाई , आज क्या बात है… 


    बड़े अच्छे लग रहे हो… आँखों में नूर है, पंखों में गजब की चमक है… तुम तो पक्षियों के राजा हो… मेरे लिए गाना नहीं गाओगे… ?" 


    कौआ अपनी प्रशंसा सुनकर प्रसन्न हो गया। वह फूला नहीं समा रहा था। इतराकर गाने के लिए ज्योंही उसने अपनी चोंच खोली.. 


    रोटी का टुकड़ा जमीन पर गिर पड़ा। चालाक लोमड़ी ने उसे झट से उठा लिया और नौ दो ग्यारह हो गई। 


    Moral : चापलूसों से सावधान रहना चाहिए। 


    अलीबाबा और खजाना Moral Stories in Hindi 


    पर्शिया में अलीबाबा और कासिम नामक दो भाई रहते थे। कासिम एक धनवान सौदागर था पर अलीबाबा एक गरीब लकड़हारा था। 


    एक दिन अलीबाबा जंगल में लकड़ी काटने गया हुआ था। वहाँ उसने चालीस लुटेरों को घोड़े पर सवार आते देखा। एक गुफा के सामने उनका नेता घोड़े से उतरा और बोला, 


    "खुल जा सिमसिम!" गुफा का दरवाजा खुल गया और लुटेरे भीतर चले गए। थोड़ी देर बाद वे बाहर आए। उनके नेता ने फिर कहा, 


    "बंद हो जा सिम!" और गुफा का दरवाजा बंद हो गया। उनके जाने के बाद अलीबाबा उसी तरह बोलकर गुफा में चला गया। 


    वहाँ उसने ढेर सारे सोने, जवाहरात, अशर्पिफयाँ और तरह की बहुमूल्य वस्तुएँ देखीं। जितना भर सकता था अपने थैले में भरकर, गधे की पीठ पर लादा और घर आ गया। 


    अलीबाबा ने अपने भाई कासिम को जाकर सारी बातें बताईं। कासिम उन जादुई शब्दों को याद करता हुआ गुफा के पास जाकर बोला, "खुल जा सिमसिम!" गुफा का दरवाजा खुला, कासिम भीतर गया और दरवाजा बंद हो गया। 


    अपार संपत्ति देखकर वह अपने सुध-बुध खो बैठा। थैले भरे पर जादुई शब्द वह भूल गया। वह वहीं बंद रहा और लुटेरों के आने पर वह मारा गया। 


    MORAL : सोच समझ कर कार्य करना चाहिए।


    एक शेर और चार बैल Moral Story in Hindi 


    एक शेर था। उसकी गुफा के पास में ही एक खेत था। खेत में चरने आने वाले जानवरों को वह घात लगाकर पकड़ता और उन्हें अपना भोजन बनाता था। 


    चार बैलों में बड़ी गहरी मित्रता थी। एक बार वे चारों बैल उसी खेत में चरने आए। वे चारों सदा साथ-साथ रहते थे। कई बार शेर ने उन पर हमला कर उन्हें पकड़ना चाहा पर पकड़ न पाया। 


    जब भी शेर उन्हें पकड़ने आता, चारों बैल एक साथ मिलकर अपने सींगों से उस पर हमला कर देते थे। पर शेर ने हार नहीं मानी। 


    वह अवसर की तलाश में रहने लगा। एक दिन उसे अवसर मिल ही गया। किसी बात पर उन चारों बैलों में एक दिन लड़ाई हो गई। 


    चारों खेत के अलग – अलग कोनों में जाकर चरने लगे। शेर ने अवसर देखकर उन पर हमला कर दिया और एक कर उन्हें मार दिया। 


    Moral : आपसी फूट विनाश का कारण बनती है। 


    मछुआरा और नन्ही मछली Moral Story in Hindi 


    एक मछुआरे को बहुत भूख लगी थी। दिनभर नदी किनारे बैठकर मछली पकड़ता रहा पर उसे मछली नहीं मिली। 


    हाँ, शाम के समय एक छोटी मछली अवश्य हाथ लगी। मछुआरे ने उसी से संतोष करना चाहा, पर मछली बोली, 


    "मुझ पर दया करो, मैं अभी बहुत छोटी हूँ। मुझे खाकर तुम्हारा पेट नहीं भरेगा। 


    जल में जाकर मैं शीघ्र ही बड़ी हो जाऊँगी तब तुम मुझे खा लेना।" मछुआरे ने कहा, 


    "बड़ी कठिनाई से तू मेरे हाथ लगी है। बाद का पता नहीं, मैं तो तुझे अभी ही खाऊँगा।" 


    Moral : बड़े वादे से छोटा लाभ ही भला है। 


    हंस और मूर्ख कछुआ Moral Stories in Hindi 


    एक बार की बात है। एक कछुआ और दो हंस आपस में बहुत अच्छे मित्र थे। एक साल बारिश बिलकुल नहीं हुई और जिस तालाब में वे रहते थे, वह सूख गया। 


    कछुए ने एक योजना बनाई और हंसों से बोला, "एक लकड़ी लाओ। मैं उसे बीच में दाँतों से दबा लूँगा और तुम लोग उसके किनारे अपनी चोंच में दबाकर उड़ जाना और फिर हम तीनों किसी दूसरे तालाब में चले चलेंगे।" हंस मान गए। 


    उन्होंने कछुए को चेतावनी दी, "तुम्हें पूरे समय अपना मुँह बंद रखना होगा। वरना तुम सीधे धरती पर आ गिरोगे और मर जाओगे।" 


    कछुआ तुरंत मान गया। जब सब कुछ तैयार हो गया तो हंस कछुए को लेकर उड़ चले। रास्ते में कुछ लोगों की नजर हंस और कछुए पर पड़ी। वे 1. उत्साह में आकर चिल्लाने लगे, "देखो, ये हंस कितने चतुर हैं। वे 


    अपने साथ कछुए को भी ले जा रहे हैं।" कछुए से रहा नहीं गया। वह उन लोगों को बताना चाहता था कि यह विचार तो उसके मन में आया था। 


    वह बोल पड़ा लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला, लकड़ी उसके मुँह से छूट गई और वह सीधे धरती पर आकर गिर पड़ा। अगर उसने अपने अहंकार पर नियंत्रण कर लिया होता तो वह भी सुरक्षित नए तालाब में पहुँच जाता।


    तीन सूअर Moral Stories in Hindi 


    एक समय की बात है, तीन सूअर थे। उन्होंने अपना घर छोड़कर कहीं दूर जाने का निश्चय किया। एक जंगल में पहुँचकर उन तीनों ने अपना-अपना घर बनाया। पहले सूअर ने फूस से अपना घर बनाया। 


    दूसरे ने लकड़ी का घर बनाया और तीसरे सूअर ने ईंटों से पक्का घर बनाया। 


    एक रात, एक भूखा भेड़िया कहीं से घूमता हुआ उधर आ गया। उसने सूअर को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। गरजदार आवाज में सूअर से वह बोला, 


    "मुझे घर के भीतर आने दो वरना मैं अभी फूँक मारकर तुम्हारा घर उड़ा दूंगा… "और उसने जोर से फूँक मारी… फूस का घर धराशायी हो गया। 


    सूअर जान बचाकर भागा और लकड़ी के घर में घुस गया। भेड़िया लकड़ी के घर के पास पहुँचा और सूअर को खाने के लिए जोर से फूँक मारी। 


    लकड़ी का घर भी गिर गया। दोनों सूअरों ने ईंटों के घर में भागकर अपनी जान बचाई। भेड़िया अब पक्के मकान में पहुँचा। वहाँ जाकर उसने जोर-जोर से फूँक मारी पर वह घर का कुछ नहीं बिगाड़ सका। 


    हारकर उसने घर की चिमनी से भीतर जाने का निर्णय किया। तीसरे सूअर ने चिमनी के नीचे आग जला रखी थी। भेड़िया जब चिमनी से नीचे उतरने लगा तो आग में गिर पड़ा और वह मर गया। 


    MORAL: उचित समय पर ही कार्य कर लेना बेहतर है। 


    कड़हारा और बाज Moral Stories in Hindi for Child 


    एक दिन एक लकड़हारा जंगल से गुजर रहा था। एक स्थान पर उसने देखा कि एक बाज किसी बहेलिए द्वारा बिछाए गए जाल में फँस गया है। लकड़हारे को बाज पर दया आ गई। 


    उसने दौड़कर बाज को जाल से आजाद कर दिया। बाज ने लकड़हारे का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से उड़ गया। एक दिन लकड़हारा एक टीले पर बैठकर खाना खा रहा था। 


    अचानक कहीं से वही बाज आया और झपट्टा मारकर उसका खाना लेकर उड़ गया। फिर वह पास के पेड़ पर बैठ गया। अपना खाना बचाने के चक्कर में लकड़हारे का संतुलन बिगड़ गया था। 


    वह टीले से गिर पड़ा। लकड़हारे ने बाज को गौर से देखा और उसे तुरंत पहचान गया। उसे उस एहसानफरामोश बाज के ऊपर बहुत गुस्सा आया। 


    लेकिन बाज बोला,"श्रीमान्, आपके पीछे एक जहरीला साँप आपको डसने के लिए बैठा था। मैंने आपके खाने पर झपट्टा मारकर आपको उस स्थान से हटा दिया, ताकि वह साँप आपको न डस सके।" 


    लकड़हारे ने पीछे मुड़कर साँप को देखा तो उसे बाज की बात का विश्वास हुआ। उसने बाज को अपनी जिंदगी बचाने के लिए धन्यवाद दिया। 


    बाम्बी Moral Story in Hindi 


    एक दिन एक सुंदर मृग जंगल में पैदा हुआ। उसकी माँ ने प्यार से उसका नाम बाम्बी रखा। सब बहुत खुश थे। 


    जब बाम्बी बड़ा हुआ तो उसने अपने पिता से जंगल के तरीके सीखे और लीडर बन गया। एक दिन एक बूढ़ा मृग जोर से चिल्लाया, "भागो, खतरा है। 


    बाम्बी ने दौड़-दौड़ कर अपनी जान की परवाह करे बिना बाकी जानवरों को बचाया। उसके घुटने में चोट आयी। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। 


    सभी साथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया । सभी जानवरों की जान बच गयी। बाम्बी अब एक हीरो बन गया था। 


    MORAL : हमेशा उदाहरण के द्वारा नेतृत्व करें।


    दो मित्र Moarl Stories in Hindi of Two Friends 


    एक बार दो मित्रों को किसी काम से दूसरे गाँव जाना था। मार्ग में एक मित्र ने पेड़ पर तलवार लटकती हुई देखी। उसने आगे बढ़कर वह तलवार पकड़ ली और खुशी से चिल्लाया,"मुझे कितनी बढ़िया तलवार मिली है।" 


    दूसरे मित्र ने उसे टोकते हुए कहा, "हम दोनों साथ सफर कर रहे हैं, इसलिए 'मुझे' मत कहो। तुम्हें कहना चाहिए कि हमें तलवार मिली है।" "अरे नहीं। तलवार को मैंने देखा है, इसलिए यह मेरी है।" 


    कहकर उसने तलवार बगल में दबा ली। दोनों साथ-साथ आगे बढ़ने लगे कि तभी सामने से कुछ लोगों का झुंड आता दिखाई दिया। पास आकर उन्होंने तलवार वाले मित्र को यह कहते हुए पकड़ लिया कि "यही खूनी है। 


    इसे छोड़ना मत। इसे पकड़कर जेल में डाल दो ।" यह सुनकर वह बोला, "लगता है, हम किसी मुसीबत में पड़ गए हैं।" दूसरा मित्र बोला, "हम नहीं सिर्फ 'तुम' मुसीबत में फंस गए हो।" 


    MORAL : हमें अपने दुःख-परेशानी ही नहीं, बल्कि खुशियाँ भी मित्रों के साथ बॉटनी चाहिए। 


    मुर्गे का घमंड Moral Story in Hindi 


    दो मुर्गे अन्य जानवरों के साथ एक फार्म पर रहते थे। एक मुर्गा बोला, "मैं सब जानवरों का राजा हूँ।" 


    दूसरा मुर्गा उसकी बात काटते हुए बोला, "तुम नहीं, बल्कि मैं यहाँ का राजा हूँ।" पहला मुर्गा थोड़ा समझदार था। 


    इसलिए वह बोला, "हम दोनों लड़ाई की प्रतियोगिता रखते हैं जो इस लड़ाई में जीतेगा वही राजा बनेगा।" 


    दूसरा मुर्गा सहमत हो गया। फिर लड़ाई में पहला मुर्गा जीत गया। जीतने के बाद पहले मुर्गे ने अपने पंख फड़फड़ा के कहा, 


    "आप सबने देखा हा होगा कि में कितनी बहादुरी से लड़ा हूँ। मैं तो पहले से ही जानता था कि मे दुनिया का सबसे बलवान मुर्गा हूँ।" 


    एक चील ने उड़ते उस घमंडी मुर्गे की बात सुनी और नीचे आकर उस दबोचकर अपने घोंसले में ले गई। 


    Moral : घमंडी का सिर सदा नीचा होता है. 


    झूठा दोस्त Short Stories in Hindi 


    एक हिरन और एक कौआ पक्के दोस्त थे। एक दिन कौए ने हिरन को एक सियार के साथ देखा। सियार बहुत चालाक जानवर माना जाता है। 


    कौए ने अपने दोस्त हिरन को समझाया कि सियार पर भरोसा नहीं करना चाहिए। हिरन ने कौए की सलाह पर ध्यान नहीं दिया और सियार के साथ एक खेत में चला गया। 


    हिरन वहाँ लगे जाल में फस गया। सियार उससे कहने लगा, "मैं तो किसान को बुलाने जा रहा हूँ। वह आएगा और तुम्हें मार डालेगा। 


    मुझे भी वह तुम्हारे गोश्त का हिस्सा देगा।" हिरन चिल्लाने लगा। कौए ने अपने दोस्त के चिल्लाने की आवाज़ सुनी तो तुरंत उसकी सहायता के लिए आ गया। 


    उसने हिरन से कहा कि वह ऐसे लेट जाए, जैसे वह सचमुच मर गया हो। थोड़ी ही देर में, सियार की आवाज सुनकर किसान वहाँ आ पहुँचा। 


    उसने देखा कि जाल में हिरन तो मरा पड़ा है। उसने जाल खोल दिया। जाल खुलते ही हिरन को मौका मिल गया और वह तुरंत उछलकर वहाँ से भाग गया। 


    गुस्साए किसान ने सियार की पिटाई कर दी और उसे वहाँ से भगा दिया।


    किंग कोबरा और चीटियां Short Stories in Hindi of Ants 


    बहुत समय पहले की बात है, एक भारी किंग कोबरा एक घने जंगल में रहता था शिकार करता था और दिन में सोता रहता था। 


    धीरे-धीरे वह काफी मोटा हो गया और पेड़ वह रात में के जिस बिल में वह रहता था, वह उसे छोटा पड़ने लगा। वह किसी दूसरे पेड़ की तलाश में निकल पड़ा। 


    आखिरकार, कोबरा ने एक बड़े पेड़ पर अपना घर बनाने का निश्चय किया, लेकिन उस पेड़ के तने के नीचे चीटियों की एक बड़ी बाँबी थी, 


    जिसमें बहुत सारी चीटियाँ रहती थीं। वह गुस्से में फनफनाता हुआ बीवी के पास गया और चीटियों को हॉँटकर बोला, "मैं इस जंगल का राजा हूँ। 


    मैं नहीं चाहता कि तुम लोग मेरे आस-पास रहो। मेरा आदेश है कि तुम लोग अभी अपने रहने के लिए कोई दूसरी जगह तलाश लो। 


    अन्यथा, सब मरने के लिए तैयार हो जाओ!" चीटियों में काफी एकता थी। वे कोबरा से बिलकुल भी नहीं डरी। देखते ही देखते हज़ारों चीटियाँ बाँबी से बाहर निकल आई। 


    सबने मिलकर कोबरे पर हमला बोल दिया। उसके पूरे शरीर पर चीटियां रेंग-रेंग कर काटने लगी! दुष्ट कोबरा दर्द के मारे चिल्लाते हुए वहाँ से भाग गया। 


    शैतान मेमना Short Stories in Hindi 


    एक बकरी अपने शैतान बच्चे के साय रहती थी। एक दिन सुबह, उछलते-कूदते मेमना जंगल की ओर चला गया। उसकी माँ ने बच्चे को काफी मना किया कि वह घने-अंधेरे जंगल में अकेले न जाए। 


    उसने कहा, "वहाँ बहुत सारे जंगली और खतरनाक जानवर होंगे। बेटे, वहाँ अकेले मत जाओ।" माँ, चिंता मत करो। मैं ज्यादा दूर नहीं जाऊँगा." मेमने ने जवाब दिया। 


    नन्हा मेमना उछल-कूद करते हुए खेल में मग्न हो गया और उसे पता ही नहीं चला कि वह जंगल में कितने दूर आ गया है। जल्द ही अंधेरा हो गया। 


    अब वह वापस अपनी माँ के पास जाना चाहता था, लेकिन बेचारा इरा-घबराया मेमना रास्ता भूल गया! वह गुम हो चुका था और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। 


    वह अपनी माँ को पुकारते हुए चिल्लाने लगा। उसे अपने आरामदायक घर की याद सताने लगी। उसे महसूस हुआ कि उसने अपनी माँ की बात न मानकर बड़ी गलती कर दी। 


    तभी, एक भेडिया वहाँ आ पहुँचा औट बोला, अरे! आज रात तो मैं इसी मेमने का स्वादिष्ट गोश्त खाऊँगा!" भेड़िया ने झपटकर मेमने को दबोच लिया। वेचारे मेमने को अपनी माँ की बात न मानने का दंड भुगतना पड़ा। 


    शैतान मेमना Short Stories in Hindi 


    एक बकरी अपने शैतान बच्चे के साय रहती थी। एक दिन सुबह, उछलते-कूदते मेमना जंगल की ओर चला गया। उसकी माँ ने बच्चे को काफी मना किया कि वह घने-अंधेरे जंगल में अकेले न जाए। 


    उसने कहा, "वहाँ बहुत सारे जंगली और खतरनाक जानवर होंगे। बेटे, वहाँ अकेले मत जाओ।" माँ, चिंता मत करो। मैं ज्यादा दूर नहीं जाऊँगा." मेमने ने जवाब दिया। 


    नन्हा मेमना उछल-कूद करते हुए खेल में मग्न हो गया और उसे पता ही नहीं चला कि वह जंगल में कितने दूर आ गया है। जल्द ही अंधेरा हो गया। 


    अब वह वापस अपनी माँ के पास जाना चाहता था, लेकिन बेचारा इरा-घबराया मेमना रास्ता भूल गया! वह गुम हो चुका था और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। 


    वह अपनी माँ को पुकारते हुए चिल्लाने लगा। उसे अपने आरामदायक घर की याद सताने लगी। उसे महसूस हुआ कि उसने अपनी माँ की बात न मानकर बड़ी गलती कर दी। 


    तभी, एक भेडिया वहाँ आ पहुँचा औट बोला, अरे! आज रात तो मैं इसी मेमने का स्वादिष्ट गोश्त खाऊँगा!" भेड़िया ने झपटकर मेमने को दबोच लिया। वेचारे मेमने को अपनी माँ की बात न मानने का दंड भुगतना पड़ा।


    किंग कोबरा और चीटियां Short Stories in Hindi of Ants 


    बहुत समय पहले की बात है, एक भारी किंग कोबरा एक घने जंगल में रहता था शिकार करता था और दिन में सोता रहता था। 


    धीरे-धीरे वह काफी मोटा हो गया और पेड़ वह रात में के जिस बिल में वह रहता था, वह उसे छोटा पड़ने लगा। वह किसी दूसरे पेड़ की तलाश में निकल पड़ा। 


    आखिरकार, कोबरा ने एक बड़े पेड़ पर अपना घर बनाने का निश्चय किया, लेकिन उस पेड़ के तने के नीचे चीटियों की एक बड़ी बाँबी थी, 


    जिसमें बहुत सारी चीटियाँ रहती थीं। वह गुस्से में फनफनाता हुआ बीवी के पास गया और चीटियों को हॉँटकर बोला, "मैं इस जंगल का राजा हूँ। 


    मैं नहीं चाहता कि तुम लोग मेरे आस-पास रहो। मेरा आदेश है कि तुम लोग अभी अपने रहने के लिए कोई दूसरी जगह तलाश लो। 


    अन्यथा, सब मरने के लिए तैयार हो जाओ!" चीटियों में काफी एकता थी। वे कोबरा से बिलकुल भी नहीं डरी। देखते ही देखते हज़ारों चीटियाँ बाँबी से बाहर निकल आई। 


    सबने मिलकर कोबरे पर हमला बोल दिया। उसके पूरे शरीर पर चीटियां रेंग-रेंग कर काटने लगी! दुष्ट कोबरा दर्द के मारे चिल्लाते हुए वहाँ से भाग गया। 


    दुष्ट बिचौलिया Very Short Stories in Hindi 


    एक गैया ने एक पेड़ पर खाली छेद में अपना घर बनाया। एक दिन, वह भोजन की तलाश में निकली और फिर कई दिन तक नहीं लौटी। 


    इस बीच, एक खरगोश वहाँ आया और उसका घर खाली देखकर, उसमें रहने लगा। काफी दिनों बाद गोरिया लौटी तो खरगोश ने वह घर खाली करने से इन्कार कर दिया। 


    गौस्या बोली, "चलो किसी से अपना फैसला करवाते हैं। वह जैसा कहेगा, हम दोनों वैसा ही करेंगे।" इस बीच, एक दुष्ट बिल्ली को उनके झगड़े के बारे में पता चल गया। 


    यह उन दोनों के पास आ गई। दोनों ने उन्हें अपने झगड़े के बारे में बताया। बिल्ली बड़ी मीठी आवाज में बोली, "मैं बहुत बड़ी हो गई हूँ और मुझे ठीक से सुनाई नहीं देता। 


    पास आकर अपनी बात समझाओ।" जब बेचारी गौरैया और खरगोश उसके पास आ गए, तो बिल्ली जे झपटकर दोनों को दबोच लिया और उन्हें मारकर खा गई! अगर तुम लोग भी लड़ोगे तो तुम्हारी शक्ति कम हो जाएगी और दूसरे इसका लाभ उठा ले जाएंगे। 


    पिस्सू और बेचारा खटमल Moral Short Stories Hindi 


    एक खटमल एक राजा के पलंग में रहता था। एक पिस्सू शयनकक्ष में आया और खटमल से बोला, "मैंने कभी किसी राजा का खून नहीं पिया। 


    आज तुम्हारे साथ मैं भी राजा का खून पिऊंगा।" खटमल ने जवाब दिया, "तुम प्रतीक्षा करना। मेरा पेट भर जाने के बाद ही तुम्हारी बारी आएगी। तब तुम अपना पेट भर लेना।" पिस्सू सहमत हो गया। 


    इस बीच, राजा शयनकक्ष में आ गया। बेसन पिस्सू अपने पर नियंत्रण नहीं कर पाया। राजा के सोने से पहले ही उसने उसका खून चूसना शुरू कर दिया। पिस्सू के काटने से राजा पलंग पर उठकर बैठ गया। 


    उसने अपने सेवकों को बुलाकर पलंग की अच्छी तरह से जाँच-पड़ताल करने को कहा। राजा के सेवकों ने पलंग को बहुत ध्यान से देखा। 


    पिस्सू तो धीरे से पलंग के अंधेरे कोने में खिसककर छिप गया लेकिन खटमल उन्हें दिख गया। उन्होंने खटमल को मार डाला।


    बदसूरत राजकुमार और मंदबुद्धि राजकुमारी Short Stories in Hindi of Prince 


    एक राज्य में रानी ने बहुत सुंदर लड़की को जन्म दिया। तभी एक परी वहाँ आई और बोली-"यह लड़की बहुत सुंदर परंतु मंदबुद्धि होगी। जो भी आदमी इससे शादी करेगा वह इसके प्रभाव से सुंदर हो जाएगा।" 


    वहीं पड़ोस के राज्य में रानी ने एक बदसूरत राजकुमार को जन्म दिया। परी ने रानी से कहा-"राजकुमार बहुत बुद्धिमान होगा। वह एक ऐसी लड़की से शादी करेगा, जो इसके प्रभाव से बुद्धिमान हो जाएगी।" 


    कुछ साल बाद राजकुमार और राजकुमारी जवान हो गए। परन्तु कोई भी उनसे शादी नहीं करना चाहता था। एक दिन उदास राजकुमारी अकेले जंगल में घूम रही थी, 


    तभी वह राजकुमार से मिली। राजकुमार ने राजकुमारी से पूछा कि, "क्या वह उससे शाद करेगी?" राजकुमारी मान गई, तब राजकुमार ने उससे एक साल बाद शादी करने का फैसला किया। 


    एक साल में राजकुमार सुंदर हो गया और राजकुमारी बुद्धिमान हो गई। दोनों ने शादी कर ली और खुशी-खुशी रहने लगे। 


    दुष्ट बिचौलिया Very Short Stories in Hindi 


    एक गैया ने एक पेड़ पर खाली छेद में अपना घर बनाया। एक दिन, वह भोजन की तलाश में निकली और फिर कई दिन तक नहीं लौटी। 


    इस बीच, एक खरगोश वहाँ आया और उसका घर खाली देखकर, उसमें रहने लगा। काफी दिनों बाद गोरिया लौटी तो खरगोश ने वह घर खाली करने से इन्कार कर दिया। 


    गौस्या बोली, "चलो किसी से अपना फैसला करवाते हैं। वह जैसा कहेगा, हम दोनों वैसा ही करेंगे।" इस बीच, एक दुष्ट बिल्ली को उनके झगड़े के बारे में पता चल गया। 


    यह उन दोनों के पास आ गई। दोनों ने उन्हें अपने झगड़े के बारे में बताया। बिल्ली बड़ी मीठी आवाज में बोली, "मैं बहुत बड़ी हो गई हूँ और मुझे ठीक से सुनाई नहीं देता। 


    पास आकर अपनी बात समझाओ।" जब बेचारी गौरैया और खरगोश उसके पास आ गए, तो बिल्ली जे झपटकर दोनों को दबोच लिया और उन्हें मारकर खा गई! अगर तुम लोग भी लड़ोगे तो तुम्हारी शक्ति कम हो जाएगी और दूसरे इसका लाभ उठा ले जाएंगे। 


    समुद्र का देवता और पहाड़ों की रानी Ocean God Short Stories in Hindi 


    बहुत समय पहले ग्रीक समुद्र का देवता, ग्रीक देवी एथेना के राज्य एथेन्स को पाना चाहता था। उसने उस पहाड़ी पर हमला किया जिस पर एथेन्स राज्य बसा हुआ था। 


    उस हमले से पहाड़ी एक तरफ से टूट गई और वहाँ से खारे पानी का झरना फूट पड़ा। ग्रीक देवी एथेना ने अपना राज्य वापस पाने के लिए एक तरकीब सोची। उसने खारे पानी के झरने को सुखाने का निश्चय किया। 


    इसके लिए उसन झरने के पास बलूत के पेड़ के बीज बोये। यह वही पेड़ है। जो अब भी एथेन्स में है। उस पेड़ के कारण वह झरना सूख गया। एक बार फिर एथेंस को एथेन्स पर राज हो गया। 


    समुद्र का देवता फिर कभा भी द्वारा हमला नहीं कर सका। तभी से एथेन्स के लोग अपनी देवी एथेंस के राज्य में सुरक्षित है, जर खुशी-खुशी रह रहे हैं। 


    लालची सियार Hindi Short Stories 


    एक जंगल में एक शिकारी ने एक मोटे-तगड़े सुअर पर बुकीले तीर से निशाना लगाया। सुअर ने घायल होने के बावजूद, शिकारी पर पलटकर हमला किया और उसे मार डाला। 


    इसके बाद सुअर भी अपने शरीर के घाव की वजह से मर गया। कुछ देर बाद, एक भूखा सियार वहाँ आ पहुंचा। उसे शिकारी और सुअर के रूप में दो-दो शिकार पड़े मिले। 


    वह स्वयं से कहने लगा, "आज ईश्वर ने मेरे ऊपर बड़ी कृपा की है। चलो, पहले, इस धनुष की होरी से ही खाने की शुरुआत की जाए।" सियार की लाश के पास गया और धनुष की डोरी को कुतरने लगा। 


    जैसे ही धनुष की डोरी टूटी, वैसे ही उसमें लगा तीर पूरे जोर से निकल पड़ा और सीधे सियार के शरीर में घुस गया और वह वहीं पर मर गया। उसे खाना शुरू करने से पहले सोचना चाहिए था। 


    ऐसा जो करके, वह लालच में आकर बिना सोचे-समझे टूट पड़ा और अपनी जान गंवा बैठा।


    सबसे चालाक कौन? Short Stories in Hindi for a Clever Men 


    एक बार, तीन चोर सबसे चालाक होने का दावा कर रहे थे। उसी समय, एक किसान एक गधे पर सवार वहाँ आया। उसका गधा एक बकरी से बंधा था जिसके गले में घंटी थी। 


    चोरों ने उसकी बकरी, उसका गधा और उसके कपड़े चुराने का फैसला किया। पहले चोर ने चुपके से बकरी की घंटी निकाल कर गधे की पूंछ में बांध दी और बकरी ले गया। एक घंटे बाद किसान को पता चला तो वह रोने लगा। 


    अब दूसरा चोर उसके पास आया और बोला-"मैंने तुम्हारी बकरी के चोर को उस पतली गली में जाते देखा है। किसान अपने गधे को वहीं छोड़कर उस गली की ओर भागा। तभी चोर उसका गधा ले गया। 


    किसान ने तीसरे चोर को रोते हुए देखा। चोर ने उसे कहा-'मेरा बटुआ कुएँ में गिर गया है। अगर तुम निकाल दो तो मैं तुम्हें दस सोने की मोहरें दूंगा।" कुएँ में उतरने के लिए जैसे ही किसान ने कपड़े उतारे, चोर कपड़े लेकर भाग गया। 


    इस प्रकार, उन तीनों चोरों ने किसान से उसकी बकरी, गधा और उसके कपड़े चुरा लिये। इन सब में तीसरा चोर ही चालाक माना गया। 


    मूर्ख समुराई और नौकर Moral Short Stories in Hindi of a Servent 


    तुम्हें पता है समुराई कौन होता है? समुराई जापान में सेना का एक अफसर होता है। बहुत पहले एक समुराई अपने घर लौट रहा था। वह अपने लिए एक नौकर ढूंढ रहा था, जो उसका सामान उठा सके। 


    रास्ते में उसे एक और समुराई मिला। दोनों दोस्त बन गए। उन्होंने एक साथ सफर करने का फैसला किया। भाग्य से उन्हें एक नौकर भी मिल गया। नौकर ने उनका सामान और तलवारें उठा रखी थीं। 


    समुराइयों के पास बात करने को जब कुछ नहीं बचा, तो वे दोनों नौकर का मज़ाक उड़ाने लगे। पहले तो नौकर ने बुरा नहीं माना। परंतु लगातार अपमान से उसे चिड़ होने लगी। 


    उसने तलवार निकाली और बोला-"मुझे अपना पैसों का बैग दो। समुराइयों को उसकी बात माननी पड़ी। नौकर ने उनका सामान और तलवारें कुएँ में फेंक दिए। वह बोला-अपना सामान स्वयं निकालो। 


    मैं ये पैसे के बैग उठाकर खुश हूँ।" यह कहकर वह भाग गया। दोनों अमराइयों के पास अब कुछ नहीं बचा था। दोनों की मर्खता के कारण ही यह सब हुआ था।


    सोच Hindi Moral Very Short Stories 


    एक दिन एक बुजुर्ग व्यक्ति एक समारोह में शामिल होने रहा जा था। ठीक उसी समय एक युवक अपनी मंगेतर से मिलने जा रहा था। रास्ते में उनमें बातचीत होने लगी और थोड़ी ही देर में वे काफी घुलमिल गए। 


    वह युवक बोला, "हे महानुभाव! मेरी इच्छा है कि आप मेरे साथ मेरी मंगेतर से मिलने चलें।" लेकिन उस बुजुर्ग व्यक्ति ने मना करते हुए कहा, "नहीं धन्यवाद। मैं एक धार्मिक समारोह में जा रहा हूँ। 


    इसलिए मैं चाह रहा था कि तुम मेरे साथ चलो।" युवक ने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया। फिर वे दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए। जब बुजुर्ग व्यक्ति धार्मिक समारोह में पहुँचा तो वह उस खूबसूरत लड़के के बारे में सोचने लगा, 


    जिससे मिलने का मौका उसे मिला था। वहीं वह युवक उस धार्मिक समारोह के विषय में सोचने लगा, जहाँ जाने का उसे अवसर मिला था। इस प्रकार दोनों जो उन्हें नहीं मिला, 


    उसके बारे में सोच रहे थे। व्यक्ति का स्वभाव ही कुछ ऐसा होता है कि जो चीज उसके पास होती है, उसके बारे में न सोचकर वह दूसरों को उपलब्ध चीजों के विषय में सोचता रहता है। 


    बड़ी बिल्ली और आत्मा Short Stories in Hindi of a Cat 


    बहुत पहले, रूस में एक शिकारी ने एक सफेद भालू पकड़ा। वह उसे राजा ज़ार को दिखाना चाहता था। वह महल की ओर चल पड़ा। रास्ते में एक जंगल था। उस जंगल से गुज़रते समय रात हो गई। 


    उसने एक झोंपड़ी देखी तो उसका दरवाज़ा खटखटाया। उसमें से एक आदिवासी निकला। शिकारी ने उससे पूछा-"क्या मैं यहाँ रुक सकता हूँ?" 


    आदिवासी मान गया परंतु वह बोला-"आज रात दुष्ट आत्माएँ मेरे घर में एक उत्सव मनाने आ रही हैं।" यह सुनकर शिकारी चुपचाप जाकर सो गया। आधी रात को आत्मा आई। 


    भालू को देखकर, वे उसे एक बड़ी बिल्ली समझी और उसे छेड़ने लगीं। भालू को गुस्सा आ गया और वह ज़ोर से दहाड़ा। आत्माएँ डर कर वहाँ से भाग गईं। 


    अगले साल आत्माओं ने आदिवासी से पूछा-"क्या बिल्ली अभी भी तुम्हारे घर में है?" आदिवासी ने कहा-"हाँ, उसने बच्चों को जन्म दिया है जो उससे भी बड़े हैं।" यह सुनकर आत्मा इतना डर गई कि वह कभी आदिवासी के घर नहीं आई।


    बुरी संगत Short Stories in Hindi dependent on Bad Grouping 


    एक किसान कौओं से बहुत परेशान था। दुष्ट कौए आते और रोज उसकी फसल खा जाते उन कौओं को भगाने के लिए किसान ने खेत में कुछ विजूका भी लगाए लेकिन कौए इतने चालाक थे कि वे बिजूका को भी नोंच-फाड़ देते थे। 


    एक दिन, किसान ने अपने खेत में जाल फैला दिया। जाल के ऊपर उसने अनाज फैला दिया। कौआ जाल में फस गए। जाल में फंसे कौओं ने किसान से दया की भीख माँगी लेकिन किसान बोला, "मैं तुम लोगों को जिंदा नहीं छोडूंगा। 


    अचानक किसान को एक दर्दभरी आवाज सुनाई दी। उसने ध्यान से जाल में देखा। उसे दिखाई दिया कि कौओं के साथ एक कबूतर भी फैसा किसान कबूतर से बोला, "तुम इन दुष्ट कौओं के साथ क्या कर रहे थे? 


    अब तुम भी अपनी इसी बुरी संगत की वजह से अपनी जान गंवा बैठोगे।" और फिर किसान ने उन कौओं और कबूतर को अपने शिकारी कुत्तों को खिला दिया। किसी ने सच ही कहा है, बुरी संगत हमेशा हानिकारक होती है। 


    मेढकों की लड़ाई Latest Hindi Moral Stories Very Short 


    एक कुएँ में बहुत सारे मेंढक रहते थे। एक बार दो मेंढकों में लड़ाई होने लगी। शेष मेंढक दोनों में से किसी-न-किसी का पक्ष लेने लगे। इस प्रकार मेंढकों के दो समूह बन गए। उनकी लड़ाई बढ़ती चली गई। 


    एक दिन मेंढकों का एक समूह एक साँप के पास सहायता के लिए गया। उनका मुखिया साँप से बोला, "हम एक कुएँ में रहते हैं। वहाँ पर रहने वाले कुछ मेंढक हमारे दुश्मन हैं। 


    हम तुमसे विनती करने आए हैं कि तुम चलकर हमारे कुएँ में रहो और उन्हें मारकर खा जाओ। इस प्रकार तुम्हें आसानी से भोजन प्राप्त हो जाएगा और हमें भी अपने दुश्मनों से छुटकारा मिल जाएगा।" 


    यह जानकर साँप उनके साथ कुएँ में रहने के लिए खुशी-खुशी चल दिया। अब साँप ने दुश्मन मेंढकों को खाना शुरू कर दिया। जल्दी ही वह सारे दुश्मन मेंढकों को खा गया। तब दूसरे समूह के सरदार ने साँप से कुआँ छोड़कर जाने को कहा। 


    लेकिन साँप ने उसकी बात मानने से इंकार कर दिया। अब वह मुफ्त के भोजन का आदी जो हो चुका था। इसलिए वह कुएँ में ही रहा और धीरे-धीरे सारे मेंढकों को मारकर खा गया। इस प्रकार, व्यर्थ की लड़ाई में सभी मेंढक अपनी जान गंवा बैठे। 


    उत्सुक बच्चा Short Stories in Hindi of a Kid 


    एक बार, एक बच्चा जंगल में घूम रहा था। उसने एक बड़ा और भारी बक्सा देखा। उसने उसे खोलने की बहुत कोशिश की परंतु नहीं खोल पाया। 


    वह सोचने लगा कि उसमें क्या होगा। पहले उसने सोचा उसे बहुत धन होगा। फिर उसने सोचा कि उसमें खज़ाने का नक्शा होगा। तभी उसने वहाँ पर भविष्य बताने वाले की झोंपड़ी देखी। लड़का उसके पास गया। 


    भविष्य बताने वाले ने बक्सा सूंघा और कहा-"इसके अंदर कोई अच्छी चीज है।" लड़के ने पूछा-वह क्या है?" भविष्य बताने वाले ने कहा-"मैं तुम्हें इतना ही बता सकता हूँ। 


    लड़का उदास हो अपने घर की ओर मुड़ गया। लेकिन वह इतना उत्सुक था कि उससे रहा न गया और उसने उस बक्से पर पत्थर दे मारा। बक्सा टूट गया और उसमें से मीठा पेय बह निकला। बच्चा बहुत पछताया क्योंकि वह इस पेय को नहीं पी पाया था।


    कुत्ता चला विदेश Moral Short Stories Hindi 


    एक नगर में चित्रांगन नामक एक होशियार कुत्ता रहता था। एक साल उस नगर में भयानक अकाल पड़ा। चित्रांगन को खाने के लाले पड़ गए। 


    परेशान होकर वह कहीं दूर के नगर में चला गया। नई जगह पर खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी। वह एक घर के पिछवाढे में रहता और यहां मनपसंद खाना खाता। 


    एक दिन, कुछ वहीं के कुत्तों ने उसे देख लिया। उसे देखते ही वे समझ गए कि यह कुत्ता तो बाहर से आया है उन कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। 


    सारे कुत्ते उस पर भोंकते हुए टूट पड़े और उसे जगह-जगह से बुरी तरह घायल कर दिया। आखिरकार, किसी तरह वह उन कुत्तों के चंगुल से छूट पाया। 


    अब वह सोचने लगा, "यह जगह छोड़ देने में ही भलाई है। मेरे नगर में भले ही अकाल पड़ा हो, लेकिन कम से कम वहाँ मेरे साथी तो हैं।" 


    मूर्ख समुराई और नौकर Moral Short Stories in Hindi of a Servent 


    तुम्हें पता है समुराई कौन होता है? समुराई जापान में सेना का एक अफसर होता है। बहुत पहले एक समुराई अपने घर लौट रहा था। वह अपने लिए एक नौकर ढूंढ रहा था, जो उसका सामान उठा सके। 


    रास्ते में उसे एक और समुराई मिला। दोनों दोस्त बन गए। उन्होंने एक साथ सफर करने का फैसला किया। भाग्य से उन्हें एक नौकर भी मिल गया। नौकर ने उनका सामान और तलवारें उठा रखी थीं। 


    समुराइयों के पास बात करने को जब कुछ नहीं बचा, तो वे दोनों नौकर का मज़ाक उड़ाने लगे। पहले तो नौकर ने बुरा नहीं माना। परंतु लगातार अपमान से उसे चिड़ होने लगी। 


    उसने तलवार निकाली और बोला-"मुझे अपना पैसों का बैग दो। समुराइयों को उसकी बात माननी पड़ी। नौकर ने उनका सामान और तलवारें कुएँ में फेंक दिए। वह बोला-अपना सामान स्वयं निकालो। 


    मैं ये पैसे के बैग उठाकर खुश हूँ।" यह कहकर वह भाग गया। दोनों अमराइयों के पास अब कुछ नहीं बचा था। दोनों की मर्खता के कारण ही यह सब हुआ था। 


    चोर की माँ Very Short Moral Stories In Hindi 


    एक छोटा बच्चा हर रोज स्कूल जाता था। एक दिन वह अपने एक सहपाठी की किताब चुराकर घर ले आया। घर आकर उसने वह किताब अपनी माँ को दिखाते हुए कहा, "देखो माँ! मैं कितनी सुंदर किताब चुराकर लाया हूँ।" 


    किताब देखकर माँ बहुत प्रसन्न हुई और बोली, "शाबाश बेटा! तुम बहुत चतुर हो।" इस तरह बच्चा हमेशा बाहर से कोई न कोई वस्तु चुराकर लाता और माँ उसे समझाने की बजाय और बढ़ावा देती। 


    आखिर में बड़ा होकर वह एक नामी चोर बन गया। एक दिन पुलिस उसे पकड़कर ले जाने लगी तो उसकी माँ रोते हुए उसके पीछे चल पड़ी। चोर ने सिपाही से एक क्षण रुकने के लिए कहा। 


    फिर वह अपनी माँ की ओर घूमा और एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। फिर बोला, "माँ! अब रो मत, क्योंकि मुझे चोर बनाने में तुम्हारा हाथ है। यदि तुमने बचपन में मुझे चोरी करने पर सजा दी होती तो आज यह नौबत न आती।" 


    MORAL : कभी भी गलत काम को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।


    आप से बढ़कर कुछ नहीं Hindi Short Stories with moral for youngsters 


    एक बार कि बात है-एक आदमी कही से गुज़र रहा था,तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा के उनके अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई हैं। 


    उसे इस बात का बड़ा आश्चर्य हुआ के हाथी जैसे ताक़तवर जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं। 


    उसने पास खड़े एक किसान से पूछा, 


    के भला ये हाथी किस तरह इतनी शांति से खड़े हैं और भागने की कोसिस क्यो नहीं कर रहे? 


    किसान बोला-इन हाथियों को छोटे पन से ही ये रस्सियों से बांधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती हैं के इस बंधन को वो तोड़ सके। 


    बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी न तोड़ पाने की वजह से उन्हें धीरे-धीरे ये यक़ीन हो जाता हैं के वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते, और बड़े होने पर भी इनका ये यकीन बना रहता है! इसलिए वो कभी इन्हें तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते। 


    वह आदमी आश्चर्य में पड़ गया, के ये जानवर इसलिए रस्सी नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात पर यकीन करते हैं, के वो ऐसा नहीं कर सकते। 


    इन हाथियों की तरह ही हम में से कई लोग पहली बार मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं के अब हमसे ये काम नहीं हो सकता। और अपनी ही बनाई हुई मानसिक जंजीरों में बंधे हुए पूरा जीवन गुज़ार देते हैं। 


    Lesson Of This Story 


    याद रखे असफलता ज़िन्दगी का एक हिस्सा है। और बार-बार कोसिस करने से ही सफलता मिलती हैं। अगर आप भी ऐसे किसी बधन से बंधे है, जो आपको-आपके सपने सच करने से रोक रहा है, तो उससे तोड़ दीजिए 


    संत की सीख Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार एक लड़का एक खिलौने बचने वाले के पास खड़ा था। 


    तभी हाँ एक कार आकर रूकती है, उसमे से एक आदमी निकलता है। 


    खिलौने खरीदता है और कार में बैठ जाता है। 


    तभी उस आदमी का ध्यान खिलौने वाले के पास खड़े उस लड़के पे जाता हैं। 


    वो बच्चा अमीर आदमी की कार को निहार रहा होता हैं। 


    उस अमीर आदमी को रहम आ जाता हैं। 


    वो उस बच्चे को अपनी कार में बैठा लेता है। 


    • बच्चा-आपकी कार बहुत महंगी हैं ना? 


    • आदमी-हां। मेरे बड़े भाई ने मुझे उपहार में दी है। 


    • बच्चा आपके बड़े भाई कितने अच्छे आदमी हैं। 


    • आदमी-मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो। तुम भी ऐसी कार चाहते हो ना? 


    • बच्चा-नहीं मैं भी आपके बड़े भाई जैसे अमीर आदमी बनना चाहता हूँ। 


    • क्योंकि मेरे भी छोटे-छोटे भाई बहन हैं ना। 


    Lesson Of This Story 


    अपनी सोच को हमेशा ऊँचा रखें दुसरो की अपेक्षाओं से भी कही ज्यादा ऊँचा


    खुशियों का राज़ Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार 50 लोगों का ग्रुप एक मीटिंग में हिस्सा ले रहा था, मीटिंग शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे। Speaker अचानक ही रुका और सभी Participants को गुब्बारे देते हुए बोला आप सभी को इस गुब्बारे पर अपना नाम लिखना है, 


    Speaker के कहने पर सभी ने ऐसा ही किया, नाम लिखे हुए गुब्बारो को एक दूसरे कमरे में रखवा दिया गया। 


    Speaker ने अब सभी को एक साथ उस कमरे में जाकर 5 मिनट के अंदर अपने नाम वाला गुब्बारा ढूँढने के लिए बोला-सारे Participants तेज़ी से अंदर घुसे और पागलों की तरह आपने नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। 


    पर इस अफरा-तफरी में कोई भी अपने नाम का गुब्बारा नहीं ढूंढ पा रहा था। 5 मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया। 


    Speaker-अरे क्या हुआ आप सभी खाली हाँथ क्यो हैं क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला? 


    Members नहीं… ..हमने बहुत ढूंढा हर बार किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाँथ आया। 


    Speaker-कोई बात नहीं आप लोग फिर से एक बार कमरे में जाये, पर इस बार जिससे जो भी गुब्बारा मिले, उससे अपने हाँथ में लेकर उस वियक्ति का नाम पुकारें, जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है। 


    एक बार फिर सभी Participants कमरे में बहुत शान्त तरीक़े से गए। कमरे में किसी तरह की अफरा-तफ़री नहीं मची हुई थी। सभी ने एक-दूसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए! और 3 मिनट में ही बाहिर आ गए। 


    अब Speaker ने गंभीर होते हुए बोला-बिल्कुल यही चीज़ हमारी ज़िन्दगी में भी हो रही हैं। हर कोई अपने लिए जी रहा हैं। हमें इस बात से कोई मतलब नहीं के हम किस तरह औरो के लिए मदद कर सकते है। 


    हम तो बस पागलों की तरह बस अपनी ही खुशिया ढूंढ रहे हैं। और बहुत ढूंढने के बाद भी कुछ नहीं मिलता हमारी ख़ुसी दुसरो में ही छुपी हुई हैं। 


    Lesson Of This Story 


    जब हम औरो को खुशियां देना सीख जाएँगे तो अपने-आप ही हमें हमारी खुशियां मिल जायेगी। 


    संत की सीख Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    क समय की बात है- 


    काशी गाव में एक संत रहते थे, शिष्यों की शिक्षा पूरी होने के बाद संत ने उन्हें अपने पास बुलाया और कहा- 


    प्यारे शिष्यों समय आ गया है अब तुम सबको समाज के कठोर नियमों का पालन करते हुए विनम्रता से समाज की सेवा करनी होगी। 


    तो एक शिष्य ने कहा-गुरुदेव हर समय विनम्रता से काम नहीं चलता! 


    संत समझ गए के अभी भी उसमे अरमान मौजूद है। थोड़ी देर चुप रहने के बाद संत बोले-ज़रा मेरे मुँह के अंदर झाँक कर देख के बताओ अब कितने दाँत बचे हैं! 


    बारी-बारी से शिष्यों ने संत का मुँह देखा और एक साथ बोले-आपके सभी दाँत टूट चुके हैं। 


    संत ने कहा जीभ हैं के नहीं? 


    संत बोले-दाँतो को देखने की जरूरत नहीं है, 


    जीभ जन्म से मृत्यु तक साथ रहती हैं। 


    हैं न अजीब बात और दाँत जो बाद में आते हैं! 


    वो पहले ही छोड़ जाते है जब की उन्हें बाद में जाना चाहिए। आखिर ऐसा क्यों होता है? 


    एक शिष्य ने बोला ये तो जिंदगी का नियम है, 


    संत-नहीं बच्चों इसका जबाब इतना सरल भी नहीं है, जितना तुम सभी समझ रहे हो। 


    संत-जीभ इसलिए नहीं टूटती क्योंकि उसमें लोच हैं वह विनम्र होकर अंदर पड़ी रहती हैं, उसमे किसी तरह का अहंकार नहीं है उसमे विनम्रता से सब कुछ सहने की शक्ति है, इसलिए वह हमारा साथ देती हैं।(moral stories in Hindi ) 


    जब की दाँत बहुत कठोर होते हैं,उन्हें अपनी कठोरता पे अभिमान होता हैं, 


    वो जानते हैं उनके वजह से ही इंसान की खूबसूरती बढ़ती है, इसलिए वह बहुत कठोर होते है, 


    उनका ये अहंकार और कठोरता उनकी बर्बादी का कारण बनती हैं, इसलिए तुम्हें अगर समाज की सेवा अच्छे से करनी हैं, 


    तो जीभ की तरह नम्र बनकर नियमों का पालन करना करो। 


    Lesson Of This Story 


    विनम्रता ही हमें जानवरों से अलग करती हैं


    फ़ालतू का ज्ञान Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार की बात है एक जंगल में बुलबुल नाम की चिड़िया रहती थीं, ठंड का मौसम आने वाला था सभी जानवर उससे बचने के लिए तैयारी करने लगे। 


    बुलबुल ने भी एक शानदार घोसला बनाया और आने वाली बारिश से बचने के लिए उसे चारो तरफ से घास से ढक दिया।औ 


    एक दिन अचानक बहुत घनघोर वर्षा शुरू हो गई जिससे बचने के लिए सभी जानवर इधर उधर भागने लगे, बुलबुल आराम से अपने घोसले में बैठ गई। 


    तभी एक बंदर खुद को बचाने के लिए उस पेड़ के नीचे आ पहुंचा। 


    बंदर की हालत देख बुलबुल ने कहा-तुम इतने होशियार बने फिरते हो फिर भी बारिश से बचने के लिए घर नहीं बनाया। 


    ये सुनकर बंदर को बहुत गुस्सा आया पर वह चुप रहा। 


    बुलबुल फिर बोली पूरी गर्मी आलस में बिता दी अच्छा होता अपने लिए घर बना लेते। 


    बंदर ने अपने गुस्से को काबू किया और चुप रहा। 


    वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी और हवाएं और तेज हो रहीं थी, बेचारा बंदर ठंड से कापने लगा, पर बुलबुल ने तो मानो कसम खा रखी थी उसे छेड़ने की। 


    बह फिर बोली तुमने थोड़ी अक्ल दिखाई होती तो इस हालत… 


    बुलबुल ने अपनी बात खतम भी नहीं की थी के बंदर पेड़ पर चढ़ गया और बोला-भले मुझे अपना घर बनाना नहीं आता पर तोड़ना अच्छे से आता है। 


    ये कहते हुए बंदर से बुलबुल चिड़िया का घोसला 


    तहस नहस कर दिया। 


    अब बंदर की तरह बुलबुल भी बे घर हो गई। 


    Lesson of this story 


    दोस्तो किसी मुस्किल में पड़े व्यक्ति की सहायता कर सकते हो तो जरूर करो पर फालतू का ज्ञान मत दो। 


    आपका मूल्य Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    उस Seminar में बहुत सारे लोग बैठे हुए थे, उन्होंने 500 सौ रुपये का नोट दिखाते हुए पूछा कौन इस नोट को लेने की इच्छा रखता हैं? 


    फिर Seminar में बैठे लोगों के हाथ ऊपर उठने लगे। Maheshwari G बोले-मैं आप मे से किसी को ये नोट देने वाला हूं, ये बोलकर उन्होंने उस नोट को हाथ में तोड़-मोड़ दिया। 


    इसके बाद उन्होंने पूछा-इससे अब कौन-कौन लेना चाहता हैं? अभी भी लगभग सारे लोगों के हाथ ऊपर ही थे, 


    Maheshwari G बोले-क्या होगा अगर मैं ये करू? ये कहकर उन्होंने 500 सौ रुपये के नोट को नीचे फेंक दिया! 


    और उससे अपने जूते से रगड़ने लगे फिर उन्होंने वो नोट को अपने हाथ मे लिया। 


    लेकिन अब वो नोट पूरी तरह तोड़ मोड़ और गंदा हो गया था। फिर उन्होंने पूछा क्या अभी भी इस नोट को कोई लेना चाहता हैं? Class में बैठे लोगों के हाथ अभी भी ऊपर ही थे, 


    Dear Friends इससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैंने इस नोट के साथ क्या-किया? लेकिन अब भी आप इससे लेना चाहते हैं, क्योंकि इतना कुछ करने के बाद भी इसका मूल्य कम नहीं हुआ है। अब भी इसका मूल्य 500 सौ रुपये ही है। 


    यही चीज़ हुमारे साथ होती हैं, कई बार हम अपनी ज़िंदगी में गिरते हैं। कठनाइयों से लड़ते-लड़ते थक जाते हैं, अपने ग़लत Decision से भारी मुस्किलो का सामना करते हैं! 


    इन सारी परिस्थितियों में जूझ कर हम अपने आप को मूल्यहीन और बेकार समझने लगते हैं। 


    लेकिन इसका ये मतलब नहीं है, के हमारी ज़िंदगी में क्या हो चुका है, और भविष्य में क्या होगा। आप अपना महत्व कभी नहीं खो सकते। 


    Lesson Of This Story 


    आप ख़ास हैं_ इसे कभी न भूले।


    डरना मना है Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार की बात है एक जंगल में एक सियार रहता था, 


    वो काफ़ी बूढ़ा हो चुका था, उसमे इतनी ताकत नहीं बची थी कि शिकार करके अपनी भूख मिटा सके। 


    एक रात जब शियार भूख से इधर उधर भटक रहा था तभी उसे पता चला कि एक रास्ते पर एक कुत्ता का मृत शरीर पड़ा है, तब वह उस रास्ते चल देता है, 


    फिर अचानक उसको उस रास्ते से बहुत डरावनी आवाजे सुनाई देती हैं। 


    तब वह रास्ता बदल देता है पर सोचता है अगर रास्ता बदल दिया तो वैसे भी भूख से मरने वाला ही हूं तो क्यों ना इसी रास्ते पर जाकर अपनी भूख मिटाऊं। 


    तब वह उसी रास्ते पे चल देता है जहां कुत्ते का मृत शरीर पड़ा था। 


    वहां पहुंच कर उसने देखा कि वो डरावनी आवाजे दो पेड़ो की डालियों के आपस में टकराने से आ रही थी, जो हवा की वजह से ही आपस में टकरा रही थीं। 


    ये देख कर शियार जोर से हंसने लगता है, 


    मै फालतू में डर रहा था अच्छा हुआ मैंने रास्ता नहीं बदला बरना भूख से मर जाता। 


    फिर वो मृत कुत्ते का शरीर खाकर अपनी भूख मिटाता है और वापस चला जाता है। 


    Lesson Of This Story 


    दोस्तो इसीलिए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहो बिना इन डरावनी आवाजों पर ध्यान दिए और सफल बनो, ये सब फालतू की आवाजे होती है जो आपको ज़िन्दगी में आगे नहीं बढ़ने देती हैं। 


    सबसे बड़ा ज्ञान Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार की बात है- 


    एक गांव में एक मूर्तिकार रहा करता था। वो काफी खूबसूरत मूर्ति बनाता था और इस काम से वो अच्छा कमा लेता था। 


    उसे एक बेटा हुआ 


    इस बच्चे ने बचपन से ही मूर्ति बनानी शुरू कर दी और बेटा भी बहुत अच्छी मूर्ति बनाने लगा, बाप अपने बेटे की मूर्ति देख कर बहुत खुश होता। 


    लेकिन बाप हर बार बेटे की मूर्तियो में कोई न कोई कमी निकाल दिया करता था। 


    बेटा भी कोई शिकायत नही करता था। वो अपने बाप की सलाह पर अमल करते हुए अपनी मूर्तियों को और बेहतर करता गया। 


    इस लगातार सुधार की बजह से बेटे की मूर्तियां बाप से अच्छी बनने लगीं। और ऐसा भी समय आ गया लोग बेटे की मूर्तियों को बहुत पैसे देकर खरीद ने लगे। 


    जबकि बाप की मूर्तियां उसके पहले वाले दाम में ही बिकती रहीं। 


    लेकिन बाप अभी भी बेटे की मूर्तियो में कमियां निकाल ही देता था, लेकिन बेटे को अब ये अच्छा नही लगता था। 


    वो बिना मन के अपनी कमियों को मान लेता था 


    और सुधार कर देता था। 


    फिर एक दिन ऐसा भी आया जब बेटे के सब्र ने जवाब दे ही दिया। 


    बाप जब कमिया निकाल रहा था तब बेटा बोला- 


    आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे आप बहुत बड़े मूर्तिकार हैं। 


    अगर आपको इतनी ही समझ होती तो आपकी बनाई हुई मूर्तिया मेरे से महंगी बिकती। 


    मुझे नहीं लगता की आप की सलाह की मुझे कोई जरूरत है। मेरी मूर्तिया Perfect हैं। 


    बाप ने बेटे की ये बात सुनी और उसे सलाह देना और उसकी मूर्तियों में कमियां निकालाना बन्द कर दिया। 


    कुछ महीने तो लड़का खुश रहा फिर उसने ध्यान दिया कि लोग अब उसकी मूर्तियों की उतनी तारीफ नहीं करते जितनी पहले किया करते थे। 


    और इसकी मूर्तियों के दाम भी गिरने लगे। 


    शुरू में तो बेटे को कुछ भी समझ नही आया। 


    फिर वो अपने बाप के पास गया। 


    और उसे समस्या के बारे में बताया। 


    बाप ने उसे बहुत शान्ति से सुना जैसे उसे पता था कि एक दिन ऐसा भी आएगा। 


    बेटे ने भी इस बात को notice किया और बोला- 


    क्या आप जानते थे कि ऐसा होने वाला है? 


    बाप बोला-हाँ।! 


    क्योकि अब से कई साल पहले मैं भी ऐसे हालात से टकराया था। 


    बेटे ने सवाल किया-फिर आपने मुझे समझाया क्यों नही? 


    बाप ने जवाब दिया-क्योकि तुम समझना नहीं चाहते थे। 


    मै जानता हूं कि मैं तुम्हारे जितनी अच्छी मूर्ति नही बनाता, ये भी हो सकता है कि मूर्तियों के बारे में मेरी सलाह गलत हो और ऐसा भी नही है कि मेरी सलाह की बजह से तुम्हारी मूर्ति अच्छी बनी हो। 


    लेकिन जब मैं तुम्हारी मूर्तियों में कमियां दिखाया करता था तब तुम अपनी बनाई हुई मूर्तियों से संतुष्ट(satisfy) नही होते थे। 


    तुम खुद को और भी ज्यादा बेहतर करने की कोशिश करते थे और बही बेहतर होने की कोशिश तुम्हारी कामयाबी का कारण था। 


    लेकिन जिस दिन तुम अपने काम से संतुष्ट हो गए 


    और तुम ने ये भी मान लिया कि इस काम मे और बेहतर होने की गुंजाइश नही है, तब तुम्हारी Growth(विकाश) भी रुक गयी। 


    लोग हमेशा तुम से बेहतर की उम्मीद करते हैं और यही कारण हैं की तुम्हारी मूर्तियों की तारीफ नही होती और न ही तुम्हे उनके लिए ज्यादा पैसे मिलते हैं। 


    बेटा कुछ देर चुप रहा फिर उसने सवाल किया तो अब मुझे क्या करना चाहिए। 


    बाप ने एक लाइन में जवाब दिया-असंतुष्ट (Un fulfill) होना सीख लो। 


    और मान लो कि तुममे और बेहतर होने की गुंजाइस बाकी है यही एक बात तुम्हे आगे बेहतर होने के लिए प्रेरित ( Inspire) करती रहेगी और तुम्हे हमेशा बेहतर बनाती रहेगी। 


    Lesson Of This Story 


    stay hungry stay stupid


    फ़ालतू का ज्ञान Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक बार की बात है एक जंगल में बुलबुल नाम की चिड़िया रहती थीं, ठंड का मौसम आने वाला था सभी जानवर उससे बचने के लिए तैयारी करने लगे। 


    बुलबुल ने भी एक शानदार घोसला बनाया और आने वाली बारिश से बचने के लिए उसे चारो तरफ से घास से ढक दिया।औ 


    एक दिन अचानक बहुत घनघोर वर्षा शुरू हो गई जिससे बचने के लिए सभी जानवर इधर उधर भागने लगे, बुलबुल आराम से अपने घोसले में बैठ गई। 


    तभी एक बंदर खुद को बचाने के लिए उस पेड़ के नीचे आ पहुंचा। 


    बंदर की हालत देख बुलबुल ने कहा-तुम इतने होशियार बने फिरते हो फिर भी बारिश से बचने के लिए घर नहीं बनाया। 


    ये सुनकर बंदर को बहुत गुस्सा आया पर वह चुप रहा। 


    बुलबुल फिर बोली पूरी गर्मी आलस में बिता दी अच्छा होता अपने लिए घर बना लेते। 


    बंदर ने अपने गुस्से को काबू किया और चुप रहा। 


    वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी और हवाएं और तेज हो रहीं थी, बेचारा बंदर ठंड से कापने लगा, पर बुलबुल ने तो मानो कसम खा रखी थी उसे छेड़ने की। 


    बह फिर बोली तुमने थोड़ी अक्ल दिखाई होती तो इस हालत… 


    बुलबुल ने अपनी बात खतम भी नहीं की थी के बंदर पेड़ पर चढ़ गया और बोला-भले मुझे अपना घर बनाना नहीं आता पर तोड़ना अच्छे से आता है। 


    ये कहते हुए बंदर से बुलबुल चिड़िया का घोसला 


    तहस नहस कर दिया। 


    अब बंदर की तरह बुलबुल भी बे घर हो गई। 


    Lesson of this story 


    दोस्तो किसी मुस्किल में पड़े व्यक्ति की सहायता कर सकते हो तो जरूर करो पर फालतू का ज्ञान मत दो। 


    सबसे बड़ा शत्रु Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    बहुत समय पहले की बात है-एक गांव में एक लड़का रहता था वो बहुत ही ग़ुस्सैल था। 


    छोटी-छोटी बात पे अपना आपा खो बैठता। 


    उस लड़के से परेशान होकर उसके पिता ने उसे कीलो से भरा थैला दिया और कहा- 


    अब जब भी तुम्हें गुस्सा आये तो तुम इस थैले में से एक कील निकलना और बाड़े में ठोक देना। 


    अगले दिन उस लड़के को चालीस बार गुस्सा आया इतनी ही कीले उसने उस बाड़े में ठोक दी। धीरे थैले में कीलो की संख्या घटने लगी। फिर उस लड़के ने सोचा इतनी मेहनत करने से बेहतर हैं । 


    अपने गुस्से पे काबू पा लिया जाए। उसने कुछ ही हफ़्तों में अपने गुस्से पे बहुत हद तक काबू करना सीख लिया। 


    और फिर एक दिन ऐसा आया उस लड़के ने दिन में एक भी बार गुस्सा नहीं किया। जब उसने अपने पिता को ये बात बताई तो उसके पिता ने उसको फिर एक काम दे दिया।(Moral stories in Hindi composed) 


    उन्होंने कहा-अब हर दिन जिस दिन तुम्हें एक बार भी गुस्सा ना आए बाड़े में से एक कील निकाल देना। लड़के ने ऐसा ही किया। 


    और बहुत दिन बाद एक ऐसा दिन आया जब लड़के ने बाड़े में लगी आख़री कील को भी निकाल दिया और तब वो पिता के पास खुश होकर गया। 


    तब पिता जी उसका हाथ पकड़ कर उस बाड़े के पास ले गए और बोले-बेटे तुमनें बहुत अच्छा काम किया लेकिन क्या तुम बाड़े में हुए छेदों को देख पा रहे हो। 


    अब वो बाड़ा पहले जैसा नहीं बन सकता जैसे वो पहले था। तुम गुस्से में कुछ ऐसा कह जाते हो के वो शब्द इसी तरह सामने वाले इंसान के दिल पे गहरा घाव छोड़ जाते है। 


    Lesson Of This Story 


    गुस्से में हम कई बार बहुत गलत कर जाते हैं, जिसकी वजह से हमें पूरी जिंदगी पछताना पड़ता है, क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है इस पे काबू पाना सीखे।


    कुए का मेंढक Hindi Short Stories With moral for youngsters 


    एक कुए में एक मेंढक रहता था। उसके पास समुन्द्र से एक बड़ी मछली आई। 


    उसने मेंढक से बोला-मैं अभी-अभी समुन्द्र से आई हूं। 


    उस मेंढक ने पूछा-ये समुन्द्र क्या होता हैं ? 


    मछली बोली-समुन्द्र मतलब जहां पे बहुत पानी हैं। मेंढक बोला-बहुत पानी मतलब कितना बहुत पानी हैं? 


    फिर मेंढक ने एक चौथाई कुएं की छलांग मारी और बोला क्या इतना पानी है ? 


    मछली बोली-अरे नहीं मेंढक! 


    इतना नहीं बहुत पानी हैं। 


    मेंढक ने फिर आधे कुंए की छलांग मारी और बोला-क्या इतना पानी हैं? 


    मछली बोली-अरे नहीं ये तो कुछ भी नहीं हैं। इससे भी ज़्यादा पानी होता हैं। 


    फिर मेंढक ने परेशान होकर पूरे कुंए का एक चक्कर लगाया और बोला-क्या इतना पानी होता हैं समुन्द्र में ? 


    मछली बोली-अरे नहीं… .. मेरे प्यारे मेंढक कैसे समझाऊ मैं तुम्हें, इससे भी ज़्यादा पानी होता हैं। 


    मेंढक बोला-तुम झूठ बोल रही हो क्योंकि इससे ज़्यादा पानी तो हो ही नहीं सकता। 


    क्योंकि मेंढक की सोच और उसकी दुनिया यही से शुरू होती हैं और यही पे खत्म होती हैं। 


    इससे ज़्यादा पानी उस मेंढक ने ना कभी देखा था और 


    ना ही कभी सुना था, जब सुना नहीं था, देखा नहीं था, 


    तो इससे ज़्यादा सोचेगा कैसे। 


    मछली बोली-आ बैठ मेरे पीछे और उसको ले गई समुन्द्र में। 


    मछली-ले देख कितना पानी हैं समुन्द्र में। 


    जैसे ही मेंढक ने समुन्द्र में इतना पानी देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई। 


    मेंढक-अरे ये क्या हैं इतना पानी तो मैंने आज तक नहीं देखा। 


    मेंढक की बोलती बंद हो गई। 


    Lesson Of This Story 


    हमेशा अपनी सोच से बड़ा सोचने की कोसिस करनी चाहिए,जरूरी नही के जो हमने देखा न हो वो हो न। 


    Moral Stories in Hindi – खुनी झील 


    एक बार की बात है एक जंगल में एक झील थी। जो खुनी झील के नाम से प्रसिद्ध थी। शाम के बाद कोई भी उस झील में पानी पिने के लिए जाता तो वापस नहीं आता था। एक दिन चुन्नू हिरण उस जंगल में रहने के लिए आया। 


    एक बार की बात है एक जंगल में एक झील थी। जो खुनी झील के नाम से प्रसिद्ध थी। शाम के बाद कोई भी उस झील में पानी पिने के लिए जाता तो वापस नहीं आता था। एक दिन चुन्नू हिरण उस जंगल में रहने के लिए आया। 


    उसकी मुलाकात जंगल में जग्गू बन्दर से हुई। जग्गू बन्दर ने चुन्नू हिरण को जंगल के बारे में सब बताया लेकिन उस झील के बारे में बताना भूल गया। जग्गू बन्दर ने दूसरे दिन चुन्नू हिरण को जंगल के सभी जानवरों से मिलाया। 


    जंगल में चुन्नू हिरण का सबसे अच्छा दोस्त एक चीकू खरगोश बन गया। चुन्नू हिरण को जब ही प्यास लगती थी तो वह उस झील में पानी पिने जाता था। वह शाम को भी उसमें पानी पिने जाता था। 


    एक शाम को वह उस झील में पानी पिने गया तो उसने उसमें बड़ी तेज़ी से अपनी और आता हुआ मगरमच्छ देख लिया। जिसे देखकर वह बड़ी तेज़ी से जंगल की तरफ भागने लगा। रास्ते में उसको जग्गू बन्दर मिल गया। 


    जग्गू ने चुन्नू हिरण से इतनी तेज़ भागने का कारण पूछा। चुन्नू हिरण ने उसको सारी बात बताई। जग्गू बन्दर ने कहा की मै तुमको बताना भूल गया था की वह एक खुनी झील है। जिसमे जो भी शाम के बाद जाता है वह वापिस नहीं आता। 


    लेकिन उस झील में मगरमच्छ क्या कर रहा है। उसे तो हमनें कभी नहीं देखा। इसका मतलब वह मगरमच्छ ही सभी जानवरों को खाता है जो भी शाम के बाद उस झील में पानी पिने जाता है। 


    अगले दिन जग्गू बन्दर जंगल के सभी जानवरों को ले जाकर झील में गया। मगरमच्छ सभी जानवरों को आता देखकर छुप गया। लेकिन मगरमच्छ की पीठ अभी भी पानी से ऊपर दिखाई दे रही थी। 


    सभी जानवरों ने कहा की यह पानी के बाहर जो चीज़ दिखाई दे रही है वह मगरमच्छ है। यह सुनकर मगरमच्छ कुछ नहीं बोला। चीकू खरगोश ने दिमाग लगाया और बोला नहीं यह तो पत्थर है। लेकिन हम तभी मानेंगे जब यह खुद बताएंगा। 


    यह सुनकर मगरमच्छ बोला की मै एक पत्थर हूँ। इससे सभी जानवरों को पता लग गया की यह एक मगरमच्छ है। चीकू खरगोश ने मगरमच्छ को कहा की तुम इतना भी नहीं जानते की पत्थर बोला नहीं करते। इसके बाद सभी जानवरों ने मिलकर उस मगरमच्छ को उस झील से भगा दिया और खुशी रहने लगे। 


    Lesson of the story 


    सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की यदि हम किसी भी मुसीबत का सामना बिना घबराये मिलकर करते है तो उससे छुटकारा पा सकते है।


    Moral Stories in Hindi – मेहनत का फल 


    एक गांव में दो मित्र नकुल और सोहन रहते थे। नकुल बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर एक बीघा जमीन खरीदी। जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे। 


    सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन नकुल कुछ काम नहीं करता बल्कि मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता। इसी तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी। 


    जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने नकुल को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलेगा क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है। 


    यह बात सुनकर नकुल बोला नहीं धन का तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से इसकी प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। भगवान के बिना कुछ संभव नहीं है। धन के बॅटवारे को लेकर दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे। 


    मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाने है तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना चाहिए। 


    दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। नकुल चावल की बोरी को लेकर मंदिर में गया और भगवान से इसके लिए प्रार्थना की। 


    अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुए। नकुल वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के पास गया। 


    मुखिया ने नकुल को कहा की दिखाओ तुमने कितने चावल साफ़ किये है। नकुल ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे। 


    जमींदार ने नकुल को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो। इसके बाद नकुल भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुई। 


    Lesson of the story: 


    सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। 


    Moral Stories in Hindi – खजाने की खोज 


    एक गांव में एक रामलाल नाम का एक किसान अपनी पत्नी और चार लड़को के साथ रहता था। रामलाल खेतों में मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालता था। लेकिन उसके चारो लड़के आलसी थे। 


    जो गांव में वैसे ही इधर उधर घूमते रहते थे। एक दिन रामलाल ने अपनी पत्नी से कहा की अभी तो मै खेतों में काम कर रहा हूँ। लेकिन मेरे बाद इन लड़को का क्या होगा। इन्होने तो कभी मेहनत भी नहीं करी। ये तो कभी खेत में भी नहीं गए। 


    रामलाल की पत्नी ने कहा की धीरे ये भी काम करने लगेंगे। समय बीतता गया और रामलाल के लड़के कोई काम नहीं करते थे। एक बार रामलाल बहुत बीमार पड़ गया। वह काफी दिनों तक बीमार ही रहा। 


    उसने अपनी पत्नी को कहा की वह चारों लड़को को बुला कर लाये। उसकी पत्नी चारों लड़को को बुलाकर लायी। रामलाल ने कहा लगता है की अब मै ज्यादा दिनों तक जिन्दा नहीं रहूँगा। रामलाल को चिंता थी की उसके जाने के बाद उसके बेटों का क्या होगा। 


    इसलिए उसने कहा बेटों मैने अपने जीवन में जो भी कुछ कमाया है वह खजाना अपने खेतों के निचे दबा रखा है। मेरे बाद तुम उसमे से खजाना निकालकर आपस में बाँट लेना। यह बात सुनकर चारों लड़के खुश हो गए। 


    कुछ समय बाद रामलाल की मृत्यु हो गयी। रामलाल की मृत्यु के कुछ दिनों बाद उसके लड़के खेत में दबा खजाना निकालने गए। उन्होंने सुबह से लेकर शाम तक सारा खेत खोद दिया। लेकिन उनको कोई भी खजाना नज़र नहीं आया। 


    लड़के घर आकर अपनी माँ से बोले माँ पिताजी ने हमसे झूठ बोला था। उस खेत में हमें कोई खजाना नहीं मिला। उसकी माँ ने बताया की तुम्हारे पिताजी ने जीवन में यही घर और खेत ही कमाया है। लेकिन अब तुमने खेत खोद ही दिया है तो उसमे बीज बो दो। 


    इसके बाद लड़को ने बीज बोये और माँ के कहेनुसार उसमे पानी देते गए। कुछ समय बाद फसल पक कर तैयार हो गयी। जिसको बेचकर लड़कों को अच्छा मुनाफा हुआ। जिसे लेकर वह अपनी माँ के पास पहुंचे। माँ ने कहा की तुम्हारी मेहनत ही असली खजाना है यही तुम्हारे पिताजी तुमको समझाना चाहते थे। 


    Lesson of the Story 


    सीख: हमें आलस्य को त्यागकर मेहनत करना चाहिए। मेहनत ही इंसान की असली दौलत है।


    Moral Stories in Hindi – डरपोक पत्थर 


    बहुत पहले की बात है एक शिल्पकार मूर्ति बनाने के लिए जंगल में पत्थर ढूंढने गया। वहाँ उसको एक बहुत ही अच्छा पत्थर मिल गया। जिसको देखकर वह बहुत खुश हुआ और कहा यह मूर्ति बनाने के लिए बहुत ही सही है। 


    जब वह आ रहा था तो उसको एक और पत्थर मिला उसने उस पत्थर को भी अपने साथ ले लिया। घर जाकर उसने पत्थर को उठा कर अपने औजारों से उस पर कारीगरी करनी शुरू कर दिया। 


    औजारों की चोट जब पत्थर पर हुई तो वह पत्थर बोलने लगा की मुझको छोड़ दो इससे मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अगर तुम मुझ पर चोट करोगे तो मै बिखर कर अलग हो जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर पर मूर्ति बना लो। 


    पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गयी। उसने पत्थर को छोड़ दिया और दूसरे पत्थर को लेकर मूर्ति बनाने लगा। वह पत्थर कुछ नहीं बोला। कुछ समय में शिल्पकार ने उस पत्थर से बहुत अच्छी भगवान की मूर्ति बना दी। 


    गांव के लोग मूर्ति बनने के बाद उसको लेने आये। उनने सोचा की हमें नारियल फोड़ने के लिए एक और पत्थर की जरुरत होगी। उन्होंने वहाँ रखे पहले पत्थर को भी अपने साथ ले लिया। मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और उसके सामने उसी पत्थर को रख दिया। 


    अब जब भी कोई व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने आता तो मूर्ति को फूलों से पूजा करता, दूध से स्नान कराता और उस पत्थर पर नारियल फोड़ता था। जब लोग उस पत्थर पर नारियल फोड़ते तो बहुत परेशान होता। 


    उसको दर्द होता और वह चिल्लाता लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं था । उस पत्थर ने मूर्ति बने पत्थर से बात करी और कहा की तुम तो बड़े मजे से हो लोग तो तुम्हारी पूजा करते है। तुमको दूध से स्नान कराते है और लड्डुओं का प्रसाद चढ़ाते है। 


    लेकिन मेरी तो किस्मत ही ख़राब है मुझ पर लोग नारियल फोड़ कर जाते है। इस पर मूर्ति बने पत्थर ने कहा की जब शिल्पकार तुम पर कारीगरी कर रहा था यदि तुम उस समय उसको नहीं रोकते तो आज मेरी जगह तुम होते। 


    लेकिन तुमने आसान रास्ता चुना इसलिए अभी तुम दुःख उठा रहे हो। उस पत्थर को मूर्ति बने पत्थर की बात समझ आ गयी थी। उसने कहा की अब से मै भी कोई शिकायत नहीं करूँगा। इसके बाद लोग आकर उस पर नारियल फोड़ते। 


    नारियल टूटने से उस पर भी नारियल का पानी गिरता और अब लोग मूर्ति को प्रसाद का भोग लगाकर उस पत्थर पर रखने लगे। 


    Lesson of the Story 


    सीख: हमें कभी भी कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए।


    YOUR OPINION : 


    जिससे आपको नयापन का अनुभव हो। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़ कर बोर हो गए है तो। यहाँ पर हम आपको सबसे अच्छी 100+ Moral stories in Hindi for youngsters दे रहे है.. 


    Moral stories in Hindi यानी नैतिक कहानियां हिंदी में यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं। 


    Ap yeh sare hindi kahaniya pariye aur maja lijiye apka understudy yeh toh bachche ki sath. agar apko yeh 100 se jada moral story in hindi achcha laga hain to jaroor specialty remark kar dena.